शिव के पंचमुखी और अष्टमूर्ति स्वरूप का हुआ गुणगान, कथा पंडाल में गूंजा ‘हर-हर महादेव’
शिवमहापुराण कथा के सप्तम दिवस भगवान शिव के विविध अवतारों का वर्णन, गीता पाठ से भक्तिमय हुआ स्मृति लॉन
शिवमहापुराण कथा सिवनी में शिव के पंचमुखी और अष्टमूर्ति स्वरूप का वर्णन, गूंजा हर-हर महादेव
Seoni, 09 August 2026
सिवनी यशो:- भगवान शिव केवल संहार के देवता नहीं, बल्कि सृष्टि के कल्याण, धर्म की स्थापना और भक्तों की रक्षा के लिए समय-समय पर विभिन्न स्वरूपों में प्रकट होने वाले करुणामूर्ति हैं। शिवपुराण में भगवान शंकर के अनेक दिव्य अवतारों और उनकी अद्भुत लीलाओं का वर्णन मिलता है।
उक्त विचार स्मृति लॉन में चल रही शिवमहापुराण कथा के सप्तम दिवस कथा-व्यास पूज्य ब्रह्मचारी श्री निर्विकल्प स्वरूप जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने भगवान शंकर के विविध अवतारों और उनकी लोककल्याणकारी लीलाओं का मार्मिक एवं दार्शनिक विवेचन किया। कथा के दौरान भक्ति, ज्ञान और आध्यात्म की त्रिवेणी प्रवाहित होती रही।

सद्योजात से ईशान तक पंचमुखी स्वरूपों का रहस्य
पूज्य महाराज ने भगवान शिव के पांच प्रमुख स्वरूपों का वर्णन करते हुए बताया कि श्वेतलोहित कल्प में सद्योजात, रक्त कल्प में वामदेव, वीतवासा कल्प में तत्पुरुष, शिव कल्प में अघोर तथा विश्वरूप कल्प में ईशान नाम से भगवान शिव ने अवतार धारण किया।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव के ये स्वरूप केवल नाम मात्र नहीं हैं, बल्कि उनकी दिव्य शक्तियों और सृष्टि के गहन आध्यात्मिक रहस्यों के प्रतीक हैं। भगवान ने इन स्वरूपों के माध्यम से देवताओं की सहायता, सज्जनों की रक्षा और धर्म की प्रतिष्ठा के लिए अनेक लीलाएं कीं।
अष्टमूर्ति स्वरूप में समाया संपूर्ण ब्रह्मांड
कथा व्यास ने भगवान शिव के प्रसिद्ध अष्टमूर्ति स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा कि सर्व, भव, रुद्र, उग्र, भीम, पशुपति, ईशान और महादेव भगवान शंकर के आठ प्रमुख स्वरूप माने गए हैं।
उन्होंने बताया कि ये आठ स्वरूप क्रमशः पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, सूर्य, चंद्रमा और आत्मा के प्रतीक माने जाते हैं। अर्थात भगवान शिव की सत्ता केवल मंदिरों और तीर्थों तक सीमित नहीं है, बल्कि चराचर जगत के कण-कण में उनकी दिव्य उपस्थिति विद्यमान है।

एकादश स्वरूपों सहित अनेक अवतारों का वर्णन
सप्तम दिवस की कथा में पूज्य ब्रह्मचारी श्री निर्विकल्प स्वरूप जी महाराज ने भगवान शिव के अनेक अवतारों की कथा सुनाते हुए एकादश स्वरूपों का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की प्रत्येक लीला में धर्म, भक्ति, वैराग्य, करुणा और लोकमंगल का संदेश निहित है।
कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान शिव की दिव्य लीलाओं का श्रवण कर भावविभोर होते रहे और कथा पंडाल लगातार ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंजता रहा।
गीता पाठ से और भक्तिमय हुआ कथा पंडाल
एकादशी के पावन अवसर पर गीता पराभक्ति मंडल के तत्वावधान में भव्य शिवकथा मंच से गीता पाठ का आयोजन किया गया। इसमें गीता पराभक्ति मंडल की लगभग 11 शाखाओं ने सहभागिता की।
श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण गीता पाठ ने कथा के वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। इस दौरान मंडल से जुड़े साधकों ने अधिक से अधिक लोगों को आध्यात्मिक चेतना और गीता के संदेश से जोड़ने का आह्वान किया।
गीता पराभक्ति मंडल से जुड़ने के इच्छुक श्रद्धालुओं से अपने क्षेत्र की निकटतम शाखा से संपर्क करने की अपील की गई।
गीता पराभक्ति मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं महाराज
ज्ञात हो कि ब्रह्मलीन द्विपीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के परम कृपापात्र शिष्य एवं गीता मनीषी ब्रह्मचारी श्री निर्विकल्प स्वरूप जी महाराज गीता पराभक्ति मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंजा स्मृति लॉन
शिवमहापुराण कथा के सप्तम दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर भगवान शंकर की अमृतवाणी का श्रवण किया। कथा के प्रत्येक प्रसंग के साथ श्रद्धालुओं के मुख से उठता ‘हर-हर महादेव’ का जयघोष पूरे स्मृति लॉन को शिवभक्ति के महासागर में परिवर्तित करता रहा।
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