छिंदवाड़ामध्यप्रदेश

पॉलिथिन की पन्नी में चाय देना यानी स्वास्थ्य को खतरा

पॉलिथिन में गर्म चाय: छिंदवाड़ा में स्वास्थ्य से खिलवाड़ पर प्रशासन से सवाल

गोविन्द चौरसिया
09 September 2026
छिंदवाड़ा यशो:-
 पॉलिथिन की पन्नी में गर्म चाय देने का प्रचलन लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर के अनेक होटल और चाय विक्रेता ग्राहकों को गर्म चाय पॉलिथिन की पन्नी में पैक करके दे रहे हैं। इस संबंध में लगातार समाचार प्रकाशित होने के बावजूद प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, गर्म खाद्य पदार्थों को प्लास्टिक की ऐसी सामग्री में रखना स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं है। अधिक तापमान के संपर्क में आने पर प्लास्टिक से विभिन्न रसायनों और सूक्ष्म प्लास्टिक कणों के भोजन या पेय में पहुंचने की आशंका रहती है। लंबे समय तक ऐसे पदार्थों के संपर्क में रहने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए गर्म चाय को पॉलिथिन में देने की प्रथा पर तत्काल रोक लगाने की आवश्यकता है।

इस समस्या को समाप्त करने के लिए प्रशासन, शासन और सामाजिक संगठनों को संयुक्त रूप से अभियान चलाना चाहिए। नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों और स्कूलों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा सकता है। होटल और चाय विक्रेताओं को भी गर्म चाय के लिए सुरक्षित विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

अस्पतालों के आसपास भी जरूरी है जागरूकता

छिंदवाड़ा में निजी अस्पतालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अनेक अस्पतालों में कैंटीन की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों के परिजनों को आसपास की होटलों और दुकानों से चाय-नाश्ता तथा भोजन लाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में यदि गर्म चाय पॉलिथिन की पन्नी में दी जाती है तो मरीजों के परिजन अनजाने में स्वास्थ्य के लिए अनुचित विकल्प अपना रहे हैं।

प्रशासन को अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं की भी समीक्षा करनी चाहिए। जिन अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज भर्ती होते हैं, वहां स्वच्छ और किफायती भोजन उपलब्ध कराने के लिए कैंटीन की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे मरीजों और उनके परिजनों को सुरक्षित एवं स्वच्छ भोजन आसानी से मिल सकेगा।

थर्मस या सुरक्षित बर्तनों का हो इस्तेमाल

हाल ही में राजीव गांधी बस स्टैंड क्षेत्र स्थित आनंद अस्पताल के आसपास भी कैंटीन की व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को बाहर से चाय लानी पड़ती है। ऐसे में होटल संचालकों को चाहिए कि वे पॉलिथिन की पन्नी के बजाय छोटे थर्मस या अन्य सुरक्षित खाद्य-ग्रेड कंटेनर का उपयोग करें। मरीजों के परिजनों को भी चाहिए कि वे गर्म चाय के लिए थर्मस या सुरक्षित बर्तन का इस्तेमाल करें।

अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों और कर्मचारियों को भी मरीजों के परिजनों को इस संबंध में जागरूक करना चाहिए। छोटी-सी सावधानी लोगों को प्लास्टिक के अनुचित इस्तेमाल से बचा सकती है।

आम आदमी को भी बनना होगा जागरूक

यह समस्या केवल छिंदवाड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अनेक हिस्सों में गर्म खाद्य पदार्थों को प्लास्टिक में देने की समस्या देखने को मिलती है। सामाजिक संगठनों द्वारा इस विषय में शासन स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया गया है।

एक ओर नगरीय निकाय पॉलिथिन के उपयोग और बिक्री के खिलाफ कार्रवाई करते हैं, वहीं दूसरी ओर गर्म चाय पॉलिथिन की पन्नी में दिए जाने पर प्रभावी रोक नहीं दिखाई देती। इस विरोधाभास को दूर करने की आवश्यकता है।

अब आम आदमी को भी इस मुहिम में भागीदारी करनी होगी। जहां भी गर्म चाय पॉलिथिन की पन्नी में दी जा रही हो, वहां ग्राहक स्वयं इसका विरोध करें और सुरक्षित विकल्प की मांग करें। होटल संचालक भी जिम्मेदारी समझें और पॉलिथिन के स्थान पर थर्मस, कागज के उपयुक्त कप या अन्य सुरक्षित विकल्पों का इस्तेमाल करें।

स्वस्थ समाज के लिए जरूरी है कि गर्म खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों के लिए प्लास्टिक के अनुचित इस्तेमाल को रोका जाए और प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिक भी इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

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