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झाड़ फूंक के चक्कर में गर्भवती महिला का बिगड़ रहा था स्वास्थ, चिकित्सा टीम ने दिखाई समझदारी

स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस की मदद से महिला का कराया इलाज

छपारा यशो:- आज भी ग्रामीण क्षेत्र में लोग झाड़ फूंक की जंजीरों में इस कदर जकड़े हुये है कि उन्हें समझना बेहद मुश्किल काम है जिससे कई बार झाड़ फूंक के चक्कर में मरीज की जान भी चली जाती है । इसी प्रकार का एक मामला जिले के आदिवासी विकास खंड छपारा का सामने आया है । जहां स्वास्थ विभाग ने गर्भवती महिला के लिए 100 डायल पुलिस विभाग का सहारा लिया और महिला को इलाज के लिए जिला चिकित्सालय भर्ती कराया. । 
जानकारी के अनुसार छपारा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले सिंदरई ग्राम में गर्भवती महिला ललिता पति नीलेश धुर्वे जिसके शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा 6 ग्राम बची हुई थी. जिनको ब्लड की बेहद जरूरत थी लेकिन उनके पति झाड़ फूंक के चक्कर में महिला को जिला अस्पताल ले जाकर भर्ती करने के लिए तैयार नहीं थे जहां उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सकती स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बताया कि महिला को पीलिया हो गया था. और जो पांच माह से गर्भवती हैं । लगातार उनकी हालत बिगड़ रही थी बावजूद इसके उनके पति के द्वारा झाड़ फूंक के चक्कर में ध्यान नहीं दिया जा रहा था । स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उनके घर पहुंच कर समझाइए भी थी परुंतु वह नहीं माने तब स्वास्थ्य विभाग के द्वारा डायल 100 की मदद से महिला को जिला अस्पताल में ले जाकर आवश्यक उपचार किया गया । 
दी गयी जानकारी में बताया गया है कि सी एच ओ प्रदीप कुमार, सेक्टर सुपरवाजर विजय चन्द्रे, ग्राम की आशा कारकर्ता मालती उइके के दवारा महिला के घर जाकर समझाइश दी कि वह जिला चिकित्सालय में जाये एवं रक्त लगवाए, लेकिन उक्त महिला के पति मना कर दिए गया था जिसकी जानकारी बीएमओ छपारा को दी गई. छपारा बीएमओ के मार्गदर्शन में 100 डायल कर पुलिस के माध्यम से जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया, व रक्त लगवाने कि व्यवथा की. वही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ ने कहा कि हमारी प्राथमिकता है गर्भवती महिलाओं को शासन की ओर से जो भी लाभ उन्हें मिलता है उन तक पहुंचाएं और उनका इलाज जच्चा बच्चा दोनों सुरक्षित रहें । इसी के तहत हमारे द्वारा महिला के संबंध में गंभीरता से लेकर उसका इलाज कराया गया है और ग्रामीणों को झाड़ फूंक के चक्कर में न रहकर अस्पताल में इलाज करने की सलाह दी गई है

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