सोलर कूकर-चूल्हा बढ़ावा दें, गैस निर्भरता घटेगी: गोविन्द चौरसिया
वैकल्पिक ऊर्जा से प्रदूषण कम होगा और विदेशी मुद्रा की बचत संभव
Chhindwara 21 March 2026
छिंदवाड़ा यशो:- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और संभावित तेल संकट के बीच वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाने की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। इसी संदर्भ में गोविन्द चौरसिया ने सोलर कूकर और सोलर चूल्हे के निर्माण एवं उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि संकट के समय नागरिकों को संयम बरतते हुए गैस का सीमित उपयोग करना चाहिए और जमाखोरी से बचना चाहिए। यदि हर उपभोक्ता अपनी आवश्यकता के अनुसार ही गैस का उपयोग करे, तो कृत्रिम संकट की स्थिति नहीं बनेगी।
सोलर कूकर एक बेहतर विकल्प
गोविन्द चौरसिया के अनुसार, सोलर कूकर खाना बनाने का एक पर्यावरण अनुकूल और किफायती माध्यम है। इसमें दाल, चावल, सब्जी और बाटी आसानी से बनाई जा सकती है। हालांकि इसमें समय अधिक लगता है, लेकिन यह गैस का एक प्रभावी विकल्प बन सकता है।
सरकार से पहल की मांग
उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को उद्योगपतियों को प्रोत्साहित कर सोलर कूकर और सोलर चूल्हों का निर्माण बढ़ाना चाहिए। पूर्व में वन विभाग द्वारा आदिवासी क्षेत्रों में सब्सिडी पर सोलर कूकर वितरित किए जाते थे, लेकिन अब उनका उपयोग लगभग बंद हो गया है।
• छोटे सोलर पैनल विकसित किए जाएं
• बैटरी आधारित सोलर चूल्हे बनाए जाएं
• आम लोगों के लिए किफायती विकल्प उपलब्ध हों
आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ
उन्होंने कहा कि यदि सोलर चूल्हों का व्यापक उपयोग शुरू होता है, तो इससे गैस पर निर्भरता कम होगी, प्रदूषण घटेगा और विदेशों पर निर्भरता कम होने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी। इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।





