नेताओं और अधिकारियों के संरक्षित ठेकेदार का बरघाट क्षेत्र में भ्रष्टाचार का तांडव
बरघाट जनपद में ठेकेदार के कार्यों पर उठे सवाल, जनप्रतिनिधियों को कोस रहे है ग्रामीण
Seoni 04 June 2025
सिवनी यशो:- जिले के बरघाट जनपद क्षेत्र में राजनैतिक और प्रशासनिक अधिकारियों का संरक्षाण प्राप्त ठेकेदार द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों को लेकर स्थानीय जनता में जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही शिकायतों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की नाराजगी इस बात का संकेत है कि ठेकेदार को कथित रूप अनैतिक तरीके से शासकीय ठेके दिये जा रहे है ।
विशेष रूप से ग्राम पंचायत चिमनाखारी में निर्मित दो स्टॉप डेम को लेकर सैकड़ों ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को हस्ताक्षरित आवेदन सौंपते हुए निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि डेम में दरारें आ रही हैं और इसका कोई लाभ किसानों को नहीं मिल रहा, उल्टे नुकसान हो रहा है।
पंचायतों को दबाव में बेच रहे निर्माण कार्य
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बरघाट जनपद की अधिकांश ग्राम पंचायतों में ऐसे निर्माण कार्य, जिन्हें पंचायतें स्वयं कर सकती हैं, उन्हें अधिकारियों द्वारा दबाव डालकर ठेकेदारों को दे दिया जा रहा है। इसमें कथित रूप से मोटा कमीशन लिया जाता है और कार्य की गुणवत्ता बेहद निम्न स्तर की रहती है। यदि कोई पंचायत स्वयं कार्य करना चाहे तो ठेकेदार के कथित गुर्गे उन्हें मानसिक रूप से प्रताडि़त करते हैं और अच्छे कार्य को भी विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से “घटिया” घोषित करने की साजिश की जाती है।
प्रशासनिक चुप्पी बनी चिंता का विषय
स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने बार-बार शिकायत की है, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। परिणामस्वरूप, वे अपनी नाराजगी सोशल मीडिया के माध्यम से व्यक्त कर रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि ठेकेदार को संरक्षण किस मजबूरी में दिया जा रहा है और आम जनता की आवाज को अनसुना क्यों किया जा रहा है।
क्या कहना है जनता का
ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब शिकायतों का समाधान प्रशासन के स्तर पर नहीं होता, तो वे सोशल मीडिया को ही अपना माध्यम बनाते हैं। इससे स्पष्ट है कि जनता का विश्वास अब शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर से उठता जा रहा है।
ग्रामीणो को नहीं मिल रहा रोजगार
बरघाट जनपद की ग्राम पंचायतो में स्थानीय व्यक्तियों के पास निर्माण कार्यो से संबंधित संसाधन उपलब्ध है परंतु ठेकेदार इन्हें काम नहीं देता बल्कि स्वयं के संसाधनों से कार्य करता है यह भी नारजगी का एक विषय है । जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायतो में हो रहे निर्माण पंचायतो द्वारा ही कराये जाने है परंतु ठेकेदार से कमीशन लेकर पंचायतो के अधिकारो का उच्चाधिकारी दुरूपयोग कर रहे है । घटिया निर्माण कार्यो के लिये ठेकेदार कहीं जिम्मेदार भी नहीं होता क्योकि पंचायतो के कार्यो की निर्माण एजेंसी पंचायतो को बताया जाता है और काम ठेकेदार करता है जो कार्यो के नाम पर केवल लीपापोती करता है । यहाँ तक की मनरेगा के कार्यो भी ठेकेदार को दिये जा रहे है जिसमें मजदूरो को रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान है परंतु ठेकेदार मशीनो से कार्य कर मजदूरो को पलायन के लिये मजबूर कर रहा है ग्रामीण व्यक्तियों के संसाधनो को किराये पर नहीं लिया जा रहा है ।
विधायक – सांसद निधि और अधोसंरचना मद के कार्य भी ठेकेदार ही कर रहे है और सुदूर सड़को के काम भी इसी संरक्षित ठेकेदार द्वारा किये जा रहे है जनपद पंचायत अध्यक्ष बरघाट सहित ग्राम पंचायतो के सरपंच और ग्रामीण ठेकेदार को संरक्षण देने वाले जनप्रतिनिधियों से बेहद नाराज है और इनके विरूद्ध सोशल मीडिया में आक्रोशपूर्ण टिप्पणियाँ कर रहे है ।



