किसान की बेटी ने रचा सफलता का इतिहास, हिंदी साहित्य में हासिल की नेट-जेआरएफ
संघर्षों के बीच जारी रखी पढ़ाई, मेहनत और गुरुजनों के मार्गदर्शन से हासिल किया मुकाम
सिवनी यशो :- कहते हैं कि सपनों को पंख संसाधनों से नहीं, बल्कि हौसलों से मिलते हैं। इस कथन को ग्राम बकौड़ी, जिला सिवनी निवासी किसान की बेटी रानी पगारे ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प से साकार कर दिखाया है। सीमित संसाधनों और अनेक अभावों के बीच पढ़ाई जारी रखते हुए रानी ने हिंदी साहित्य विषय में यूजीसी नेट-जेआरएफ की पात्रता अर्जित कर अपने माता-पिता, गुरुजनों और पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है।
किसान परिवार से आने वाली रानी के लिए सफलता की यह राह आसान नहीं थी। साधारण पारिवारिक परिस्थितियों के बीच उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। परिस्थितियां लगातार चुनौतियां देती रहीं, लेकिन रानी का हौसला उन्हें आगे बढ़ाता रहा। उन्होंने अभावों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बनाया और कठिन परिश्रम के बल पर यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की।
माता-पिता के त्याग और आशीर्वाद को दिया सफलता का श्रेय
रानी के पिता राधेश्याम पगारे किसान हैं, जबकि मां विमला पगारे गृहिणी हैं। रानी अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। उन्होंने भावुक होकर बताया कि हर परिस्थिति में माता-पिता के साथ, त्याग, धैर्य, स्नेह और आशीर्वाद ने उन्हें आगे बढ़ने का संबल दिया। कठिन समय में परिवार का विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।
गुरुजनों का मार्गदर्शन बना सफलता की राह
पीजी कॉलेज की भूतपूर्व छात्रा रानी ने अपनी सफलता में गुरुजनों के योगदान को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के हिंदी विभाग के प्रोफेसर सत्येंद्र शेन्डे ने मार्गदर्शक के रूप में साहित्य की वैचारिक समझ विकसित करने के साथ ही नेट-जेआरएफ की तैयारी के लिए लगातार प्रेरित किया।
इसी तरह जनभागीदारी शिक्षिका छाया राय ने नेट-जेआरएफ की तैयारी के लिए ऑनलाइन पाठ्य सामग्री और अध्ययन संसाधनों के बारे में जानकारी दी तथा हर कदम पर प्रोत्साहित किया।
रानी ने दोनों शिक्षकों के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने केवल विषय का ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना, निरंतर मेहनत करना और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना भी सिखाया। कठिन दौर में मिले गुरुजनों के विश्वास और प्रोत्साहन ने उन्हें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
रिसर्च फेलोशिप के साथ प्रोफेसर बनने का सपना
नेट-जेआरएफ की पात्रता अर्जित करने के बाद रानी को शोध कार्य के दौरान लगभग 45 हजार रुपये प्रतिमाह रिसर्च फेलोशिप मिलने का अवसर मिलेगा। अब उनका सपना एक अच्छी, संवेदनशील और समर्पित प्रोफेसर बनकर शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देना है। वे विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए उनके सपनों को सही दिशा देना चाहती हैं।
रानी कहती हैं कि जिस तरह उनके माता-पिता ने उन पर विश्वास किया और गुरुजनों ने उन्हें सही दिशा दिखाई, उसी तरह वे भी भविष्य में विद्यार्थियों के सपनों को दिशा देने का प्रयास करेंगी।
“मेहनत का रास्ता कठिन, लेकिन मंजिल सुकून भरी”
अपनी सफलता से उत्साहित रानी ने विद्यार्थियों और युवाओं के लिए संदेश देते हुए कहा कि मेहनत का रास्ता जरूर कठिन होता है, लेकिन मंजिल सुकून भरी होती है। परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और खुद पर विश्वास कायम रहे तो सफलता अवश्य मिलती है।
रानी पगारे की यह उपलब्धि ग्रामीण अंचल के उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने साबित किया है कि प्रतिभा को अवसर भले ही देर से मिले, लेकिन दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत के सामने कोई भी अभाव स्थायी बाधा नहीं बन सकता।
रानी की इस उपलब्धि पर उनके माता-पिता, गुरुजनों, रिश्तेदारों, मित्रों और शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।



