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रोड बनी मुसीबत: शनि मंदिर रेलवे फाटक पर गड्ढों का साम्राज्य, जिम्मेदारों की चुप्पी से बढ़ रहा हादसों का खतरा

नागपुर रोड ओवरब्रिज निर्माण के कारण पूरा ट्रैफिक छिंदवाड़ा रोड पर, फिर भी मरम्मत को लेकर उदासीनता

छिंदवाड़ा रोड रेलवे क्रॉसिंग – रेलवे समिति भी मौन, स्थानीय समस्याओं पर नहीं दिख रही सक्रियता

सिवनी यशो :- शहर के शनि मंदिर के समीप स्थित रेलवे क्रॉसिंग इन दिनों आम नागरिकों के लिए परेशानी का नहीं, बल्कि संभावित खतरे का केंद्र बन चुकी है। रेलवे फाटक के दोनों ओर सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यहां सड़क कम और गड्ढों का जाल अधिक दिखाई देता है। बारिश के मौसम ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। ऐसे में हर दिन हजारों वाहन चालक और राहगीर अपनी जान जोखिम में डालकर इस मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं।

सिवनी के शनि मंदिर रेलवे फाटक पर गड्ढों से भरी सड़क और गुजरते वाहन
नागपुर रोड ओवरब्रिज निर्माण के चलते डायवर्सन बने शनि मंदिर रेलवे फाटक मार्ग पर गड्ढों से परेशान वाहन चालक।

विशेष चिंता का विषय यह है कि नागपुर रोड पर रेलवे ओवरब्रिज निर्माण कार्य चलने के कारण शहर का भारी ट्रैफिक वर्तमान में छिंदवाड़ा रोड स्थित इस रेलवे फाटक मार्ग से डायवर्ट किया गया है। इसके बावजूद सड़क की मरम्मत और रखरखाव को लेकर जिम्मेदार विभागों और निर्माण एजेंसी की उदासीनता समझ से परे है।

फाटक खुलते ही शुरू हो जाता है संघर्ष

स्थानीय नागरिकों के अनुसार जैसे ही रेलवे फाटक खुलता है, दोनों ओर खड़े वाहनों की लंबी कतार एक साथ आगे बढ़ती है। लेकिन सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढे यातायात को बाधित करते हैं और दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। दोपहिया वाहन चालक, बुजुर्ग और पैदल राहगीर सबसे अधिक परेशान हैं।

सिवनी के शनि मंदिर रेलवे फाटक पर गड्ढों से भरी सड़क और गुजरते वाहन
नागपुर रोड ओवरब्रिज निर्माण के चलते डायवर्सन बने शनि मंदिर रेलवे फाटक मार्ग पर गड्ढों से परेशान वाहन चालक।

बारिश के कारण गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है, जिससे कई बार वाहन चालक अचानक संतुलन खो बैठते हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यहां कभी भी कोई गंभीर दुर्घटना हो सकती है।

करोड़ों खर्च, फिर भी टिकाऊ सड़क नहीं

नागरिकों का कहना है कि कुछ वर्ष पूर्व ही इस मार्ग का निर्माण और मरम्मत कार्य कराया गया था। लेकिन थोड़े ही समय में सड़क की गुणवत्ता की पोल खुल गई। आज हालत यह है कि पूरी सड़क जगह-जगह से उखड़ चुकी है और गहरे गड्ढों में तब्दील हो गई है।

लोग सवाल उठा रहे हैं कि विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य क्यों नहीं हो पा रहे हैं? यदि सड़क निर्माण के कुछ वर्षों बाद ही यह स्थिति बन जाती है तो निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े होना स्वाभाविक है।

सिवनी के शनि मंदिर रेलवे फाटक पर गड्ढों से भरी सड़क और गुजरते वाहन
नागपुर रोड ओवरब्रिज निर्माण के चलते डायवर्सन बने शनि मंदिर रेलवे फाटक मार्ग पर गड्ढों से परेशान वाहन चालक।

डायवर्सन मार्ग है तो जिम्मेदारी भी तय हो

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब नागपुर रोड ओवरब्रिज निर्माण के कारण इस मार्ग का उपयोग अधिकृत डायवर्सन के रूप में कराया जा रहा है, तब निर्माण एजेंसी की भी जिम्मेदारी बनती है कि सड़क को सुरक्षित और उपयोग योग्य बनाए रखे।

लोगों का कहना है कि रेलवे क्रॉसिंग के दोनों ओर बने गड्ढों को भरने और सड़क को समतल करने के लिए किसी बड़े बजट की आवश्यकता नहीं है। मामूली मरम्मत कार्य से ही हजारों लोगों को राहत मिल सकती है। इसके बावजूद न तो निर्माण एजेंसी और न ही संबंधित विभाग इस दिशा में कोई ठोस पहल करते दिखाई दे रहे हैं।

ओवरब्रिज बनने तक क्या लोग यूं ही परेशान रहेंगे?

रेलवे ओवरब्रिज निर्माण कार्य अभी पूर्ण होने में समय ले सकता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि तब तक आम नागरिकों को क्या इसी जर्जर और खतरनाक मार्ग से गुजरने के लिए मजबूर रहना पड़ेगा?

नागरिकों का कहना है कि जब तक ओवरब्रिज तैयार नहीं हो जाता, तब तक वैकल्पिक मार्ग की सुरक्षा और मरम्मत सुनिश्चित करना प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

शिकायतें बहुत, समाधान नहीं

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं। निरीक्षण भी हुए, अधिकारियों को जानकारी भी दी गई, लेकिन समाधान के नाम पर केवल आश्वासन ही मिले। नतीजा यह है कि समस्या जस की तस बनी हुई है और लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।

हादसे के बाद जागेगा प्रशासन या पहले?

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, नगर पालिका, रेलवे विभाग और ओवरब्रिज निर्माण एजेंसी से मांग की है कि शनि मंदिर रेलवे फाटक के दोनों ओर सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए। उनका कहना है कि विकास केवल योजनाओं और घोषणाओं से नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाले कार्यों से साबित होता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी समय रहते इस गंभीर समस्या का समाधान करेंगे या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही व्यवस्था की नींद खुलेगी? यह सवाल आज हजारों नागरिकों की जुबान पर है।

रेलवे समिति भी मौन, स्थानीय समस्याओं पर नहीं दिख रही सक्रियता

शहर में रेलवे से जुड़ी स्थानीय समस्याओं के निराकरण और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से नागरिकों की समस्याओं को रेलवे प्रशासन तक पहुंचाने के लिए रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति एवं अन्य समन्वय व्यवस्थाएं मौजूद हैं। इन समितियों का उद्देश्य रेलवे क्षेत्र से संबंधित समस्याओं पर चर्चा कर समाधान के लिए पहल करना होता है।

इसके बावजूद शनि मंदिर रेलवे क्रॉसिंग की बदहाल सड़क और बढ़ते यातायात दबाव जैसे गंभीर मुद्दे पर अब तक किसी प्रकार की प्रभावी पहल दिखाई नहीं दी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब यह मार्ग प्रतिदिन हजारों लोगों द्वारा उपयोग किया जा रहा है और वर्तमान में शहर का प्रमुख डायवर्सन मार्ग भी बना हुआ है, तब रेलवे समिति और संबंधित जनप्रतिनिधियों को इस समस्या को प्राथमिकता से उठाना चाहिए था।

लोगों का कहना है कि यदि रेलवे समिति स्थानीय समस्याओं पर सक्रिय भूमिका निभाए तो रेलवे प्रशासन, जिला प्रशासन और निर्माण एजेंसी के बीच समन्वय स्थापित कर ऐसे मुद्दों का शीघ्र समाधान निकाला जा सकता है। लेकिन वर्तमान स्थिति में समिति की निष्क्रियता भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है

आज स्थिति यह है कि एक ओर रेलवे ओवरब्रिज निर्माण के कारण पूरा यातायात इसी मार्ग पर निर्भर है, दूसरी ओर सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। नगर पालिका, निर्माण एजेंसी, संबंधित विभाग और रेलवे समिति—सभी की जिम्मेदारियां कहीं न कहीं इस समस्या से जुड़ती हैं, लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस प्रयास दिखाई नहीं देता।

शहरवासी पूछ रहे हैं कि आखिर इस बदहाल मार्ग की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या प्रशासन, निर्माण एजेंसी और रेलवे समिति किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं, या फिर समय रहते लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी? यह सवाल अब केवल सड़क का नहीं, बल्कि जवाबदेही का भी बन चुका है

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