कपिल जी की नर्मदा परिक्रमा का सातवाँ दिन – साइकिल से भक्ति की यात्रा
नर्मदा साइकिल परिक्रमा: तप, त्याग और यात्रा -भाग 7
कपिलेश्वर से सिद्धेश्वर तक – श्रद्धा की उस पार (कपिल पांडे जी की साइकिल यात्रा पर आधारित नर्मदा परिक्रमा की सातवीं कड़ी)
लखन गाँव की सुबह: जहाँ प्रकृति करती है आमंत्रण
सुबह की ठंडी हवा और नर्मदा की मंद ध्वनि के बीच जब कपिल जी ने लखन गाँव में आँखें खोलीं, तो ऐसा लगा मानो स्वयं प्रकृति आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही हो।
कपिल जी की नर्मदा परिक्रमा का सातवाँ दिन – साइकिल से भक्ति की यात्रा
स्नान और आत्मिक जागरण
ठंडे जल में स्नान करते ही जैसे तन-मन दोनों जागृत हो गए। माँ नर्मदा की कृपा हर क्षण अनुभव हो रही थी।
कपिलेश्वर महादेव की ओर: श्रद्धा की राह
स्थानीय जनों ने बताया कि वहाँ से 9-9 किलोमीटर दूर कपिल मुनि की तपोभूमि “कपिलेश्वर महादेव” है। कपिल जी ने इसे धर्म मानकर तय किया – “जहाँ ऋषि ने तप किया, वहाँ पहुँचना भी तप ही है।”
कपिलेश्वर में ऊर्जा और अनुभूति
नर्मदा के किनारे पहुँचना, और वहाँ का आभा मंडल — अवर्णनीय था। वहाँ एक संत मिले, जो पहले मध्यप्रदेश पुलिस में थाना प्रभारी रहे थे और अब साधु जीवन जी रहे हैं। उन्होंने बताया:
“यही वह स्थल है जहाँ माँ गंगा, माँ नर्मदा से मिलने गुप्त रूप से आती हैं — यह एक आध्यात्मिक संगम है।”
कपिल जी की नर्मदा परिक्रमा का सातवाँ दिन – साइकिल से भक्ति की यात्रा
पांडवकालीन शिवमंदिर: 5000 वर्ष पुराना इतिहास
थोड़ी दूर पर एक प्राचीन मंदिर मिला, जहाँ पांडवों द्वारा स्थापित शिवलिंग के दर्शन हुए। वहाँ के पुजारी ने कहा:
“जो जीवन से हताश हो, वह एक बार नर्मदा परिक्रमा कर ले — जीवन बदल जाएगा।”
वापसी और आगे का मार्ग
आगे का रास्ता जलमग्न होने के कारण कपिल जी को पीछे लौटकर मुख्य मार्ग पकड़ना पड़ा, और फिर बड़वानी की ओर साइकिल से प्रस्थान हुआ।
कपिल जी की नर्मदा परिक्रमा का सातवाँ दिन – साइकिल से भक्ति की यात्रा
सिद्धेश्वर मंदिर: आज की विश्राम स्थली
रास्ते में मिले ग्रामीणों से मार्ग पूछते हुए, कपिल जी पहुँचे सिद्धेश्वर हनुमान मंदिर। यहाँ उन्हें आत्मीयता से स्वागत मिला — मंदिर सेवकों की चाय और श्रद्धालुजनों की मुस्कान ने मन प्रसन्न कर दिया।
पाँच वर्षीय बालक की मुस्कान में श्रद्धा
मंदिर प्रांगण में एक पाँच साल का बालक भी अपने पिता संग परिक्रमा कर रहा था। उसकी मुस्कान ने सिखा दिया — परिक्रमा उम्र से नहीं, श्रद्धा से होती है।
कपिल जी की नर्मदा परिक्रमा का सातवाँ दिन – साइकिल से भक्ति की यात्रा
संध्या आरती और संतोषपूर्ण विश्राम
संध्या आरती में सम्मिलित होकर यात्रा की थकान माँ नर्मदा को समर्पित की गई। रात साधारण बिस्तर पर थी, पर हृदय में दिव्य शांति।
संत का संकेत: अब आगे शूलपानी की चुनौती
एक संत ने संकेत दिया:
“अब जो भाग शुरू होगा, वह सबसे कठिन और गूढ़ है — शूलपानी मार्ग।”
अगले भाग की प्रतीक्षा करें:
नर्मदा परिक्रमा यात्रा – भाग 8: शूलपानी – जहाँ परीक्षण प्रारंभ होता है।