अजब एमपी का गजब कारनामा! बिना जांच ही बंद कर दी सीएम हेल्पलाइन शिकायत, पीड़ित बोला – “4 महीने बाद भी समस्या जस की तस”
सौसर नगर पालिका पर गंभीर सवाल, अवैध अतिक्रमण शिकायत का मौके पर पहुंचे बिना ही कर दिया निराकरण
सौसर सीएम हेल्पलाइन विवाद – बिना जांच बंद कर दी सीएम हेल्पलाइन शिकायत? नगर पालिका पर गंभीर आरोप
Chhindwara 10 May 2026
छिंदवाड़ा /सौसर यशो:- Sausar Municipal Council में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी CM Helpline 181 व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि नगर पालिका अधिकारियों ने बिना जांच किए और बिना समस्या का समाधान किए ही सीएम हेल्पलाइन शिकायत का निराकरण दिखाकर शिकायत बंद कर दी।
पीड़ित Ashok Lakde का कहना है कि उनकी समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है, जबकि रिकॉर्ड में शिकायत “निराकृत” बता दी गई।
4 महीने पहले की थी शिकायत, कार्रवाई अब तक नहीं
जानकारी के अनुसार अशोक लाकड़े ने 4 दिसंबर 2025 को एक कथित अवैध अतिक्रमण को लेकर नगर पालिका अधिकारियों को लिखित शिकायत दी थी। आरोप है कि लंबे समय तक शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित ने बाद में Neeraj Kumar Vashishtha को भी शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।
फिर सीएम हेल्पलाइन में शिकायत… और बिना जांच “निराकरण”
पीड़ित के अनुसार जब स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो 22 अप्रैल को सीएम हेल्पलाइन 181 पर शिकायत दर्ज कराई गई।
लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, बिना मौके पर जांच और बिना कार्रवाई के ही शिकायत बंद कर दी गई। पीड़ित का दावा है कि उन्हें मैसेज और कॉल के माध्यम से सूचना दी गई कि उनकी समस्या का निराकरण हो चुका है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब शिकायतकर्ता खुद समाधान से इनकार कर रहा है, तो फिर शिकायत का निराकरण किस आधार पर किया गया?
“क्या सिर्फ आंकड़ों के लिए बंद हो रही शिकायतें?”
मामले के सामने आने के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या सीएम हेल्पलाइन की शिकायतें केवल आंकड़ों में सुधार दिखाने के लिए जल्दबाजी में बंद की जा रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बिना जांच शिकायतों का निराकरण दिखाया जाएगा, तो आम जनता का भरोसा शिकायत निवारण व्यवस्था से उठ जाएगा।
पीड़ित बोले — “अब उच्च अधिकारियों से करेंगे शिकायत”
पीड़ित अशोक लाकड़े ने कहा है कि वे अब इस मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों और संभागीय स्तर पर करेंगे। उनका आरोप है कि नगर पालिका अधिकारियों ने शासन की मंशा के विपरीत कार्य किया है।
सरकार की मंशा पर उठे सवाल
प्रदेश सरकार जहां डिजिटल माध्यमों से जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने का दावा कर रही है, वहीं इस तरह के मामलों ने व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर बिना जांच शिकायत का निराकरण कैसे कर दिया गया और जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?



