सिवनी यशो:- सिवनी दक्षिण वन मंडल के कुरई प्रभारी वन परिक्षेत्र अधिकारी और सिवनी उडऩदस्त प्रमुख हरवेन्द्र बघेल पर आरोप है कि उन्होंने दो दो पदोन्नति अधिकारियों को गुमराह कर प्राप्त की है परंतु इनकी हुई शिकायतो की जाँच के बाद सारे तथ्य सक्षम अधिकारियों के संज्ञान में आ चुकी है परंतु हरवेन्द्र बधेल पर किसी प्रकार की कार्यवाही नही होने दक्षिण वन मंडल में असंतोष का वातावरण बना हुआ है । विभागीय अधिकारी हरवेन्द्र बघेल को उपकृत करने के लिये हरवेन्द्र से उच्च पदों में पदस्थ अधिकारियों को भी परेशान कर रहे है । जानकारी के अनुसार हरवेन्द्र बघेल अधिकारियों को गुमराह कर दो दो पदोन्नति प्राप्त करने के पश्चात सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी बन गया है परंतु उसे परिक्षेत्र का प्रभार देने के लिये उच्चाधिकारी नियमों को ताक पर रखकर उसे उपकृत करने में लगे हुये है । जानकारी के अनुसार वर्तमान में हरवेंद्र बघेल सहायक वनपरिक्षेत्र अधिकारी के रूप में गोपालगंज में पदस्थ है परंतु इन्हें उडऩ दस्ता का अतिििरक्त प्रभार के साथ ही कुरई वन परिक्षेत्र अधिकारी का भी प्रभार है । सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कुरई वन परिक्षेत्र में लखनादौन से स्थानांतरित श्री धारू के आदेश जारी हो चुके है और हरवेंद्र बघेल को भी एक वन परिक्षेत्र में वन परिक्षेत्र अधिकारी रहना है इसके लिये विभागीय अधिकारी उसे सिवनी वन परिक्षेत्र का वन परिक्षेत्र अधिकारी बनाने के लिये प्रयासरत है । जबकि सिवनी इसी विभाग के अनेक कर्मचारी और अधिकारी हरवेंद्र बघेल को जरूरत से ज्यादा उपकृत करने की अधिकारियों की मंशा से असंतुष्ट है । जानकारी तो यहाँ तक है कि हरवेंद्र बघेल को सिवनी वन परिक्षेत्र अधिकारी का प्रभार देने के लिये आदेश भी बनकर तैयार है परंतु विभागीय असंतोष सार्वजनिक होने की अधिक संभावनाओं को देखते हुये आदेश को सुरक्षित रख लिया गया है और असंतुष्टों को समझाने और उन पर दबाव बनाने की कोशिशे जारी है ।
यहाँ बतादें कि हरवेंद्र बघेल को अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त हुई थी और यह नियुक्ति उन्हें सामान्य वर्ग से प्राप्त हुई थी । हरवेंद्र बघेल को नियम विरूद्ध तरीके से मिली पदोन्नति पर आपत्ति जताते हुये शिकायते हुई और उन शिकायतो की जाँच भी जिन में हरवेंद्र बघेल को मिली पदोन्नति को नियमों के विरूद्ध बताया गया है और इसी प्रकार की शिकायतो की जाँच अभी दोबारा चल भी रही है । जानकारी के अनुसार हरवेंद्र बघेल ने सेवा के कुछ वर्षो ेके पश्चात अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र लगाया गया है और वह प्रमाण पत्र भी उन्हें शासकीय सेवा के लिये प्राप्त नहीं हुआ है प्रमाण शिक्षा के लिये प्राप्त हुआ था शासन द्वारा इस प्रकार के प्रमाण जारी करते समय प्रमाण पत्र देेते हुये उद्दंश्य का उल्लेख किया जाता है और शासकीय सेवा के लिये जारी होने वाला जाति प्रमाण स्थाई होता है ।
इसी प्रकार हरवेंद्र बघेल की नियुक्ति वन रक्षक के रूप में छिंदवाड़ा में हुई थी इनके द्वारा कुछ समय परासिया में सेवाएँ दी गयी इसके पश्चात इनहोंने अपना स्थानांतरण स्वयं के व्यय पर सिवनी कराया बताते है कि स्वयं के व्यय पर स्थानांतरण कराने पर नियमानुसार सीनियारटी का लाभ नहीं मिलता परंतु हरवेंद्र बघेल ने सी सी एफ आफिस में पदस्थ पदस्थापना लिपिक के माध्यम से अपनी सेवा पुस्तिका में बदलाव कराते हुये तथा पदोन्नति समिति को गुमराह करते हुये पदोन्नति का लाभ लिया और इसी प्रकार उन्हे दूसरी पदोन्नति भी प्राप्त हुई ।
हरवेंद्र बघेल को मिली पदोन्नति के पश्चात उसके समकक्ष तथा सीनियर कर्मचारियों में असंतोष उत्पन्न स्वाभाविक था । अलप सिंह सनोडिया ने हुई अंधेरगर्दी की अनेक बिंदुओं पर शिकायत की जिसकी जाँच तत्त्कालीन विभागीय एस डी ओ द्वारा की गयी । जिसमें बताया जाता है कि अलप सिंह सनोडिया की शिकायत सही पायी गयी परंतु उस जाँच पर कोई कार्यवाही नहीं हुई और इसी प्रकार की पुन: शिकायत पर अब फिर एस डी ओ पटेल जाँच कर रहे है उन्होंने इस बात की पुष्टि भी की है कि उनके द्वारा जाँच की जा रही है ।
जिस कर्मचारी की जाँच चल रही है उस कर्मचारी पर विभागीय उच्चाधिकारी की मेहरबानियाँ समझ से परे है । बताते है कि हरवेंद्र बघेल सहायक बन परिक्षेत्र अधिकारी है और करोडों रूपये के काम करा रहा है और वरिष्ठ अधिकारी वन परिक्षेत्र अधिकारी को कामो अलग रखा गया है । इतना ही नहीं हरवेंद्र बधेल को परिक्षेत्र अधिकारी का प्रभार देने के लिये पदस्थ परिक्षेत्र अधिकारी को हटाने की भूमिका भी तैयार कर ली गयी है । यह बात समझ से परे है कि आखिर हरवेंद्र बघेल को उपकृत करने के लिये वरिष्ठ अधिकारी इस प्रकार से मजबूर क्यों है ।



