CMO दिशा डहेरिया समेत पांच को नोटिस, Status-Quo आदेश की कथित अवहेलना पर हाईकोर्ट सख्त
निर्माण से लेकर भूमि उपयोग परिवर्तन तक के आरोप; एसडीएम और तहसीलदार भी उत्तरवादी, सात दिन में Process Fee जमा करने के निर्देश
सिवनी में Status-Quo आदेश की कथित अवहेलना: CMO दिशा डहेरिया, SDM और तहसीलदार समेत पांच को हाईकोर्ट का नोटिस
Seoni, 08 September 2026
जबलपुर/सिवनी यशो:- मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में हाईकोर्ट के पूर्व अंतरिम आदेश की कथित अवहेलना को लेकर दायर कंटेम्प्ट याचिका पर मंगलवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। CONC No. 6121/2026, Abdul Muktadir Vs. Disha Dehariya, Chief Executive Officer & Others मामले में न्यायमूर्ति विवेक जैन ने उत्तरवादियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।

इस मामले में मुख्य नगरपालिका अधिकारी दिशा डहेरिया, एसडीएम सिवनी, तहसीलदार सिवनी सहित मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड की CEO और वक्फ अंजुमन इस्लामिया जामा मस्जिद की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष को उत्तरवादी बनाया गया है।
न्यायालय के आदेश के अनुसार सात दिवस के भीतर Process Fee जमा किए जाने के बाद नोटिस जारी किया जाएगा। साथ ही मामले को मूल प्रकरण W.P. No. 9775/2026 के साथ सेवा उपरांत सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए गए हैं।
31 मार्च के Status-Quo आदेश को लेकर विवाद
कंटेम्प्ट याचिका के अनुसार W.P. No. 9775/2026 में हाईकोर्ट ने 31 मार्च 2026 को संबंधित भूमि की तत्कालीन स्थिति बनाए रखने यानी Status-Quo का अंतरिम आदेश पारित किया था।
याचिका के अनुसार विवादित भूमि नया खसरा नंबर 61(S), रकबा 2.6300 हेक्टेयर, हल्का सीरदिवान, तहसील एवं जिला सिवनी में स्थित है। याचिकाकर्ता का दावा है कि आदेश पारित होने के समय भूमि कृषि भूमि के रूप में दर्ज थी और निर्माण कार्य प्रारंभिक अवस्था में था।
कंटेम्पेम्प्ट याचिका में आरोप लगाया गया है कि आदेश के बावजूद बाद में भूमि पर निर्माण कार्य जारी रहा तथा भूमि के उपयोग एवं राजस्व रिकॉर्ड में परिवर्तन की कार्रवाई की गई।
निर्माण और भूमि उपयोग परिवर्तन के आरोप
याचिका के अनुसार, हाईकोर्ट के Status-Quo आदेश की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दिए जाने के बावजूद खसरा नंबर 61 के पिछले हिस्से में नया निर्माण शुरू किया गया। इसके अलावा कृषि भूमि के स्वरूप को बदलने, e-KYC की प्रक्रिया आगे बढ़ाने तथा कृषि भूमि को Commercial उपयोग में परिवर्तित करने की कार्रवाई किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि मूल 2.63 हेक्टेयर भूमि का खसरा विभाजन कर 61/1 और 61/2 बनाए गए। इनमें 61/1 को 2.51 हेक्टेयर कृषि भूमि और 61/2 को 0.12 हेक्टेयर Commercial भूमि के रूप में दर्ज किए जाने का उल्लेख है।
19 मई के Diversion Order पर भी सवाल
कंटेम्प्ट याचिका के अनुसार राजस्व रिकॉर्ड में 19 मई 2026 के Diversion Order के आधार पर 0.12 हेक्टेयर भूमि के कृषि से Commercial उपयोग में परिवर्तन का उल्लेख किया गया है।
याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया है कि यह कार्रवाई 31 मार्च 2026 को पारित Status-Quo आदेश के बाद हुई। याचिका में इसी आधार पर न्यायालय के अंतरिम आदेश की कथित अवहेलना का मुद्दा उठाया गया है।
आदेश की जानकारी देने के बाद भी कार्रवाई का आरोप
याचिका के अनुसार हाईकोर्ट के 31 मार्च के आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों को 2 अप्रैल 2026 को लिखित अभ्यावेदन के साथ उपलब्ध कराई गई थी।
इसके बावजूद, याचिकाकर्ता का आरोप है कि निर्माण और भूमि उपयोग परिवर्तन से संबंधित गतिविधियां आगे बढ़ती रहीं। याचिका में तहसीलदार के 15 मई 2026 के आदेश को लेकर भी आपत्ति जताई गई है।
याचिकाकर्ता के अनुसार 13 अप्रैल को e-KYC एवं भूमि उपयोग परिवर्तन को लेकर तहसीलदार और एसडीओ के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की गई थी। इसके बाद राजस्व अधिकारियों एवं वक्फ बोर्ड के बीच पत्राचार भी हुआ।
तस्वीरों को भी बनाया आधार
कंटेम्प्ट याचिका में निर्माण कार्य की Status-Quo आदेश से पहले और बाद की तस्वीरें भी प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख है। याचिका के अनुसार इन तस्वीरों के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया है कि आदेश पारित होने के समय निर्माण प्रारंभिक अवस्था में था, जबकि बाद में निर्माण कार्य आगे बढ़ा।
खसरा नंबर 61 के पीछे शुरू किए गए कथित नए निर्माण की तस्वीर भी याचिका में दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख है।
पांच उत्तरवादियों को नोटिस
कंटेम्प्ट याचिका में निम्न पांच उत्तरवादियों को पक्षकार बनाया गया है—
1. दिशा डहेरिया — मुख्य कार्यपालन अधिकारी, नगर पालिका परिषद सिवनी।
2. डॉ. फरज़ाना ग़ज़ाल — CEO, मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड, भोपाल।
3. पूर्वी तिवारी — अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), सिवनी।
4. नितिन चौधरी — तहसीलदार, सिवनी।
5. मंजूर अहमद खान — अध्यक्ष, प्रबंधन समिति, वक्फ अंजुमन इस्लामिया जामा मस्जिद, सिवनी।
याचिकाकर्ता ने की कार्रवाई की मांग
याचिका के अनुसार Status-Quo आदेश के बावजूद कथित रूप से निर्माण जारी रखने, भूमि उपयोग बदलने, e-KYC की प्रक्रिया आगे बढ़ाने और खसरा विभाजन जैसी कार्रवाइयों से न्यायालय के आदेश का प्रभाव प्रभावित हुआ है।
याचिकाकर्ता ने इन कार्रवाइयों को जानबूझकर एवं आदेश की अवहेलना बताते हुए Contempt of Courts Act, 1971 तथा संविधान के अनुच्छेद 215 के तहत कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि, ये सभी आरोप याचिका में लगाए गए हैं और अभी न्यायालय द्वारा अंतिम रूप से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं हैं। हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब संबंधित उत्तरवादियों का पक्ष सामने आएगा। मामले की आगामी सुनवाई में उनके जवाब और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।
याचिकाकर्ता अब्दुल मुक्तदिर, निवासी कन्हीवाड़ा, जिला सिवनी की ओर से अधिवक्ता हिमांशु मिश्रा एवं भानु प्रताप सिंह ने पैरवी की।
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