नाम पूछते ही होती है शर्मिंदगी, अब गांव की पहचान बदलने कलेक्टर से गुहार
केवलारी के लोलीपार गांव के ग्रामीण बोले- महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को होती है असहजता; गंगापुर, भवानीपुर, रामपुर और ललितपुर नाम सुझाए
सिवनी के लोलीपार गांव का नाम बदलने की मांग, ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई गुहार
Seoni, 03 September 2026
सिवनी/केवलारी यशो:- केवलारी विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम लोलीपार के ग्रामीण अब अपने गांव का नाम बदलने की मांग को लेकर प्रशासन के दरवाजे पर पहुंचे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के वर्तमान नाम को लेकर उन्हें लंबे समय से सामाजिक असहजता और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने जिला प्रशासन से गांव का नाम बदलकर नया नाम रखने की मांग की है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव का वर्तमान नाम शासकीय दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। उनका कहना है कि गांव का नाम पूछे जाने पर विशेषकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को कई बार असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। सार्वजनिक स्थानों, स्कूल, बैंक अथवा सरकारी कार्यालयों में गांव का नाम बताने में उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है।
बार-बार नाम पूछे जाने से मानसिक परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि कई लोग जानबूझकर गांव का नाम बार-बार पूछकर उन्हें असहज करते हैं। इससे ग्रामीणों को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि गांव के नाम के कारण उनकी सामाजिक पहचान को लेकर भी असहज परिस्थितियां निर्मित होती हैं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए गांव का नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
नए नाम भी सुझाए
ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष गांव के लिए कुछ नए नामों के विकल्प भी सुझाए हैं। इनमें गंगापुर, भवानीपुर, रामपुर और ललितपुर शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इनमें से उपयुक्त नाम का चयन कर गांव को नई पहचान दी जाए।
ग्रामीणों में शामिल मोहनिया, जग बंधन, आशीष, रश्मि, केतकीबाई, यमुनाबाई, फागुलाल और रामदास सहित अन्य लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि उनकी समस्या का निराकरण करते हुए गांव का नाम बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
अब प्रशासन के निर्णय पर टिकी नजर
ग्रामीणों की मांग के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस प्रस्ताव पर क्या निर्णय लेता है और गांव का नाम बदलने की प्रक्रिया के संबंध में क्या कार्रवाई की जाती है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी मांग पर प्रशासन संवेदनशीलता से विचार करेगा और गांव को ऐसी नई पहचान मिलेगी, जिसे लेकर उन्हें भविष्य में किसी तरह की असहजता का सामना न करना पड़े।
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