डेयरियों पर जांच की कार्रवाई, लेकिन घर-घर दूध पहुंचाने वालों की जांच कब?
दूध में मिलावट को लेकर उठे सवाल, उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए नियमित जांच की मांग
सिवनी में दूध की गुणवत्ता पर सवाल, घर-घर दूध पहुंचाने वालों की जांच की मांग; डेयरियों से लिए नमूने
Seoni 02 September 2026
सिवनी यशो:- शहर में घर-घर दूध की सप्लाई करने वाले दूध विक्रेताओं के दूध की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा दूध डेयरियों और बड़े दुग्ध विक्रेताओं के यहां जांच एवं नमूना लेने की कार्रवाई की जा रही है, लेकिन घर-घर दूध पहुंचाने वाले छोटे विक्रेताओं की भी नियमित जांच की जानी चाहिए।
शहर में बड़ी संख्या में दूध विक्रेता सीधे उपभोक्ताओं के घरों तक दूध पहुंचाते हैं। ऐसे में दूध की गुणवत्ता और उसमें किसी प्रकार की मिलावट है या नहीं, इसकी जांच उपभोक्ता स्तर पर संभव नहीं हो पाती। आरोप है कि कुछ दूध विक्रेताओं द्वारा बाजार से पैकेट वाला दूध खरीदकर उसमें विभिन्न पदार्थ मिलाकर उसकी मात्रा बढ़ाई जाती है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
सिर्फ पानी नहीं, अन्य पदार्थों की मिलावट चिंता का विषय
दूध में पानी मिलाना आम तौर पर मात्रा और पोषण संबंधी गुणवत्ता को प्रभावित करता है, लेकिन यदि किसी खाद्य पदार्थ में प्रतिबंधित या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रसायनों की मिलावट की जाती है तो यह गंभीर खाद्य सुरक्षा का विषय बन जाता है।
इसी वजह से उपभोक्ताओं की मांग है कि खाद्य सुरक्षा विभाग डेयरियों के साथ-साथ घर-घर दूध सप्लाई करने वाले विक्रेताओं के दूध के भी नियमित नमूने लेकर जांच करे। इससे मिलावट की वास्तविक स्थिति सामने आने के साथ उपभोक्ताओं को सुरक्षित दूध उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
कृत्रिम या सिंथेटिक दूध की खपत पर भी निगरानी जरूरी
शहर में सिंथेटिक अथवा नकली दूध की उपलब्धता और खपत को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार दूध की गुणवत्ता का निर्धारण केवल उसके रंग और दिखावट से नहीं किया जा सकता। दूध में वसा, एसएनएफ सहित अन्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों की जांच आवश्यक है।
ऐसे में उपभोक्ताओं की मांग है कि खाद्य सुरक्षा विभाग दूध के स्रोत से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने वाली पूरी सप्लाई चेन पर निगरानी बढ़ाए और संदिग्ध नमूने मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करे।
मिल्क रैपिड टेस्टिंग किट से दूध के नमूनों की जांच
इधर खाद्य सुरक्षा प्रशासन सिवनी द्वारा दूध एवं दुग्ध उत्पादों की त्वरित जांच के लिए मिल्क रैपिड टेस्टिंग किट के माध्यम से जांच की जा रही है। विभाग के अनुसार दूध विक्रेताओं एवं डेयरी इकाइयों की जांच के साथ खाद्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
2 सितंबर को सिवनी शहर की दर्शन दूध डेयरी, बारापत्थर, दिनशाज दूध डेयरी तथा क्वालिटी दूध डेयरी, गोपालगंज से दूध के नमूने लेकर रैपिड किट से जांच की गई। नमूना फेल पाए जाने पर दिनशाज दूध डेयरी से गाय के दूध का लीगल नमूना जांच के लिए लिया गया।
इससे एक दिन पूर्व 1 सितंबर को की-पावर दूध डेयरी से गाय का दूध, गाय-भैंस का दूध एवं मिश्रित दूध तथा अभय दूध डेयरी से गाय एवं मिश्रित दूध के नमूने लिए गए। आस्था रोड स्थित नंदी दूध संकलन केंद्र से भी दूध एवं मिश्रित दूध के नमूनों की रैपिड जांच की गई। नमूना फेल पाए जाने पर संबंधित लीगल नमूने लिए गए।
किराना दुकानों से भी खाद्य पदार्थों के नमूने
खाद्य सुरक्षा टीम ने बरघाट के गजेंद्र किराना स्टोर से मूंगफली, तुअर दाल, सोया बड़ी एवं साबूदाना के नमूने लिए। गोरेगांव के मां विंध्यवासिनी किराना स्टोर से सूजी, गोपालगंज के अजय किराना स्टोर से लाल मिर्च पाउडर, गुप्ता किराना स्टोर से किशमिश एवं खारक तथा कैलाश साहू किराना स्टोर से सौंफ एवं सोया बड़ी के नमूने जांच के लिए लिए गए।
खेरी टेक स्थित रूपक ट्रेडर्स में सही खाद्य पंजीयन नहीं पाए जाने पर नियमानुसार प्रकरण दर्ज किया गया।
उपभोक्ताओं की मांग—घर-घर दूध विक्रेताओं के भी लिए जाएं नमूने
डेयरी और बड़े दूध विक्रेताओं के यहां हो रही जांच के साथ उपभोक्ताओं का कहना है कि घर-घर दूध पहुंचाने वाले विक्रेताओं को भी जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए। विशेषकर ऐसे विक्रेताओं के दूध के नमूने लिए जाएं, जिनकी सप्लाई बड़ी संख्या में घरों तक होती है। इससे दूध की गुणवत्ता को लेकर बनी आशंकाओं की वास्तविकता सामने आ सकेगी और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की जा सकेगी।
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