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सिवनी में शिक्षा क्रांति: सरस्वती शिशु विद्यालय भैरोगंज की आधुनिक लैब्स बनीं प्रदेश स्तरीय आकर्षण

एस्ट्रोनॉट, टिंकर और STEM लैब्स देखने उमड़ रहे छात्र, शिक्षाविद और जिज्ञासु नागरिक

मनोज मर्दन त्रिवेदी

जहां एक ओर देश के अधिकांश विद्यालय आज भी पारंपरिक शिक्षा पद्धति के दायरे में सीमित नजर आते हैं, वहीं सिवनी जिले के भैरोगंज स्थित विद्या भारती सरस्वती शिशु उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ने शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐसा अभिनव और दूरदर्शी प्रयोग प्रस्तुत किया है, जिसने पूरे क्षेत्र को नई दिशा देने का कार्य किया है।

यह विद्यालय आज केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान, तकनीक, संस्कार और नवाचार का संगम बनकर उभरा है। यहाँ स्थापित अत्याधुनिक एस्ट्रोनॉट लैब, टिंकर लैब, STEM लैब और सुव्यवस्थित शिशु वाटिका ने शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हुए इसे अनुभव, प्रयोग और सृजन की प्रक्रिया में परिवर्तित कर दिया है।

 एस्ट्रोनॉट लैब: अंतरिक्ष को महसूस करने का अनुभव

विद्यालय की एस्ट्रोनॉट लैब विद्यार्थियों के लिए किसी सपने से कम नहीं है।
यहाँ बच्चे केवल किताबों में अंतरिक्ष नहीं पढ़ते, बल्कि उसे महसूस करते हैं, समझते हैं और अनुभव करते हैं।

स्पेस मिशन सिमुलेशन, जीरो ग्रैविटी अनुभव, स्पेस सूट की कार्यप्रणाली, रॉकेट निर्माण और टेलीस्कोप के माध्यम से आकाश दर्शन जैसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों के भीतर छिपी वैज्ञानिक जिज्ञासा को जागृत कर रही हैं।

यह प्रयोगशाला विद्यार्थियों को न केवल ज्ञान देती है, बल्कि उन्हें भविष्य के अंतरिक्ष वैज्ञानिक और शोधकर्ता बनने के लिए प्रेरित भी करती है।

सिवनी सरस्वती शिशु विद्यालय एस्ट्रोनॉट लैब
भैरोगंज विद्यालय में एस्ट्रोनॉट लैब

टिंकर लैब: नवाचार की प्रयोगशाला

टिंकर लैब में “करके सीखना” केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि एक जीवंत प्रक्रिया है।

सिवनी सरस्वती शिशु विद्यालय शिशु वाटिका
सुंदर शिशु वाटिका में खेल खेल में शिक्षा हैं

यहाँ विद्यार्थी Arduino, रोबोटिक्स किट, सेंसर, 3D प्रिंटर और प्रोग्रामिंग टूल्स की मदद से अपनी कल्पनाओं को वास्तविक मॉडल में बदलते हैं।

यह लैब बच्चों में समस्या समाधान, तार्किक सोच, नवाचार और टीमवर्क जैसे कौशल विकसित कर रही है, जो 21वीं सदी की सबसे बड़ी आवश्यकता हैं।

STEM लैब: भविष्य की शिक्षा

STEM लैब के माध्यम से विद्यालय ने विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित को एकीकृत कर शिक्षा को पूरी तरह व्यवहारिक बना दिया है।

प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा, डिजिटल उपकरणों का उपयोग और आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण विद्यार्थियों को केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन और करियर के लिए तैयार कर रहा है।

 शिशु वाटिका

विद्यालय की शिशु वाटिका नन्हे बच्चों के लिए एक ऐसा वातावरण प्रदान करती है, जहां खेल-खेल में शिक्षा और संस्कार का समावेश होता है।

यहाँ बच्चों का सर्वांगीण विकास अत्यंत सुनियोजित और आकर्षक ढंग से किया जा रहा है।

आकर्षण का केंद्र

इन सभी आधुनिक प्रयोगशालाओं की ख्याति अब पूरे जिले और आसपास के क्षेत्रों में फैल चुकी है।

अनेक विद्यालयों के छात्र, शिक्षक, शिक्षाविद, शोधकर्ता और जिज्ञासु नागरिक निरंतर इस विद्यालय का अवलोकन करने पहुंच रहे हैं।

लैब्स को देखकर आगंतुकों की प्रतिक्रिया अत्यंत उत्साहजनक है—

वे विद्यालय की शिक्षण व्यवस्था को अद्वितीय, आधुनिक और प्रेरणादायक बताते हुए मुक्तकंठ से प्रशंसा कर रहे हैं।

प्रशिक्षित आचार्य: सफलता के वास्तविक शिल्पकार

इन प्रयोगशालाओं की सफलता के पीछे विद्यालय के प्रशिक्षित और समर्पित आचार्य सबसे बड़ी शक्ति हैं।

आचार्यों का ज्ञान, उनकी तकनीकी दक्षता और नवाचारी शिक्षण शैली को आगंतुक शिक्षाविद

 “शिक्षा जगत की विलक्षण प्रतिभा”

के रूप में देख रहे हैं।

उनका मार्गदर्शन विद्यार्थियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

राष्ट्रीय स्तर की उत्कृष्टता की ओर बढ़ता सिवनी का यह विद्यालय

विद्यालय की समग्र शिक्षण व्यवस्था—जिसमें आधुनिक तकनीक, संस्कार आधारित शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण का अद्भुत संतुलन है—अब इसे राष्ट्रीय स्तर की उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्था के रूप में स्थापित कर रही है।

यह मॉडल यह साबित कर रहा है कि

 यदि सोच दूरदर्शी हो और प्रयास समर्पित हों, तो छोटे शहरों में भी विश्वस्तरीय शिक्षा संभव है।

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