नसबंदी के नाम पर क्रूरता का काला खेल! मंडला में 700 कुत्तों के अंग बरामद
क्या ‘अंग दिखाकर’ हड़पे जाने थे लाखों रुपये? सिस्टम पर गंभीर सवाल
मंडला नसबंदी घोटाला : 700 कुत्तों के अंग बरामद, लाखों के फर्जीवाड़े की आशंका
मंडला | आयुष चौरसिया की विशेष रिपोर्ट
मंडला यशो:-मध्य प्रदेश के मंडला जिले से सामने आई एक भयावह घटना ने न केवल इंसानियत को झकझोर दिया है, बल्कि सरकारी सिस्टम में गहराई तक जड़ें जमा चुके भ्रष्टाचार की परतें भी उधेड़ दी हैं।

बिंझिया क्षेत्र की शारदा कॉलोनी में एक बंद कमरे से करीब 700 कुत्तों के अंग बरामद हुए हैं, जो कथित तौर पर नसबंदी योजना के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े की ओर इशारा करते हैं।
कमरे में कैद ‘क्रूरता’: केमिकल में डूबा सच
पुलिस टीम जब मौके पर पहुंची, तो जो दृश्य सामने आया वह किसी भयावह फिल्म जैसा था।
प्लास्टिक कंटेनरों में भरे हुए कुत्तों के अंगों को सड़ने से बचाने के लिए उन पर फॉर्मलीन केमिकल डाला गया था।
यह दृश्य किसी वैध मेडिकल प्रक्रिया का नहीं, बल्कि एक संदिग्ध और अमानवीय व्यवस्था का प्रतीत हो रहा था।
नसबंदी या ‘नकली सबूत’ का खेल?
- कागजों में ऑपरेशन, जमीन पर कोई प्रमाण नहीं
- बाहर से अंग मंगाकर ‘सबूत’ तैयार करने की आशंका
- सरकारी भुगतान के लिए फर्जी बिल की तैयारी
स्थानीय लोगों और पशु प्रेमियों का आरोप है कि यह पूरा खेल सरकारी फंड निकालने की सुनियोजित साजिश हो सकता है।
ब्लैकलिस्ट एजेंसी का संदिग्ध रोल
इस पूरे मामले में जबलपुर की “मां नर्मदा इंटरप्राइजेज” एजेंसी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- 2 अप्रैल को ही अनुबंध समाप्त
- पहले से लापरवाही के आरोप
- ठेका खत्म होने के बाद भी ‘अंगों का स्टॉक’ क्यों?
नियमों की धज्जियां: Bio-medical Waste बना सबूत
पशुपालन विभाग के नियमों के अनुसार, ऑपरेशन के बाद जैविक कचरे का सुरक्षित निस्तारण अनिवार्य है।
लेकिन यहां अंगों को छुपाकर रखा गया, जो सीधे-सीधे नियमों के उल्लंघन और अपराध की ओर संकेत करता है।
700 अंग आखिर आए कहां से?
क्या यह सिर्फ मंडला तक सीमित है या अन्य जिलों से भी जुड़ा नेटवर्क?
जांच तेज, कई नाम रडार पर
पुलिस ने मंडला नसबंदी घोटाला मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रशासन एजेंसी की EMD जब्त करने और सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है।
जांच अब उन कड़ियों तक पहुंच रही है, जो इस पूरे फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड तक ले जा सकती हैं।
अगर मंडला नसबंदी घोटाला केवल एक एजेंसी का खेल नहीं, बल्कि सिस्टम की मिलीभगत है, तो यह मामला सिर्फ घोटाला नहीं —
बल्कि सरकारी निगरानी तंत्र की बड़ी विफलता का संकेत है।


