सिवनी तहसील भाग-2 : प्रणालीगत लापरवाही और अनियमितताओं की चिंताजनक स्थिति
Seoni 11 June 2025
सिवनी यशो :-सिवनी तहसील (भाग-2) में कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आम नागरिकों को न्याय मिलने में देरी, प्रक्रियात्मक जटिलताओं के बीच फाइलों का लंबित रहना और अधिकारियों की निगरानी के अभाव में कार्य संस्कृति पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, तहसील कार्यालय में जनहित के प्रकरणों में भी प्राथमिकता का आधार आर्थिक लेनदेन या अनुशंसा बन गया है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही को आघात पहुंच रहा है।
प्रशासनिक सहयोगी या निर्णय निर्माता – बाबुओं की बढ़ती भूमिका पर सवाल
कार्यालयीन कार्यों में बाबुओं की भूमिका केवल सहायक की होनी चाहिए, परंतु अनेक प्रकरणों में यह देखा गया है कि बाबुओं का व्यवहार स्वयं निर्णयकर्ता की भांति हो चला है। इस संदर्भ में रीडर निलेश चोखे का नाम कुछ विवादास्पद मामलों में सामने आया है, जिनमें फाइलों का शीघ्र निस्तारण कुछ शर्तों पर ही होता प्रतीत होता है। पटवारियों पर तहसीलदार का नाम लेकर उन्हें फर्जी रिपोर्ट के लिये बाध्य किया जा रहा है । पटवारियों को निष्पक्ष रूप से काम करना मुश्किल हो रहा है ।
फर्जी फौती और वसीयत के आधार पर भूमि विक्रय – गंभीर मामला प्रकाश में
डूंडा-सिवनी थाना अंतर्गत एक प्रकरण में पंकज राय पिता किशोर राय, निवासी गोकुल विहार, सिवनी द्वारा एक विवादित भूमि का विक्रय किया गया। मेहेरून्निशा अंसारी को 1500 वर्गफुट की भूमि रजिस्टर्ड दस्तावेजों के आधार पर बेची गई, परंतु कब्जा अब तक नहीं मिला।
प्राथमिक जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि मूल भूमि स्वामी चेतराम राय अभी जीवित हैं, किंतु उनके नाम पर फर्जी फौती और वसीयत बनवाकर नामांतरण किया गया। यह गंभीर स्थिति प्रशासनिक स्तर पर सतर्कता की आवश्यकता को दर्शाती है।
प्रशासनिक निष्क्रियता और पुलिस की उदासीनता
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए 5 फरवरी 2025 को एफआईआर क्रमांक 0059/2025 दर्ज की गई, किंतु अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इससे यह शंका उत्पन्न हो रही है कि कहीं उच्चस्तरीय संरक्षण तो नहीं प्राप्त है?
यह स्थिति कानून व्यवस्था की साख पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो ऐसी प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिलेगा।
आवश्यकता है प्रशासनिक निरीक्षण और संवेदनशीलता की
दैनिक यशोन्नति प्रशासन से अपेक्षा करता है कि तहसील कार्यालय में औचक निरीक्षण कर 50 से अधिक लंबित प्रकरणों का परीक्षण किया जाए, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और जो भी कार्मिक नियमन के विरुद्ध कार्यरत हैं, उन पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
जनता का विश्वास प्रशासन पर बना रहे, इसके लिए आवश्यक है कि राजस्व कार्यालयों में प्रबंधन पारदर्शी और उत्तरदायी हो। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी परिस्थितियाँ प्रशासनिक विश्वास को कमजोर कर सकती हैं।



