Seoni 25 February 2025
सिवनी यशो:- शिव आदि अनादि देवता माने जाते हैं इसलिये उन्हें देवों के देव महादेव भी कहा जाता है। वे अजन्मा हैं,न उनका जन्म होता है न ही उनकी मृत्यु होती है। सनातनी परंपरा में 33 कोटि देव माने गये हैं उनमें तीन प्रमुख देव हैं,सृष्टि की संरचना कर्ता ब्रम्हा,पालनकर्ता विष्णु और संहारकर्ता शिव अर्थात शंकर। ब्रम्हा श्रीहरि विष्णु के नाभि कमल से उत्पन्न हुये हैं,पुराण कहते हैं कि ”शिवस्यह्दयं विष्णु,विष्णु ह्दस्य शिवम”अर्थात शिव के ह्दय में विष्णु और विष्णु के ह्दय में शिव का वास रहता है। दोनों में कोई भेद नहीं है दोनों एक दूसरे का ध्यान करते नाम जाप करते हैं चिंतन करते हैं दोनों एक ही हैं। इस चारचर जगत में शिव से सरल भोला भाला सहज कोई ईश्वर नहीं है,जो एक लोटा जल शिवलिंग पर चढाने से प्रसन्न हो जाये एक बेलपत्र चढ़ाने से त्रैलोक्य का साम्राज्य प्रदान कर दें। मानसिक पूजा करने से प्रसन्न होकर अभिष्ट वस्तु प्रदान कर दें,ऐसे हैं देवों के देव शिव वे औघड़दानी है इस कलिकाल में सबसे जल्दी प्रसन्न होकर वर देने वाले वे ही हैं।
शिव की नगरी सिवनी
सिवनी शिव की नगरी कहलाती है,लोक कथा है कि भगवान श्रीराम सिवनी से ही होकर रामटेक गये थे,वहीं पर उन्होंने ऋषि मुनियों के हड्डियों का पहाड़ देखकर यह प्रतिज्ञा की थी। निसचर हीन करहुं माही,भुज उठाई पन कीन्ह,सिवनी में पार्थिव शिवलिंग की पूजा कर रामटेक गये थे। आद्य शंकराचार्य जब दक्षिण से उत्तर भारत की ओर जा रहे थे तब उन्होंने एक रात विश्राम कर प्रात: काल शिव की प्रतिष्ठा पूजन कर आगे की ओर प्रस्थान किया था,आज वह मठ मंदिर के रूप में विख्यात है। उस समय यहाँ के निवासियों की सेवा पूजा से प्रसन्न होकर उन्होंने यह वरदान दिया कि मैं उन्नीसवीं सदी में अवतार लेकर सनातनधर्म की ध्वजा लहराऊंगा।
काशी का शिवभक्त
यह सिवनी बहुत ही पवित्र नगरी है,पुण्य भूमि है,यहाँ बडे से बडा महात्मा संत तपस्वी आते रहे हैं,और धर्मोपदेश देते रहे हैं। यह नगर देश प्रदेश में धार्मिक नगरी के रूप में विख्यात है। सत्तर के दशक में एक शिवभक्त काशी से अपने परिवार के साथ यहाँ आया और भगवान शिव का गुणगान कर भजन कर पूजन कर उनका मंदिर-मंदिर घर-घर जाकर सुबह से लेकर शाम तक रात्रि तक प्रचार प्रसार करने लगा,ज्योतिषमद के अनुसार वर्ष में 12 शिवरात्रि होती है,जिसमें फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दर्शी को महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता रहा है,उस समय जिले के कुछ ही मंदिरों में शिवरात्रि पर्व पर हवन पूजन अभिषेक रात्रि जागरण रात्रि के चारों प्रहर में होता था,क ाशी के उस शिवभक्त पंडित दया शंकर मिश्र ने महाशिवरात्रि महोत्सव का आयोजन अपने निज निवास काली चौक में करना प्रारंभ किया। धीरे-धीरे उसका स्वरूप बढने लगा भक्तगण उस यज्ञ को देखकर अपने-अपने घरों में मंदिरों में हवन पूजन अभिषेक करने लगे,कुछ ही वर्षों में संपूर्ण जिले में यह आयोजन वृहद स्तर पर होने लगा। अब सिवनी का भक्तगण छोटी काशी कहने लगे,शिव भक्त पंडित दयाशंकर मिश्र ने प्रारंभिक दिनों में यह आयोजन तीन दिवसीय करते थे। उनके शिवलोक गमन के पश्चात उनके शिष्यों ने एक दिवसीय कर दिया।
श्रीशिव व शक्ति पारदेश्वर महायज्ञ
महाशिवरात्रि के पावन पर्व त्र्यम्बक शक्ति पीठ द्वारा काली चौक से मिलन चौक के मध्य में निर्धारित स्थान पर शिव शक्ति पारदेश्वर महायज्ञ का आयोजन परम पूज्य गुरूदेव शिवलोक वासी पंडित दयाशंकर मिश्र के सूक्ष्म उपस्थिति में आयोजित किया गया है। यह पर्व भगवान शिव के लिंग स्वरूप में प्राकट्योत्सव एवं शिवपार्वती के विवाहोत्सव पर्व पर हवन पूजन अभिषेक व रात्रि जागरण कर मनाया जायेगा आज के दिन जो भक्त भगवान शिव के 36 प्रकार के लिंगों में सर्वश्रेष्ठ पारदेश्वर लिंग का अभिषेक पूजन हवन दर्शन करता हे वह अर्थ धर्म काम और मोक्ष को प्राप्त होता है। आध्यात्मिक और भौतिक गुणों को प्राप्त कर शिवलोकवासी होता है।
श्री शिव शक्ति पारदेश्वर महायज्ञ का आयोजन पंडित राजेन्द्र मिश्र के आचार्यत्व में यह कार्यक्रम इस वर्ष फाल्गुन कृष्ण चतुदर्शी दिन बुधवार 26 फरवरी को मनाया जायेगा,इस दिन त्रयोदशी प्रात: 9.20 तक उपरांत चतुदर्शी तिथि रहेगी। यह पर्व अनेक शुभ संयोगों से युक्त है। आज के दिन चार प्रहरों में पूजन अभिषेक हवन करने से मनुष्य के बाहुत सारे दुरयोग नष्ट हो जाते हैं। भावी भेंट सकै त्रिपुरारी,भाग्य बदलने की क्षमता रखते हैं शिव,शिव रात्रि रंक से राजा बनाने की क्षमता रखती है। आज के दिन पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।
26 फरवरी की प्रात: यज्ञ का शुभारंभ
इस आलौकिक फल प्रदान करने वाले यज्ञ का शुभारंभ 26 फरवरी दिन बुधवार को प्रात: गणेश गौरी सहित मंडल देवताओं के आवाहन पूजन प्रतिष्ठा,अग्नि स्थापना के साथ होगा शाम 4 बजे से पूज्य गुरूदेव पंडित दयाशंकर मिश्र के हस्त कमलों से निर्मित शुध्द पारे (मरकरी) से निर्मित 21 किलो के पारद शिवलिंग का अभिषेक रूद्राष्टाध्यायी के पाठ से तीर्थों के जल से होगा,लक्ष्मी प्रदाता बेलफल से हवन किया जायेगा।
27 फरवरी की प्रात: यज्ञ का समापन
इस दिन रात्रि 8 बजे भांग से बने मिष्ठान का भोग लगाया जायेगा तथा मध्य निशा काल रात्रि 12 बजे शुध्द घी से बनी बूंदी का महाभोग देवादि देव महादेव को पूर्ण श्रध्दा के साथ लगाया जायेगा। ततपश्चात रात्रि भजन कीर्तन करते हुये रात्रि जागरण के साथ 27 फरवरी गुरूवार की प्रात: 5 बजे पूर्णाहूति आरती प्रसाद वितरण के साथ सिध्द रूद्राक्ष का भी वितरण के साथ यज्ञ का समापन किया जायेगा। इस शुभ अवसर पर सभी शिव भक्तों से आग्रह किया जाता है कि पुनीत यज्ञ में भाग लेकर जीवन को कृतार्थ करें।
सिंचाई में बाधा पहुँचाने वालों की तुरंत करें एफआईआर- कलेक्टर


