सफलता की कहानी: “गिफ्ट अ डेस्क” पहल बनी बदलाव की मिसाल
धनौरा के 86 स्कूलों में 1228 बच्चों को मिले डेस्क-बेंच, बच्चों ने कहा – “थैंक यू मैम”
Seoni 05 July 2025
शनिवार का दिन धनौरा विकासखंड के स्कूली बच्चों के जीवन में नई उम्मीद और सुविधा लेकर आया। जिले की “गिफ्ट अ डेस्क” पहल के तहत, धनौरा क्षेत्र के 86 शासकीय प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत 1228 बच्चों को अब ज़मीन पर नहीं बैठना पड़ेगा। दानदाताओं के सहयोग से 614 डेस्क-बेंच स्कूलों में पहुंचाए गए, जिससे बच्चों की पढ़ाई अब अधिक सुविधाजनक और सम्मानजनक हो गई है।
इस पहल का नेतृत्व कर रहीं कलेक्टर सुश्री संस्कृति जैन ने विशेष आयोजन में शिरकत कर सभी दानदाताओं को प्रशस्ति पत्र भेंट किए और उनका आभार जताया। उन्होंने कहा,
“शिक्षा केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि समग्र सामाजिक विकास की नींव है। शिक्षित समाज ही प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।”
समारोह में जनभागीदारी और उत्सव का माहौल
धनौरा में आयोजित इस कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष श्री गुलाब सिंह भलावी, जिला पंचायत सदस्य श्री घूरसिंह सल्लाम, पूर्व जनपद सदस्य नवल किशोर श्रीवास्तव, सरपंच दिनेश कुर्वेती सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक व दानदाता उपस्थित रहे।
कलेक्टर जैन ने अपने उद्बोधन में बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों के लिए अनुकूल एवं प्रेरक शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है, ताकि उनकी स्कूल में उपस्थिति नियमित हो सके और वे पढ़ाई में रुचि लें। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस वर्ष शासकीय विद्यालयों में 153% अधिक नामांकन हुआ है, जो शिक्षकों के अथक प्रयासों का परिणाम है।
ग्राम देवरीटिका मॉडल और जल संरक्षण की प्रेरणा
कार्यक्रम में सुश्री जैन ने ग्राम देवरीटिका में बने डगवेल रिचार्ज मॉडल की प्रशंसा करते हुए जल संरक्षण और भूजल स्तर को सुधारने हेतु उपस्थित लोगों से वर्षा जल संचयन का संकल्प लेने का आग्रह किया।
धरती आबा अभियान की प्रस्तुति बनी आकर्षण का केन्द्र
इस अवसर पर छात्रों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विशेष रूप से “धरती आबा अभियान” पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ने सबका ध्यान खींचा। इस अभियान के तहत जनजातीय समुदायों के लिए चलाए जा रहे शिविरों और योजनाओं की झलक छात्रों ने बेहद प्रभावशाली ढंग से मंच पर पेश की। कलेक्टर जैन ने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे इस योजना से पात्र हितग्राहियों को लाभ दिलाने में सक्रिय सहयोग करें।
निष्कर्ष:
“गिफ्ट अ डेस्क” पहल न सिर्फ स्कूलों में पढ़ाई की सुविधा बढ़ा रही है, बल्कि यह सामाजिक सहभागिता, दान की संस्कृति और प्रशासनिक इच्छाशक्ति का बेहतरीन उदाहरण बन चुकी है। बच्चों की आंखों में चमक और उनका “थैंक यू मैम” कहना, इस मुहिम की सबसे बड़ी सफलता है।






