सफलता की कहानी : दिल्ली विश्वविद्यालय में चयनित रंजीत यादव - प्रेरणादायक कहानी
आदिवासी अंचल से दिल्ली विश्वविद्यालय तक का सफर: हर्रई के रंजीत यादव की मिसाल
छिंदवाड़ा, 26 जुलाई 2025 –
आदिवासी अंचल के छोटे से गांव बरूल से निकलकर दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान तक पहुंचने की प्रेरणादायक कहानी लिखी है हर्रई के रंजीत यादव ने।
मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल, हर्रई के इस मेधावी छात्र ने सी.यू.ई.टी. परीक्षा में शानदार सफलता अर्जित कर न केवल जिले का नाम रोशन किया, बल्कि यह सिद्ध कर दिया कि संघर्ष, संकल्प और सही मार्गदर्शन से कोई भी सपना साकार हो सकता है।
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10 किलोमीटर रोज पैदल स्कूल
ग्राम बरूल के निवासी रंजीत यादव ने सीमित संसाधनों के बावजूद हार नहीं मानी। वे प्रतिदिन लगभग 10 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचे और लगातार पढ़ाई में जुटे रहे।
उनकी यह मेहनत रंग लाई और अब उनका दाखिला दिल्ली विश्वविद्यालय में तय हुआ है।
सफलता का श्रेय नि:शुल्क कोचिंग को
रंजीत ने बताया कि उनकी सफलता का मुख्य श्रेय कलेक्टर श्री शीलेंद्र सिंह द्वारा शुरू कराई गई नि:शुल्क कोचिंग कक्षाओं को जाता है।
उन्होंने कहा, “अगर यह सुविधा न मिलती तो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर पाना असंभव था।”
विधायक और तहसीलदार के प्रति आभार
रंजीत ने क्षेत्रीय विधायक श्री कमलेश प्रताप शाह और हर्रई के तहसीलदार श्री सुधीर मोहन अग्रवाल के प्रति भी आभार जताया।
उन्होंने बताया कि विधायक द्वारा निरंतर मॉनिटरिंग और तहसील स्तर पर छात्रों की समस्याओं पर ध्यान देना उनके लिए बहुत सहायक सिद्ध हुआ।
शिक्षा नवाचारों का दिखा असर
छिंदवाड़ा जिले में शिक्षा के क्षेत्र में कलेक्टर श्री शीलेंद्र सिंह के नेतृत्व में किए गए नवाचारों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
जिले में नीट, जेईई, सीयूईटी जैसी परीक्षाओं की नि:शुल्क तैयारी की सुविधा ने कई छात्रों का भविष्य संवारा है।
मुख्य बिंदु संक्षेप में:
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छात्र: रंजीत यादव, ग्राम बरूल
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परीक्षा: सी.यू.ई.टी. – दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश
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विद्यालय: मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल, हर्रई
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सहायता: नि:शुल्क कोचिंग, प्रशासनिक मार्गदर्शन
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प्रेरणा: आदिवासी अंचल के बच्चों के लिए मिसाल



