मध्यप्रदेशसिवनी

गंदा पानी सप्लाई करना जीवन के अधिकार का हनन — युवा अधिवक्ताओं ने नगर पालिका को थमाया सात दिन का अल्टीमेटम

Seoni 10 June 2025

सिवनी यशो:- सिवनी नगर में दूषित और बदबूदार पेयजल की आपूर्ति को लेकर अब जनआक्रोश स्वरूप लेने लगा है। शहर के युवा अधिवक्ताओं ने नगर पालिका के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए चेतावनी दी है कि यदि आगामी सात दिनों के भीतर शुद्ध जल आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो वे यह मामला माननीय न्यायालय में ले जाने को बाध्य होंगे।

युवा अधिवक्ता नवेंदु मिश्रा, शिवेंद्र सिंह सिसोदिया, याहया आरिफ कुरेशी, रोहित डहेरिया, श्याम डहेरिया, अभय सूर्यवंशी, सरमन सहित अन्य अधिवक्ताओं द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्र मुख्य नगर पालिका अधिकारी को सौंपा गया। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि अप्रैल 2025 से लेकर अब तक नगर पालिका की लापरवाही, निष्क्रियता एवं असंवेदनशील रवैये के चलते शहर की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

पत्र में उल्लेख किया गया कि नलों से मटमैला, बदबूदार और पीने के अयोग्य पानी की आपूर्ति हो रही है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों की तबीयत बिगड़ रही है। कई क्षेत्रों में जलजनित रोग जैसे पेट की बीमारियाँ, त्वचा संक्रमण और टाइफाइड फैल रहे हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 21 में वर्णित जीवन के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।

पत्र में विशेष रूप से यह भी इंगित किया गया कि खराब पानी के कारण लोगों के घरों में लगे वॉटर प्यूरीफायर खराब हो रहे हैं। जहां मध्यम और उच्च वर्ग किसी तरह से इसकी मरम्मत या नई मशीन खरीदने की स्थिति में हैं, वहीं गरीब, झुग्गी और मजदूर वर्ग के लोग यह सुविधा नहीं ले सकते, और उन्हें वही प्रदूषित पानी पीना पड़ रहा है।

युवा अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि मीडिया और सोशल मीडिया पर समस्याओं के उजागर होने के बावजूद नगर पालिका परिषद ने अब तक न तो जल की गुणवत्ता की जाँच कराई है, न ही यह बताया है कि सिवनी शहर में सप्लाई हो रहा पानी वास्तव में पीने योग्य है या नहीं।

यदि सात दिन में स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो होगा कानूनी हस्तक्षेप

अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर स्वच्छ जल आपूर्ति की समुचित व्यवस्था नहीं की जाती, तो वे इस मामले को न्यायालय में चुनौती देंगे। उन्होंने इसे जनता के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा गंभीर विषय बताया और कहा कि यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि कानूनन दंडनीय अपराध है।

आमजनों का कहना
यह मामला न सिर्फ सिवनी की जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा है बल्कि जनसुनवाई और जवाबदेही की गंभीर परीक्षा भी है। प्रशासन को चाहिए कि बिना देरी के जल शुद्धिकरण, वितरण और परीक्षण की प्रक्रिया को सशक्त करें ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचा जा सके।

Dainikyashonnati

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!