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गलत काम में प्रिय से प्रिय व्यक्ति का भी साथ नहीं देना चाहिये – स्वामी रामभ्रदाचार्य

रामकथा के दूसरे दिन श्रोताओं का जनसैलाब उमड़ा, भगवान राम जनवरी में भव्य मंदिर में होंगे स्थापित

 

स्वामी रामभ्रदाचार्य

सिवनी यशो:- गलत व्यक्ति का कभी साथ नहीं देना चाहिये भगवान शंकर ने भी माता सती की गलत बात का न तो समर्थन किया और न ही उनका साथ दिया यह बात तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य जी ने सिवनी नगर के पालीटेक्रिक ग्राउंड में चल रही दिव्य रामकथा के दूसरे दिन भगवान श्री राम के जन्म की कथा के पूर्व प्रसंग का वर्णन करते हुये कही ।
कथा सुनाते हुए कथावाचक स्वामी रामभद्राचार्य जी ने कहा कि भगवान श्रीराम हर जगह विद्यमान है हर सांस में राम है ऊपर नीचे अगल बगल हर जगह राम की उपस्थित है राम सर्वज्ञ है और इस बात प संशय नहीं होना चाहिये । माता सीता के हरण के पश्चात जब भगवान श्रीराम नर लीला करते हुये माता सीता की खोज कर रहे थे तब भगवान शिव उनकी नर लीला को देखकर मंत्रमुग्ध हो रहे थे और उन्हें इस बात के लिये प्रणाम कर रहे थे कि सर्वज्ञ श्रीराम वन में पेड़ पौधों पशु पक्षियोंं लताओं से सीता जी के बारे में पूंछ रहे थे भगवान श्रीराम के सीता बिरह को माता सती भी देख रही थी परंतु भगवान शिव द्वारा जब उन्हे प्रणाम किया गया तो माता सीता ने कहा कि आप त्रिकालदर्शी होकर राज पुत्र को प्रणाम कर रहे है भगवान शंकर ने माता पार्वती को समझाया कि वह सर्वज्ञ सर्वज्ञानी जितेन्द्रीय है मेरे आराध्य उन पर किसी बात का प्रभाव नहीं होता वे नारायण है नर लीला कितनी कुशलता से कर रहे है यह मुझे सुंदर लग रहा है उन पर संशय करने नहीं करना चाहिये परंमाता सती ने भगवान शिव की बात नहीं मानी और माता सीता का रूप धारण कर भगवान श्रीराम की परीक्षा लेने पहुँच गयी परंतु भगवान श्रीराम ने माता सती का सत्कार करते हुये उन्हें प्रणाम किया और भगवान शिव के बारे में पूछा तो वे लज्जित होकर वापिस आयी । कथाकार स्वामी रामभद्राचार्य जी ने कहा कि माता सती को भगवान शंकर ने ऐसा करने से मना किया था परंतु माता सती उनको भी साथ चलने कह रही थी जो भगवान शिव ने नहीं किया जिससे स्पष्ट है कि हमारा कोई कितना भी प्रिय व्यक्ति हो गलत काम में उसका साथ नहीं देना चाहिये ।


रामकथा के दूसरे दिन कथा सुनाते हुये स्वामी जी ने कहा कि आज यहाँ जो कथा मेरे द्वारा की जा रही है यह 1377 वी कथा है और राम कथा मेरे जीवन का आधार है इस कथा के माध्यम से इस देश को हिन्दु राष्ट्रराष्ट्र बनाने का संकल्प है । जिसे देश का गौरव भगवान श्रीराम है वह किसी झोपड़ी में क्यो रहे उनके लिये उनकी जन्म स्थली में भव्य मंदिर के निर्माण के लिये पिछले पाँच सौ वर्ष से संघर्ष चल रहा था 76 वार युद्ध भी हुये परंतु अंत में जीत सत्य की हुई राम की हुई और यह मेरा सौभाग्य है कि मै इसमें मेरी भूमिका भी रही आगामी 22 जनवरी 2024 को भगवान श्रीराम अपने गर्भगृह में स्थापित होंगे और यह दिन हमारे लिये ऐतिहासिक होगा । श्रीराम कथा शुरू करने से पहले स्वामी रामभद्राचार्य के द्वारा घोषणा की गई कि 2024 में 12 से 20 जनवरी तक अयोध्या में 11 कुंडीय हनुमान महायज्ञ करेंगे। इसमें शामिल होने के लिए अग्रवनवासियों को कहा। यह एतिहासिक अवसर आ रहा कि जनवरी में ही रामलला भव्य मंदिर में विराजमान होंगे।


स्वामी राम भद्राचार्य जी ने कहा कि वे भाजपा को इसलिये अच्छा कहते है क्योकि भाजपा वाले उनकी बात सुनते है और संतो को क्या चाहिये जो संत महात्माओं की बात सुने राम का काम करें वह प्रिय है ।उन्होंने सनातन के विरोधियों को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि सनातन का विरोध करने वाले स्वयं समाप्त हो गये परंतु सनातन कभी समाप्त नहीं होगा ।
रविवार को कथा में भारी जनसैलाब उमड़ा पतित पावनी रामकथा के साथ जय श्री राम के नारों से पंडाल गुंजायमान होते रहा है संगीतमय राम कथा में श्रोता भाव विभोर होकर कथा श्रवण कर रहे थे । कथा के आयोजक दिनेश राय मुनमुन ने सहित आमंत्रित अनेक समाज प्रमुखों के द्वारा कथाकार राम अनुरागी स्वामी रामभद्राचार्य जी की पदुका पूजन किया गया कथा में आरती के समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुसंागिक संगठन के प्रमुखों की उपस्थिती रही ।

Dainikyashonnati

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