आदिवासी अंचल में शिक्षक गायब, प्रशासन बेखबर
दो माह बाद भी न जांच, न खोज—ग्रामीणों ने उठाए आदिवासी विकास विभाग पर सवाल

सिवनी घंसौर यशो:- स्थानीय शासकीय माध्यमिक शाला सैलवाड़ा में पदस्थ प्राथमिक शिक्षक मुकेश परते के रहस्यमय ढंग से लापता होने का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। शिक्षक के करीब दो माह से अधिक समय से गायब रहने और उनकी कोई जानकारी न मिलने को लेकर विद्यालय प्रशासन ने संकुल प्राचार्य को लिखित सूचना भेजी है। इसके बावजूद अब तक विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने से ग्रामीणों और सहकर्मियों में चिंता के साथ आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है।
विद्यालय के प्रधान पाठक द्वारा भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि प्राथमिक शिक्षक मुकेश परते 8 अक्टूबर से विद्यालय में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। प्रारंभिक दिनों में विद्यालय स्टाफ ने शिक्षक से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बाद विद्यालय प्रशासन ने आसपास के क्षेत्रों और परिचितों के माध्यम से भी जानकारी जुटाने की कोशिश की, परंतु सभी प्रयास निष्फल रहे।
प्रधान पाठक ने पत्र में स्पष्ट किया है कि आज दिनांक तक न तो शिक्षक का कोई पता चल पाया है और न ही परिवार, पड़ोस या किसी परिचित से कोई ठोस सूचना मिली है। पत्र में इस स्थिति को “गंभीर एवं चिंताजनक” बताते हुए विभाग से तत्काल कार्रवाई का अनुरोध किया गया है।
लापरवाही पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इतनी लंबी अवधि बीत जाने के बावजूद न तो कोई आधिकारिक जांच बैठाई गई और न ही पुलिस प्रशासन को औपचारिक रूप से सूचना दी गई। इससे विद्यालय के अन्य शिक्षकों में भी विभागीय लापरवाही को लेकर नाराज़गी है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई शिक्षक दो महीने से लापता है, तो यह केवल विद्यालय का नहीं बल्कि समाज से जुड़ा गंभीर मामला है। ऐसे में विभाग का चुप रहना समझ से परे है।
शैक्षणिक व्यवस्था भी प्रभावित
विद्यालय प्रशासन के अनुसार, शिक्षक की अनुपस्थिति का असर स्कूल के शैक्षणिक वातावरण पर भी पड़ा है। अध्ययन-अध्यापन का कार्य प्रभावित हुआ है और बच्चों की पढ़ाई पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला और भी गंभीर रूप ले सकता है।
पूरे क्षेत्र में फैली चिंता
शिक्षक के लापता होने की खबर धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र में फैल चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि अचानक इस तरह गायब हो जाना सभी के लिए सदमे जैसा है। कई लोगों का मानना है कि यदि विभाग पहले ही सक्रिय होता, तो शायद अब तक कोई न कोई सुराग मिल गया होता।
विद्यालय के एक कर्मचारी ने बताया कि शुरुआत में यह माना गया कि शिक्षक किसी पारिवारिक या स्वास्थ्य कारण से अनुपस्थित होंगे, लेकिन लंबे समय तक संपर्क न होना और कोई सूचना न मिलना मामले को अत्यंत गंभीर बना देता है।
विभाग का मौन रवैया सवालों के घेरे में
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने याद दिलाया कि किसी भी कर्मचारी के इतने लंबे समय तक बिना सूचना लापता रहने की स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन अब तक न तो कोई जांच अधिकारी तैनात किया गया और न ही विद्यालय से इस संबंध में कोई औपचारिक बयान लिया गया।
उनका कहना है कि यह सिर्फ किसी शिक्षक की अनुपस्थिति का मामला नहीं, बल्कि एक व्यक्ति की सुरक्षा और उसके जीवन से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है, जिस पर विभाग और प्रशासन दोनों को मिलकर तुरंत जांच शुरू करनी चाहिए।
ग्रामीणों ने फिर दोहराई कार्रवाई की मांग
प्रधान पाठक ने कहा है कि विद्यालय प्रशासन अपनी ओर से सभी प्रयास कर चुका है। अब यह विभाग की जिम्मेदारी है कि वह तत्काल हस्तक्षेप करे, पुलिस प्रशासन को सूचना दे और लापता शिक्षक की तलाश शुरू कराए। उन्होंने आग्रह किया है कि इस मामले को केवल अनुशासनहीनता न मानते हुए मानव सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रकरण समझा जाए।
आगे क्या?
अब यह देखना होगा कि विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है।
क्या तुरंत जांच बैठाई जाएगी?
क्या पुलिस को आधिकारिक सूचना दी जाएगी?
और सबसे अहम—क्या शिक्षक मुकेश परते का कोई सुराग मिल पाएगा?
यह घटना एक बार फिर सरकारी विभागों की धीमी कार्यप्रणाली और संवेदनशील मामलों में लापरवाही को उजागर करती है। ग्रामीणों और विद्यालय स्टाफ का कहना है कि जब तक विभाग सक्रिय होकर कार्रवाई नहीं करता, तब तक इस मामले का समाधान मुश्किल है।






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