टीईटी पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, सिवनी सहित मध्यप्रदेश के शिक्षकों को झटका
दो बार याचिका खारिज, अब नहीं मिलेगी राहत!
सिवनी/भोपाल, 15 अप्रैल 2026।
शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। 10 अप्रैल 2026 को उत्तर प्रदेश के शिक्षक संगठन की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने साफ कहा कि टीईटी अनिवार्यता में किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जा सकती। इससे पहले 17 नवंबर 2025 को भी इसी तरह की याचिका खारिज की जा चुकी है।
क्या है पूरा मामला?
कोर्ट ने अपने फैसलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) के तहत टीईटी को अनिवार्य बताते हुए कहा कि—
- कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए TET जरूरी
- 5 साल से कम सेवा शेष: बिना TET रिटायर हो सकते हैं, लेकिन प्रमोशन नहीं
- 5 साल से अधिक सेवा शेष: 2 साल में TET पास करना अनिवार्य, अन्यथा अनिवार्य सेवानिवृत्ति
मध्यप्रदेश में बढ़ा असंतोष
सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख का सीधा असर अब मध्य प्रदेश में भी देखने को मिल रहा है।
- जिला मुख्यालय से लेकर ब्लॉक स्तर तक शिक्षकों का आंदोलन तेज
- राज्यपाल, शिक्षा मंत्री और प्रशासन को ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं
- मांग: सरकार कोर्ट में हस्तक्षेप कर TET अनिवार्यता खत्म कराए
सिवनी में हजारों शिक्षक सड़कों पर
सिवनी जिले में भी यह मुद्दा जोर पकड़ चुका है—
- हजारों शिक्षक आंदोलन में शामिल
- कलेक्ट्रेट और ब्लॉक मुख्यालयों पर प्रदर्शन
- विभिन्न कर्मचारी संगठनों का भी समर्थन
- कई चरणों में ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं
10 अप्रैल का फैसला बना निराशा का कारण
10 अप्रैल 2026 को याचिका खारिज होने के बाद सिवनी सहित पूरे मध्यप्रदेश के शिक्षकों में गहरी निराशा देखी जा रही है।
शिक्षकों का कहना है कि—
- लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए TET अनिवार्यता व्यावहारिक नहीं
- सरकार को उनके पक्ष में ठोस कदम उठाना चाहिए
क्या हैं आगे के संकेत?
- TET अब शिक्षा व्यवस्था का स्थायी हिस्सा बन चुका है
- राज्यों के पास राहत दिलाने के सीमित विकल्प
- शिक्षकों को अब परीक्षा पास करने के अलावा कोई विकल्प नहीं
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने जहां शिक्षा की गुणवत्ता को प्राथमिकता दी है, वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश और सिवनी जैसे जिलों में कार्यरत हजारों शिक्षकों के सामने भविष्य की अनिश्चितता खड़ी कर दी है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर क्या रणनीति अपनाती है।





