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….. “अंधेरा छटेगा…. सूरज निकलेगा और कमल खिलेगा 

पश्चिमी घाट के नीचे इस समुद्र के तट से मैं आत्मविश्वास के साथ भविष्यवाणी कर सकता हूँपश्चिमी घाट के नीचे इस समुद्र के तट से मैं आत्मविश्वास के साथ भविष्यवाणी कर सकता हूँ….. “अंधेरा छटेगा…. सूरज निकलेगा और कमल खिलेगा 


मुंबई के भारतीय जनता पार्टी के प्रथम अधिवेशन में उक्ताशय की उद्घोषणा करने वाले हमारे लाड़ले नेता श्रद्धेय अटल बिहारी बाजपेयी जी का आज 25 दिसंबर को जन्मदिवस है. हम उन्हें शत्-शत् नमन करते हैं.
“अटल जी ने जो कहा वह आदर्श बन गया, जो किया वो इतिहास बन गया और जो लिखा वो अमिट बन गया ” भारत के तीन बार प्रधानमंत्री बनने वाले, 10 बार लोकसभा सदस्य बनने वाले, 02 बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने वाले भारत रत्न, सर्वश्रेष्ठ सांसद, पद्म विभूषण से अलंकृत “अटल जी”ने यूँ ही लोगों के दिलो में राज नहीं किया. उन्होंने अपने कृतित्व से जमीन को छोड़े बिना आसमान को छूने का काम किया था. पक्ष-विपक्ष से एक सा सम्मान पाने वाले भावुक ह्रदय अटल जी कहते थे मेरे प्रभु, मुझे इतनी ऊँचाई कभी मत देना, गैरों को गले न लगा सकूं, इतनी रुखाई कभी मत देना….
भारतीय जनसंघ और फिर भारतीय जनता पार्टी के प्रखर राष्ट्रवादी, गहन चिंतक, कवि ह्रदय, लोकप्रिय नेता अटल जी ने जहाँ विपक्ष में रहकर अपने कर्तव्यों व दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन कर नये मापदंडो को स्थापित किया वहीं देश के प्रधानमंत्री के रुप में राष्ट्र को अनेकों सौगातें दी. 11 मई 1998 को पोखरण परमाणु परीक्षण से अमेरिका सहित सारे विश्व को चौंका दिया. वैश्विक आर्थिक दबाव व प्रतिबंधों की धमकी के बावजूद किये गये परमाणु परीक्षण ने अटल जी की देश की सुरक्षा व शांति के प्रति अपनाई जाने वाली नीति के प्रति अपने दृढ़ इच्छा शक्ति को प्रगट किया था.
अटल जी के कार्यकाल में सूचना प्रौद्योगिकी में क्रांति आई. देश की सर्वाधिक महत्वाकांक्षी स्वर्णिम चतुर्भुज अंतर्गत आधुनिक 4- 6 लाईन वाली सड़कें जिसका लाभ अपने सिवनी जिले को भी मिला, अटल योजना की ही देन है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वजल धारा, सर्वशिक्षा अभियान, विदेशी निवेश में कई गुना वृद्धि, रोजगार में वृद्धि, आतंकवाद के विरुद्ध ङ्क पोटा ङ्ख जैसा कठोर कानून, फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड जैसी अन्य योजनाओं के साथ सुशासन के लिए अटल जी सदैव याद किये जायेंगे.
यही नहीं 1977 में विदेश मंत्री के रुप में अटल जी को संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिवेशन में भाग लेने का जब अवसर मिला तो वहाँ ” हिन्दी “में भाषण देकर हिन्दी का मान बढ़ाया. विपक्ष में रहते हुए भी अटल जी को तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव जी ने भारत के प्रतिनिधि मंडल के नेतृत्वकर्ता के रुप में विदेश भेजा था. वहाँ पर अटल जी से पत्रकारों ने जब प्रश्?न पूछे तो जबाब था कि मैं यहाँ अपने देश भारत का प्रतिनिधि बन कर आया हूँ न कि विपक्ष का.
एक अत्यंत कुशल वक्ता के रुप में अटल जी ने भारत सहित सारे विश्?व में लोकप्रियता हासिल की. उनके विभिन्न भाषण चाहे संसद के हाल के हों अथवा किसी सभा के आज भी बड़े ध्यान से सुने जाते हैं. सही अर्थों में सारे वर्गों में अत्यंत लोकप्रियता के कारण यदि उन्हें “अजातशत्रु ” कहा जाये तो अनुचित नहीं होगा. वे सेक्यूलरवादी होते हुए भी सम्प्रदायवादी नहीं थे. धार्मिक होते हुए भी धर्मांधवादी नहीं थे. आस्तिक होते हुए भी नास्तिकता के विरोधी नहीं थे. समाजवादी नहीं थे किन्तु डॉ. राममनोहर लोहिया के विचारों को सुनते थे.
एक महत्वपूर्ण उद्बोधन के उनके विचार हमारे लिए अत्यंत प्रेरणा का कार्य करते हैं जब उन्होंने कहा था… भारत मात्र जमीन का टुकड़ा नहीं जीता जागता राष्ट्र पुरुष है. हिमालय इसका मस्तक है, गौरीशंकर शिखा है, कश्मीर किरीट है, पंजाब व बंगाल दो विशाल कंधे हैं, दिल्ली इसका दिल है, विन्ध्याचल कटि है, नर्मदा करधनि है. पूर्वी व पश्?चिमी घाट इसकी दो विशाल जंघायें हैं, कन्याकुमारी इसके चरण हैं. सागर इसके पग पखारता है, चाँद- सूरज इसकी आरती उतारते हैं. ये वंदन की भूमि है, अभिनंदन की भूमि है. इसका कंकर कंकर शंकर है, इसका बिन्दु बिन्दु गंगाजल है. हम जियेंगे तो अपने इस राष्ट्र के लिए, हम मरेंगे तो अपने राष्ट्र के लिए.
मैं अपने आप को बड़ा सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष के रुप में सारा दिन उनके साथ प्रवास का अवसर मिला. जबलपुर से सिवनी छिंदवाड़ा प्रवास के समय पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने मुझे अटल जी के प्रवास की जिम्मेदारी सौंपी थी. अटल जी के साथ किये गये प्रवास के संस्मरण आज भी रोमांचित कर देते हैं. तत्पश्?चात विधायक होने के नाते मुझे उनसे भेंट करने के दो अवसर और मिले. अटल जी के निधन के पश्?चात सारे राष्ट्र में अस्थि कलश यात्रायें निकाली गई थी. मध्यप्रदेश में भोपाल से निकाली गई विभिन्न यात्राओं में मुझे सह प्रभारी के रुप में यात्रा का दायित्व दिया गया था.
एक बार पुन: श्रद्धेय अटल जी को शत्-शत् नमन

मुंबई के भारतीय जनता पार्टी के प्रथम अधिवेशन में उक्ताशय की उद्घोषणा करने वाले हमारे लाड़ले नेता श्रद्धेय अटल बिहारी बाजपेयी जी का आज 25 दिसंबर को जन्मदिवस है. हम उन्हें शत्-शत् नमन करते हैं.
“अटल जी ने जो कहा वह आदर्श बन गया, जो किया वो इतिहास बन गया और जो लिखा वो अमिट बन गया ” भारत के तीन बार प्रधानमंत्री बनने वाले, 10 बार लोकसभा सदस्य बनने वाले, 02 बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने वाले भारत रत्न, सर्वश्रेष्ठ सांसद, पद्म विभूषण से अलंकृत “अटल जी”ने यूँ ही लोगों के दिलो में राज नहीं किया. उन्होंने अपने कृतित्व से जमीन को छोड़े बिना आसमान को छूने का काम किया था. पक्ष-विपक्ष से एक सा सम्मान पाने वाले भावुक ह्रदय अटल जी कहते थे मेरे प्रभु, मुझे इतनी ऊँचाई कभी मत देना, गैरों को गले न लगा सकूं, इतनी रुखाई कभी मत देना….
भारतीय जनसंघ और फिर भारतीय जनता पार्टी के प्रखर राष्ट्रवादी, गहन चिंतक, कवि ह्रदय, लोकप्रिय नेता अटल जी ने जहाँ विपक्ष में रहकर अपने कर्तव्यों व दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन कर नये मापदंडो को स्थापित किया वहीं देश के प्रधानमंत्री के रुप में राष्ट्र को अनेकों सौगातें दी. 11 मई 1998 को पोखरण परमाणु परीक्षण से अमेरिका सहित सारे विश्व को चौंका दिया. वैश्विक आर्थिक दबाव व प्रतिबंधों की धमकी के बावजूद किये गये परमाणु परीक्षण ने अटल जी की देश की सुरक्षा व शांति के प्रति अपनाई जाने वाली नीति के प्रति अपने दृढ़ इच्छा शक्ति को प्रगट किया था.
अटल जी के कार्यकाल में सूचना प्रौद्योगिकी में क्रांति आई. देश की सर्वाधिक महत्वाकांक्षी स्वर्णिम चतुर्भुज अंतर्गत आधुनिक 4- 6 लाईन वाली सड़कें जिसका लाभ अपने सिवनी जिले को भी मिला, अटल योजना की ही देन है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वजल धारा, सर्वशिक्षा अभियान, विदेशी निवेश में कई गुना वृद्धि, रोजगार में वृद्धि, आतंकवाद के विरुद्ध ङ्क पोटा ङ्ख जैसा कठोर कानून, फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड जैसी अन्य योजनाओं के साथ सुशासन के लिए अटल जी सदैव याद किये जायेंगे.
यही नहीं 1977 में विदेश मंत्री के रुप में अटल जी को संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिवेशन में भाग लेने का जब अवसर मिला तो वहाँ ” हिन्दी “में भाषण देकर हिन्दी का मान बढ़ाया. विपक्ष में रहते हुए भी अटल जी को तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव जी ने भारत के प्रतिनिधि मंडल के नेतृत्वकर्ता के रुप में विदेश भेजा था. वहाँ पर अटल जी से पत्रकारों ने जब प्रश्?न पूछे तो जबाब था कि मैं यहाँ अपने देश भारत का प्रतिनिधि बन कर आया हूँ न कि विपक्ष का.
एक अत्यंत कुशल वक्ता के रुप में अटल जी ने भारत सहित सारे विश्?व में लोकप्रियता हासिल की. उनके विभिन्न भाषण चाहे संसद के हाल के हों अथवा किसी सभा के आज भी बड़े ध्यान से सुने जाते हैं. सही अर्थों में सारे वर्गों में अत्यंत लोकप्रियता के कारण यदि उन्हें “अजातशत्रु ” कहा जाये तो अनुचित नहीं होगा. वे सेक्यूलरवादी होते हुए भी सम्प्रदायवादी नहीं थे. धार्मिक होते हुए भी धर्मांधवादी नहीं थे. आस्तिक होते हुए भी नास्तिकता के विरोधी नहीं थे. समाजवादी नहीं थे किन्तु डॉ. राममनोहर लोहिया के विचारों को सुनते थे.
एक महत्वपूर्ण उद्बोधन के उनके विचार हमारे लिए अत्यंत प्रेरणा का कार्य करते हैं जब उन्होंने कहा था… भारत मात्र जमीन का टुकड़ा नहीं जीता जागता राष्ट्र पुरुष है. हिमालय इसका मस्तक है, गौरीशंकर शिखा है, कश्मीर किरीट है, पंजाब व बंगाल दो विशाल कंधे हैं, दिल्ली इसका दिल है, विन्ध्याचल कटि है, नर्मदा करधनि है. पूर्वी व पश्?चिमी घाट इसकी दो विशाल जंघायें हैं, कन्याकुमारी इसके चरण हैं. सागर इसके पग पखारता है, चाँद- सूरज इसकी आरती उतारते हैं. ये वंदन की भूमि है, अभिनंदन की भूमि है. इसका कंकर कंकर शंकर है, इसका बिन्दु बिन्दु गंगाजल है. हम जियेंगे तो अपने इस राष्ट्र के लिए, हम मरेंगे तो अपने राष्ट्र के लिए.
मैं अपने आप को बड़ा सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष के रुप में सारा दिन उनके साथ प्रवास का अवसर मिला. जबलपुर से सिवनी छिंदवाड़ा प्रवास के समय पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने मुझे अटल जी के प्रवास की जिम्मेदारी सौंपी थी. अटल जी के साथ किये गये प्रवास के संस्मरण आज भी रोमांचित कर देते हैं. तत्पश्?चात विधायक होने के नाते मुझे उनसे भेंट करने के दो अवसर और मिले. अटल जी के निधन के पश्?चात सारे राष्ट्र में अस्थि कलश यात्रायें निकाली गई थी. मध्यप्रदेश में भोपाल से निकाली गई विभिन्न यात्राओं में मुझे सह प्रभारी के रुप में यात्रा का दायित्व दिया गया था.
एक बार पुन: श्रद्धेय अटल जी को शत्-शत् नमन

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