भाषा की अभिव्यक्ति पैनी और धारदार होना चाहिए :डॉ लक्ष्मीचन्द
शब्द हिमालय तो भाषा समुद्र है: अवधेश तिवारी
हम सब का साथ हिन्दी का बढता हाथ तेरी,मेरी,उसकी नही ! हम सब की है हिन्दी ।।
Chhindwara 10 January 2025
छिंदवाड़ा यशो:- प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय छिंदवाड़ा में राजभाषा विभाग द्वारा प्राचार्य डॉ वॉय के शर्मा के संरक्षण व हिन्दी एवं प्रयोजनमूलक हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ .लक्ष्मीचंद के मार्गदर्शन व विभागीय सदस्यों डॉ उर्मिला खरपुसे ,डॉ . सुशील ब्यौहार, डॉ . रचना लारिया, शैलकुमारी धुर्वे , कुमारी पायल विशेन के सहयोग व डाँ सीमा सूर्यवंशी के संचालन तथा छात्र- छात्राओ की उपस्थिति में ‘ अंतरराष्ट्रीय हिन्दी दिवस ‘ का आयोजन किया गया । कार्यक्रम के उद्बोधन में प्राचार्य डॉ वॉय के शर्मा ने कहा – अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी का प्रभाव को बढ़ाने हेतु हिन्दी भाषा के स्वरूप को एक होना चाहिए ।
मुख्य अतिथि अवधेश तिवारी ने कहा- शब्दों को तोलो, ओज को पहचानो ज्ञान को जानो सहजता के आलोक में व्यापकता को सहेजो समुन्दर के किनारे जाकर आपको रेत नहीं उसमें डूबकर मोती निकालना है। अपने स्वधर्म को पहचानो। युग तुमसे बरदान माँगता है। भाषा छूटी तो मातृभाषा का प्यार छूट जाएगा। जब भाषा खोती है तो अकेली भाषा नहीं बल्कि संवेदनाएँ भी खो जाती है। माँ और मातृभाषा का कोई तोड़ नही । मातृभाषा शेरनी का दूध हैं जितना पियोगे उतना दहाड़ोगे।
डॉ. लक्ष्मी चन्द ने कहा – अभिव्यक्ति पैनी और धारदार होना चाहिए । हिन्दी भाषा के साथ क्षेत्रीय बोलियो को बढ़ावा दिया जाना चाहिए । हिंदी का प्रयोग आज व अभी से प्रारम्भ करे! बोलियो से लेकर मानकीकरण तक की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला ! डॉ उर्मिला खरपूसे ने कहा – हिन्दी भाषा को व्यक्तिगत स्तर पर सुधार कर वैश्विक स्तर पर ले जाएँ। डॉ. सुशील ब्यौहार ने- हम सब का साथ हिन्दी को विश्व पटल पर पहुँचा सकता है ।
गूगल द्वारा अंग्रेजी के अतिरिक्त अब हिन्दी के सथ ही क्षेत्रीय भाषाओं का भी योगदान दिया जा रहा है।खेद है हम अपनी निज भाषा को महत्व नही दे रहे है! डॉ.सीमा सूर्यवंशी ने- विश्व स्तर पर हिन्दी का बढ़ता प्रभाव व ॥ विश्व सम्मेलन पर अपने विचार निकष कण्ठस्थ लीला एप व साफ्टवेयर के साथ गिरमिटिया देशों में हिन्दी के प्रभाव पर प्रकाश डाला। डॉ. रचना लारिया ने कहा – हमें निज भाषा को सम्मान देना होगा ।
तेरी मेरी उसकी नहीं हिन्दी विश्व की , जन जन की है। बहुराष्ट्रीय कम्पनीयाँ विकसित हिन्दी के कारण ही हमारे भारत में प्रवेश कर रही है! भाषण में – चंचलेश साहु, अमित कुमार, दिक्षा साहु कविता पाठ – चॉदनी वर्मा, रेशमी, शिवम उइके प्रश्नोत्तरी- विशाल शालिनी वन्देवार, सोनिया मरकाम, प्रतियोगिता में सहभागिता की, इनके अतिरिक्त महाविद्यालय के बरिष्ठ प्राध्यापक – डॉ जी वी ब्रम्हे, डॉ. राजेन्द्र मिश्रा, प्रो माहुल पवार, डॉ. अनिल झरबड़े, डॉ शालिनी पाटिल श्री महेन्द्र साहू, अन्य प्राध्यापक तथा समस्त छात्र -छात्राओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान दिया!



