भक्ति सिद्धि और राम’ पुस्तक का लोकार्पण, साहित्यिक एवं आध्यात्मिक चर्चा
विश्व संवाद केंद्र में वरिष्ठ लेखक श्रीराम माहेश्वरी की पुस्तक का लोकार्पण, प्रमुख अतिथियों ने भक्ति और आध्यात्मिक ग्रंथों के महत्व पर प्रकाश डाला
Bhopal 27 August 2025
भोपाल – अर्चना प्रकाशन न्यास, भोपाल के तत्वावधान में वरिष्ठ लेखक श्रीराम माहेश्वरी की पुस्तक –
‘भक्ति सिद्धि और राम’ का लोकार्पण विश्व संवाद केंद्र, शिवाजी नगर, भोपाल में संपन्न हुआ।
मुख्य अतिथि, पूर्व अध्यक्ष मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग अशोक पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि-
भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिक ग्रंथों का विशेष महत्व है।
उन्होंने बताया कि पुस्तक केवल आध्यात्मिक ज्ञान तक सीमित नहीं है,
बल्कि इसमें सामाजिक पहलुओं को भी समाहित किया गया है।
इस अवसर पर उन्होंने पुस्तक को उपयोगी और संग्रहणीय बताया।

अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं संयोजक सप्रे संग्रहालय पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि –
रामायण, महाभारत और गीता भारत के महान ग्रंथ हैं। इनका पारायण करके व्यक्ति आध्यात्मिक विकास कर सकता है।
उन्होंने बताया कि लगभग दो शताब्दियों पहले भारत से मजदूरों को मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद सहित अनेक उपनिवेशों में काम के लिए ले जाया गया था।
ये मजदूर अपने साथ तुलसी पौधा, गंगाजल और रामायण लेकर गए थे।
भारतीय संस्कृति और इन तीनों महान ग्रंथों की विरासत ने उन्हें जीवित रखा और बंजर द्वीपों को समृद्ध भी किया।
विशिष्ट अतिथि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि-
भक्ति से सिद्धि प्राप्त होते ही व्यक्तित्व राममय हो जाता है।
सारस्वत अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार प्रभुदयाल मिश्र ने सिद्धियों के प्रकार और उनके योग में महत्व का वर्णन किया।

रचनाकार ने पुस्तक की विषय वस्तु से परिचित दिया
कृति के रचनाकार श्रीराम माहेश्वरी ने पुस्तक की विषय वस्तु का परिचय देते हुए बताया कि-
इसमें भक्ति का परिचय, मानस में नवधा भक्ति, श्रीमद् भागवत में भक्ति, श्रीमद्भगवत गीता में भक्ति और पूज्य संतों की राम भक्ति का विवरण प्रकाशित किया गया है।
सिद्धि के अंतर्गत पतंजलि योगसूत्र में वर्णित अष्ट सिद्धियां, श्रीमद्भागवत में सिद्धियां और उपनिषदों में वर्णित सिद्धियों का उल्लेख किया गया है।
स्तुति, उपासना और सिद्धि की व्याख्या की गई है। अगले अध्यायों में भगवान श्रीराम की कथाओं का संक्षिप्त वर्णन भी शामिल है।
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इस प्रकार स्वागत से समापन हुआ
कार्यक्रम में अर्चना प्रकाशन के निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता ने स्वागत वक्तव्य दिया।
संचालन अखिल भारतीय साहित्य परिषद की महामंत्री एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती सुनीता यादव ने किया।
सरस्वती वंदना श्रीमती सुनीता शर्मा ने प्रस्तुत की। पुस्तक पर अपने विचार गीतकार ऋषि श्रृंगारी ने रखे।
आभार अर्चना प्रकाशन के उपाध्यक्ष माधव सिंह दांगी ने व्यक्त किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकार और विदुषी बहनें उपस्थित रहीं।



