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जल संरक्षण का अर्थ है भविष्य की बेहतर सुरक्षा – शिवकांत 

आई टी आई कॉलेज छपारा में किया गया जल संसद कार्यक्रम का आयोजन

छपारा यशो:- जल संरक्षण और संवर्धन के लिए जल संसद कार्यक्रम का आयोजन आई टी आई कॉलेज छपारा में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि नगर परिषद उपाध्यक्ष छपारा शिवकांत सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पानी को रोकने एवं उसे संरक्षित करने के लिए शासन द्वारा अनेक कार्यक्रम चलाए जा रहे है। सभी को अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए जल संरक्षण के कार्य करने की जरूरत है। कुआं, तालाब, बावडिय़ॉं आदि साफ रहें जो प्रकृति ने हमें दिया है उसे बचाना है। हम जल संरक्षण के कार्य नहीं करेंगे तो हमारी भावी पीढ़ी हमें माफ नहीं कर पायेगी। जल संरक्षण के लिए हमें लोगों को जागरूक बनना होगा और वर्षा के जल को तालाब आदि बनाकर संरक्षित करना होगा।
उपयंत्री जल संसाधन विभाग सुश्री अस्मिता पटेल नें जल संरक्षण के महत्व के बारे में छात्र/छात्राओं को जानकारी दीं जैसे घरों के नलों में टोटी लगाना चाहिए। हैंडपंप के आसपास साफ-सफाई रखनी चाहिए। उन्होंने बताया कि 3 प्रतिशत पानी पृथ्वी पर पीने योग्य है और 97 प्रतिशत पीने योग्य नहीं है । साथ ही अपने घरों में वाटर हारवेस्टिंग करने की सलाह दी।
      उपयंत्री जल संसाधन विभाग  सुश्री ओशी कापुस्कर ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में धरती का गिरता जल स्तर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि जल स्तर निरंतर कम हो रहा है। जल संरचनाओं का निर्माण करना नितांत आवश्यक है। जल ही जीवन है लेकिन जल के बिना जीवन संभव नहीं है
      इस अवसर पर कॉलेज प्राचार्य नलिन तिवारी ने कहा कि हमारी संस्कृति ही जल संस्कृति है, जल ही जीवन है, सृष्टि को आगे बढाने के लिए पानी नितांत आवश्यक है। हम अपनी छोटी छोटी आदतों में बदलाव ला कर अमृत तुल्य जल का संवर्धन कर सकतें है भविष्यवाणी की गई है कि तृतीय विश्व युद्व का कारण पानी ही होगा।
कार्यक्रम के समापन पर  सतीश सूर्यवंशी ने कार्यक्रम पर उपस्थित सभी अतिथियों का का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में अमित शर्मा, शैलेन्द्र ठाकुर, हर्ष सोनी, नीरज उइकें ,संजय उईके, पुरूषोत्तम नापित, रंजना गप्ता, प्रतिभा सोनी, शालिनी उईके, मनीषा थापा आदि उपस्थित रहे।

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