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आदि उत्सव में हर वर्ष होती घोषणाओं का क्रियांवयन क्यों नहीं ? तेकाम किया सवाल

शनिवार 20 मई 2023
मंडला यशो:- मंडला जिले के रामनगर में आदि उत्सव आयोजित किये जाने को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जिला अध्यक्ष एवं जिला पंचायत में उपाध्यक्ष इंजीनियर कमलेश तेकाम ने अनेक सवाल उठाये है और कहा कि जिन उद्देश्यों को लेकर यह आयोजन किया जाता है उन उद्देश्यों की ूपूर्ति इस आयोजन नहीं हो रही है और उन्होंने इसके औचित्य को लेकर प्रश्र खड़े किये है । श्री तेकाम ने कहा कि गोंडकालीन संस्कृति को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने के लिये आदि उत्सव मनाया जाता है । इस उत्सव मे उपराष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री, कई केंद्रीय मंत्री और कई राज्यों के मुख्यमंत्री े शिरकत कर चुके है जिन्होंने संस्कृति को समृद्ध बनाने और जनजातियों के विकास के लिये मंडला जिले के विकास के लिये अनेक घोषणाएँ की परंतु आज तक उन घोषणाओं का क्रियांवयन नहीं होना हमारे जिम्मेदार सांसद की कमजोरी को प्रगट करता है ।
श्री तेकाम ने कहा कि आदि उत्सव का मकसद गोंडकालीन परंपरा और रीति रिवाजों को दुनिया के सामने रखना है , लेकिन हमारे आदिवासी समाज को जो सुविधाये मिलनी चाहिए उससे आज भी वह उससे वंचित है , शासन की योजनाओ का लाभ आदिवासियो जमीनी स्तर पर प्राप्त नहीं हो रहा है इस वजह से आज भी आदिवासी समाज की गिनती पिछड़े समाज मे हो रही है । रोजगार के आभाव में हमारे जिले से सबसे ज्यादा आदिवासियों का पलायन हो रहा है इसका मुख्य कारण है जिले मे रोजगार की उपलब्धता नहीं होना । अगर आदि उत्सव से जिले के आदिवासी युवाओ को रोजगार नहीं मिल पता तो इतने बड़े आयोजन का औचित्य क्या है ?
आज दुनिया कहाँ से कहाँ पहुच गई है पर आदिवसी समाज आज भी वही की वहंी है । श्री तेकाम ने कहा कि अनेक वर्षो से इस उत्सव को मनाया जा रहा है इस उत्सव मे हर बार कोई न कोई नई घोषणा की जाती है लेकिन क्रियांवयन के नाम पर शून्यता ही रही है । उल्लेखनीय है की यह उत्सव शुरुआत होते ही दूसरे दिन समाप्त हो जाता है जबकि इस उत्सव को पाँच दिन मनाया जाना चाहिये और इसे केवल औपचारिकता पूर्ण करने वाला उत्साव का रूप नहीं दिया जाना चाहिये इस उत्सव की सार्थकता को सिद्ध करने की पूर्ण इच्छाशक्ति के साथ किया जाना चाहिये और हमारी संस्कृति की उत्कृष्टता को दुनिया के कोने कोने में पहुँचाया जाना चाहिये ।
श्री तेकाम ने कहा कि सांसद जी अपने ही समाज के आदिवासियो भाइयो और बहनो को पारंपरिक वेशभूषा मे अतिथियो के सामने डांस कराते है आदिवासीयो मसीहा बने हुये है आदिवासियो के सामने छाती चौड़ी करते है वही अतिथियों के इंतजार मे नृत्य करने वाले बच्चे पुरुष महिलाए परेशान हो जाते है जो ठीक नहीं है । आदिवासी समाज की चिंता करते हुये आदिवासी सामज के लिये रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जिले के विकास के लिये यदि ईमानदारी से चिंता की गयी होती तो यहाँ रेल के लिये आंदोलन नहीं करना पड़ता बल्कि यहाँ से हवाई जहाज उड़ते ।

Dainikyashonnati

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