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मध्यप्रदेश के 18 जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट, सिवनी-बालाघाट समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ वर्षा के आसार

पूर्वी मध्यप्रदेश में सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र; सिवनी, छिंदवाड़ा, मंडला, बालाघाट और पांढुर्ना में भारी बारिश की संभावना, 30 से 40 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान

मध्यप्रदेश में भारी बारिश – 18 जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट, सिवनी-बालाघाट समेत इन जिलों में तेज बारिश के आसार

भोपाल 22 अगस्त 2026

भोपाल यशो:- मध्यप्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। पूर्वी मध्यप्रदेश और उसके आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से प्रदेश के कई जिलों में बारिश का दौर जारी है। मौसम केंद्र भोपाल ने रायसेन, नर्मदापुरम, दतिया, भिंड, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और पांढुर्ना जिलों में कहीं-कहीं भारी वर्षा की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग के अनुसार इन जिलों में भारी बारिश के साथ झंझावात, वज्रपात और 30 से 40 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं। ऐसे में लोगों को खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

सिवनी, छिंदवाड़ा और बालाघाट में भी बारिश के आसार

पूर्वी मध्यप्रदेश में सक्रिय मौसम प्रणाली का असर सिवनी, छिंदवाड़ा, मंडला, बालाघाट और पांढुर्ना सहित आसपास के जिलों में दिखाई देने की संभावना है। मौसम केंद्र ने इन क्षेत्रों में कहीं-कहीं भारी वर्षा के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी दी है।

इसके अलावा रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, दतिया, भिंड, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर और पांढुर्ना जिलों में अनेक स्थानों पर वर्षा अथवा गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का पूर्वानुमान है।

24 घंटे में दमोह-जबलपुर में अति भारी बारिश

पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। नर्मदापुरम, रीवा, जबलपुर, शहडोल और सागर संभागों के जिलों में अधिकांश स्थानों पर बारिश हुई। भोपाल, ग्वालियर और चंबल संभागों में अनेक स्थानों पर तथा इंदौर और उज्जैन संभागों में कहीं-कहीं वर्षा दर्ज की गई।

इस दौरान दमोह और जबलपुर जिलों में अति भारी वर्षा, जबकि पन्ना, मंडला, रीवा, मऊगंज और दतिया जिलों में भारी वर्षा दर्ज की गई।

पूर्वी मध्यप्रदेश के दमोह जिले के तेंदूखेड़ा में सर्वाधिक 130.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। पश्चिमी मध्यप्रदेश में दतिया में सर्वाधिक 69.2 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड हुई।

प्रदेश में सामान्य से 11 प्रतिशत कम बारिश

मौसम के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 22 अगस्त 2026 तक मध्यप्रदेश में दीर्घावधि औसत की तुलना में 11 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। पूर्वी मध्यप्रदेश में औसत से 9 प्रतिशत कम और पश्चिमी मध्यप्रदेश में 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

मानसून सीजन के दौरान बारिश की कमी के बावजूद पिछले कुछ दिनों में सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में तेज बारिश का दौर देखने को मिल रहा है।

कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय, अगले 24 घंटे महत्वपूर्ण

मौसम केंद्र के अनुसार 22 अगस्त की सुबह 8:30 बजे पूर्वी मध्यप्रदेश और आसपास के क्षेत्र में बना कम दबाव का क्षेत्र उसी क्षेत्र में सक्रिय रहा। इससे संबंधित चक्रवाती परिसंचरण औसत समुद्र तल से करीब 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है।

मानसून ट्रफ अमृतसर, नजीबाबाद, हरदोई, उत्तर-पूर्वी मध्यप्रदेश और आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र के केंद्र से होते हुए जमशेदपुर, दीघा और वहां से दक्षिण-पूर्व दिशा में उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी तक सक्रिय है।

मौसम प्रणाली के प्रभाव से अगले 24 घंटों के दौरान इसी क्षेत्र में एक और कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना जताई गई है। इसके चलते मध्यप्रदेश के पूर्वी और मध्य हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं।

इन जिलों में भी बारिश की संभावना

मौसम केंद्र के अनुसार हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, आलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन और देवास में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है।

वहीं भोपाल, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, शाजापुर, आगर, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, मुरैना और श्योपुरकलां में कुछ स्थानों पर वर्षा होने की संभावना है।

प्रदेश के अन्य कई जिलों में भी अनेक स्थानों पर बारिश अथवा गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है।

वज्रपात और तेज हवाओं को लेकर सावधानी जरूरी

भारी बारिश के साथ वज्रपात और तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। आंधी-तूफान के दौरान खुले मैदान, पेड़, बिजली के खंभों और कमजोर संरचनाओं के पास खड़े होने से बचना चाहिए। किसानों और ग्रामीणों को भी मौसम की स्थिति को देखते हुए आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

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