राष्ट्रीय शिक्षा नीति से नैतिक मूल्यों से जुड़ रहे युवा : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
भोपाल में 'उभरते ज्ञान क्षेत्र, उन्नत पाठ्यक्रम' कार्यशाला, उच्च शिक्षा विभाग ने IIT सहित 30 संस्थानों से किए एमओयू
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से नैतिक मूल्यों से जुड़ रहे युवा, IIT सहित 30 संस्थानों से एमओयू
Bhopal 04 August 2026
भोपाल यशो :- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से देश और प्रदेश के युवा नैतिक मूल्यों से जुड़ रहे हैं। नई शिक्षा नीति युवाओं को समय की मांग के अनुरूप शिक्षित, कुशल और रोजगारोन्मुख बनाकर विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री मंगलवार को भोपाल स्थित प्रशासन अकादमी में आयोजित “उभरते ज्ञान क्षेत्र, उन्नत पाठ्यक्रम : दृष्टि, दिशा एवं क्रियान्वयन” विषयक कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन, भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा तथा शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं शिक्षाविद मौजूद रहे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर मंथन
कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों को आधुनिक, बहुविषयक, प्रौद्योगिकी-सक्षम और रोजगारोन्मुख बनाना था। विभिन्न तकनीकी, शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञों ने उभरते ज्ञान क्षेत्रों और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित करने पर अपने विचार रखे।
देश और प्रदेश को मजबूत बनाएंगे युवा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने इसके विभिन्न आयामों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया है। उन्होंने विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति युवाओं को ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों और कौशल से जोड़ रही है। इससे वे आत्मनिर्भर बनकर देश और प्रदेश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
संस्कार और रोजगार आधारित शिक्षा पर जोर
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण और संस्कार आधारित शिक्षा ही विकसित भारत की मजबूत नींव है। उन्होंने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से स्थानीय उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप रोजगारपरक एवं कौशल आधारित पाठ्यक्रम विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों के बेहतर प्लेसमेंट और उद्योगों से समन्वय बढ़ाने पर भी बल दिया।
भारतीय ज्ञान परंपरा को मिलेगा बढ़ावा
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। राज्य सरकार ने भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रमों में शामिल करने का निर्णय लिया है। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ कौशल, रोजगार और नवाचार से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला से प्राप्त सुझाव भविष्य के बेहतर पाठ्यक्रम तैयार करने में सहायक होंगे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी
उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने कहा कि मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में हजारों सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति कर महाविद्यालयों में फैकल्टी की कमी दूर की गई है तथा संकाय विकास के लिए लगातार कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।
IIT सहित 30 संस्थानों से हुए एमओयू
कार्यक्रम में उच्च शिक्षा विभाग ने आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी मद्रास, आईआईटी गुवाहाटी, आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी, आईआईटी रुड़की, आईआईटी खड़गपुर और आईआईटी इंदौर सहित देश के 30 प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए एमओयू किए। इन साझेदारियों के माध्यम से डिजिटल कौशल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, फोरेंसिक विज्ञान, साइबर सुरक्षा, सुशासन, कृषि, वैज्ञानिक अनुसंधान और रोजगारोन्मुख शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा।
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