बरघाट-लामटा क्षेत्र में रेस्क्यू किए गए नर बाघ PN-103 का स्वास्थ्य परीक्षण करते वन विभाग और पशु चिकित्सकों की टीम
80 AI कैमरे, डीएनए जांच और 60 सदस्यीय टीम की मदद से मिला सफलता का बड़ा परिणाम, सुरक्षित वन विहार भोपाल भेजा गया बाघ
बरघाट-लामटा बाघ रेस्क्यू – नर बाघ PN-103 का सफल रेस्क्यू, AI कैमरों और डीएनए तकनीक से मिली सफलता
Seoni 03 August 2026
सिवनी यशो:-बरघाट-लामटा क्षेत्र के गांवों के आसपास लगातार विचरण कर रहे नर बाघ PN-103 का वन विभाग ने अत्याधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक रणनीति के सहारे सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया है।
लगभग दो माह तक चले इस चुनौतीपूर्ण अभियान में 80 अत्याधुनिक AI कैमरों, डीएनए सैंपलिंग, तीन प्रशिक्षित हाथियों और 60 सदस्यीय वन अमले की मदद से लक्ष्य बाघ की पहचान कर उसे सुरक्षित बेहोश किया गया।

इसके बाद स्वास्थ्य परीक्षण कर मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक की अनुमति से उसे सुरक्षित रूप से वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल स्थानांतरित कर दिया गया।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक के निर्देशन में चला संयुक्त अभियान
यह अभियान प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक मध्यप्रदेश डॉ. समीता राजोरा के सतत मार्गदर्शन में संचालित किया गया।
अभियान में पेंच टाइगर रिजर्व का रेस्क्यू दल, बरघाट परियोजना, लामटा परियोजना, दक्षिण बालाघाट वन मंडल, दक्षिण सिवनी सामान्य वन मंडल एवं सिवनी वन विभाग की संयुक्त टीम शामिल रही।
संपूर्ण अभियान पेंच टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक देवाप्रसाद जे. के पर्यवेक्षण में संचालित हुआ, जबकि समन्वय लामटा परियोजना के डीएम एस. निवेदन एवं मैदानी रणनीति का दायित्व बरघाट परियोजना के डीएम आर.के. सोलंकी ने संभाला।
7 अन्य बाघों के बीच लक्ष्य बाघ की पहचान थी सबसे बड़ी चुनौती
वन विभाग के अनुसार जिस क्षेत्र में PN-103 का मूवमेंट था, वहां सात अन्य बाघों के साथ तेंदुआ, भालू और जंगली कुत्तों (ढोल) की भी सक्रिय मौजूदगी थी। ऐसे में लक्ष्य बाघ की सही पहचान करना बेहद कठिन था।
इसके लिए वन विभाग ने लगभग 80 AI कैमरे रणनीतिक स्थानों पर लगाए और विभिन्न घटनास्थलों से डीएनए नमूने एकत्र कर वैज्ञानिक विश्लेषण किया।
इन्हीं प्रमाणों के आधार पर लक्ष्य बाघ की पुष्टि होने पर रेस्क्यू की अनुमति प्राप्त की गई।
दो माह तक चला अभियान, तीन हाथियों की ली गई मदद
करीब 60 वन अधिकारी एवं कर्मचारी लगातार दो माह तक अभियान में जुटे रहे। दुर्गम वन क्षेत्र में सुरक्षित संचालन के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व के दो हाथियों और पेंच टाइगर रिजर्व के एक हाथी का उपयोग किया गया।
240 किलोग्राम वजनी, लगभग 9 वर्ष का है बाघ
रेस्क्यू के दौरान पेंच टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक डॉ. अखिलेश मिश्रा तथा वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट (WCT) के पशु चिकित्सक डॉ. प्रशांत देशमुख ने बाघ को सुरक्षित रूप से बेहोश कर चिकित्सकीय परीक्षण किया।
परीक्षण में बाघ का वजन लगभग 240 किलोग्राम पाया गया तथा उसकी अनुमानित आयु करीब 9 वर्ष आंकी गई। दांत घिसे हुए पाए गए, लेकिन बाघ सामान्य और स्वस्थ अवस्था में मिला।
मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के बीच मिली बड़ी सफलता
वन विभाग के अनुसार पिछले चार माह में क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की कई घटनाओं के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल था।
ऐसी परिस्थितियों में कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए संयुक्त दल ने धैर्य और कुशल रणनीति से अभियान को सफल बनाया।
सभी औपचारिकताएं पूर्ण करने के बाद मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक की अनुमति से बाघ को सुरक्षित रूप से वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल भेज दिया गया।
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