सिवनी 28 मार्च 2023
सिवनी यशो:- सद्गुरु सांसारिक माया मोह की कैद से मुक्ति का उपाय बताते हैं हृदय रूपी समुद्र में अच्छे और बुरे विचारों के मंथन से लक्ष्मी प्रकट होती है।
उक्त आशय के प्रेरक प्रवचन पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री प्रज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज के मुखारविंद से, मंगलवार को श्री शक्ति महायज्ञ के 7 वे दिन, यज्ञ स्थल मठ मंदिर सिवनी की धर्म सभा में प्रवाहित किये गये । विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए स्वामी श्री ने कहा कि ,संसार में जन्म लेकर मनुष्य को लौकिक और अलौकिक धर्म, दोनों का निर्वहन करना पड़ता है । मनुष्य का परम कल्याण मोक्ष की प्राप्ति है। जीवन के रहते परमात्मा का चिंतन करना चाहिए जो शाश्वत है। स्वामी श्री ने कहा कि धर्म के अध्ययन, चिंतन, मनन उचित आचरण से ही आचार्य बनते हैं । धर्म ज्ञान को अपने आचरण व्यवहार में लाते हैं आचार्य। स्वामी जी ने प्रवचन माला को आगे बढ़ाते हुए कहा कि ,मानव जन्म दुर्लभ है, तथा क्षणभंगुर है । संसार में लौकिक और अलौकिक धर्म दोनों का विवेकपूर्ण निर्वहन करने से लोक और परलोक दोनों कल्याणकारी होते हैं।
हृदय रूपी समुद्र में अच्छे और बुरे विचारों के मंथन से सुख ऐश्वर्य रूपी लक्ष्मी प्रकट होती है। लक्ष्मी चंचला होती है, किंतु नारायण के चरणों में जाकर स्थिर रहती है। मंथन से प्राप्त लक्ष्मी को हृदय में विराजमान नारायण से मिलवा देने पर वह स्थिर हो जाती है। स्वामी श्री ने कहा कि सनातन धर्म के मूल मैं विश्व कल्याण की उद्धात भावना है । हमारे पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य महाराजश्री हमेशा सद् संकल्प व्यक्त करते थे। धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो।
स्वामी श्री के प्रवचन के पूर्व प्रवचन भूमिका के रूप में विद्वान आचार्य पं.श्री सनत कुमार उपाध्याय जी तथा ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पं.ओमप्रकाश तिवारी ने-, सनातन धर्म की संस्कृति मैं खानपान आचार विचार तथा शास्त्रोक्त व्रत, उपवास का उल्लेख करते हुए ,यज्ञ के लौकिक पारलौकिक महत्व पर प्रकाश डाला। श्री शक्ति महायज्ञ के प्रधान आचार्य पं.श्री राम बिहारी मिश्र ने आगामी *शेष 2 दिनों के यज्ञ अनुष्ठान कार्य में समस्त श्रद्धालुओं से पुण्य लाभार्जन हेतु सहभागी बनने का आवाहन किया है।





