गिल्ली-डंडा और सोलह श्रृंगार प्रतियोगिता ने खींचा जनसैलाब
स्वदेशी मेला में गूँजा स्वावलंबन का संदेश, “जब भी बाजार जाएंगे, सामान स्वदेशी लाएंगे” - मौसम बिसेन
Balaghat 16 November 2025
बालाघाट यशो :- स्वदेशी जागरण मंच, स्वावलंबी भारत अभियान के आह्वान तथा स्वर्णिम भारत वर्ष फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में नगर के शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय के खेल प्रांगण में 15 से 25 नवंबर तक आयोजित 10 दिवसीय स्वदेशी मेला में रविवार को पारंपरिक खेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने माहौल उत्सवमय कर दिया।
मेला प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से रात्रि 10 बजे तक संचालित हो रहा है।

गिल्ली-डंडा प्रतियोगिता में दिखा ग्रामीण कौशल
रविवार की सुबह से दोपहर तक आयोजित गिल्ली-डंडा प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अपनी खेल दक्षता और स्थानीय खेलों के प्रति उत्साह का दमदार प्रदर्शन किया। दर्शकों ने इस पारंपरिक खेल को नए जोश के साथ जीवंत होते देखा।
महिला सम्मेलन व सोलह श्रृंगार प्रतियोगिता में छटा बिखरी
दोपहर से शाम तक आयोजित महिला सम्मेलन और सोलह श्रृंगार प्रतियोगिता में महिलाओं ने अपने सौंदर्य, सृजनशीलता और कलात्मकता का मनोहारी प्रदर्शन किया।
विजेता प्रतिभागियों को समिति द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
स्वदेशी उत्पाद, संस्कृति और स्थानीय व्यंजनों से महका मेला
मेले में पहुंचे आमजन ने स्वदेशी उत्पादों, स्थानीय व्यंजनों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अनूठे आयोजनों का भरपूर आनंद लिया।
अथाह जनसमुदाय ने वोकल फॉर लोकल की इस प्रेरक पहल की सराहना करते हुए स्वदेशी को अपनाने का संकल्प दोहराया।
मेला संयोजक मौसम बिसेन,
सह-संयोजक सत्यनारायण अग्रवाल,
प्रणव पटेल,
यज्ञेश लालू चावड़ा और
अन्य पदाधिकारियों-कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम को सफल बनाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।
मंच संचालन सुधीर ‘गुड्डू’ चौधरी ने किया।
प्रचार-प्रसार प्रमुख हेमेंद्र क्षीरसागर ने उक्त जानकारी दी।
आज: लोकगायिका कविता वासनिक की ‘अनुरागधारा’
सुबह गिल्ली-डंडा, शाम मनमोहक लोकसंगीत
सोमवार को भी सुबह से दोपहर तक गिल्ली-डंडा प्रतियोगिता का आयोजन होगा
जिसमें प्रतिभागी अपना बेजोड़ प्रदर्शन करेंगे।
शाम को प्रसिद्ध लोकगायिका कविता वासनिक अपनी प्रस्तुति ‘अनुरागधारा’ से रसिकों को मंत्रमुग्ध करेंगी।
बालाघाट स्वदेशी मेला संयोजक मौसम बिसेन ने आमजन से अधिकाधिक संख्या में पहुंचने की अपील की, ताकि
“जब भी बाजार जाएंगे, सामान स्वदेशी लाएंगे” का संकल्प सशक्त हो और स्वावलंबी भारत का लक्ष्य साकार हो।



