“TET अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का उग्र प्रदर्शन: सिवनी में लंबी रैली, राज्यपाल-सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन”
डेढ़ लाख शिक्षकों को राहत देने की मांग, सेवा अवधि प्रथम नियुक्ति से जोड़ने की उठी आवाज
TET विरोध शिक्षक आंदोलन सिवनी
Seoni 08 April 2026
सिवनी यशो:-शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य बनाए जाने के विरोध में जिले के शिक्षकों ने बुधवार को जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया।
अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश के बैनर तले हजारों शिक्षकों ने शहर में लंबी रैली निकालकर अपनी एकजुटता दिखाई और जिला प्रशासन के माध्यम से राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
TET विरोध शिक्षक आंदोलन सिवनी – अनिवार्यता खत्म करने की मांग
ज्ञापन में शिक्षकों ने मांग की कि नॉन-TET शिक्षकों पर TET उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
शिक्षकों का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की अधिसूचना (24 अगस्त 2010) के अनुसार कई श्रेणी के शिक्षकों को TET से छूट प्रदान की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला
शिक्षकों ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय में भी उक्त छूट का स्पष्ट उल्लेख है, इसके बावजूद विभागीय स्तर पर सभी शिक्षकों पर TET अनिवार्य किया जाना न्यायालय की भावना के विपरीत है।
सरकारी आदेश निरस्त करने की मांग
मोर्चा ने—
लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल के 2 मार्च 2026 के आदेश
जनजातीय कार्य विभाग के 26 मार्च 2026 के आदेश
को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
डेढ़ लाख शिक्षकों पर असर का दावा
शिक्षकों का कहना है कि इस फैसले से प्रदेश के करीब 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं, जिन्हें अनावश्यक मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।
सेवा अवधि को लेकर भी बड़ा मुद्दा
प्रदर्शन के दौरान यह भी मांग उठाई गई कि—
✔ शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति दिनांक से की जाए
✔ पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य लाभ सुनिश्चित किए जाएं
संयुक्त मोर्चा ने दिखाई एकजुटता
TET विरोध शिक्षक आंदोलन सिवनी में विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए।
प्रमुख रूप से—
- परमानंद डेहरिया (प्रांतीय संयोजक)
- विजय शुक्ला
- अविनाश पाठक
- गजेंद्र बघेल
- कपिल बघेल
- आशीष बघेल
- श्रवण कुमार डहरवाल
सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
सरकार पर बढ़ा दबाव
TET विरोध शिक्षक आंदोलन सिवनी में हुए इस बड़े प्रदर्शन ने साफ संकेत दे दिया है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो यह आंदोलन प्रदेश स्तर पर और उग्र रूप ले सकता है।




