सिवनी में भूमि विवाद मामला गरमाया, दीवानी वाद के बीच सीमांकन कार्यवाही पर विवाद
दीवानी वाद लंबित, सीमांकन स्थगित करने की मांग
सिवनी भूमि विवाद मामला, दीवानी वाद के बीच सीमांकन पर उठे सवाल
Seoni 18 May 2026
सिवनी यशो:- सिवनी जिले में भूमि विवाद से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें एक पक्ष द्वारा दीवानी वाद लंबित रहने तक सीमांकन कार्यवाही स्थगित रखने की मांग की गई है।
प्रकरण ग्राम सुकवाह, थाना लखनवाड़ा क्षेत्र का है, जहां खसरा नंबर 269/2 की भूमि को लेकर विवाद चल रहा है।
प्रार्थी पक्ष का दावा: कब्जा और फर्जी दस्तावेजों का आरोप
प्रार्थी राजनीता बघेल का कहना है कि उनके पति विजय बघेल का निधन 17 मार्च 2026 को हो गया था, जिसके बाद वह और उनके बच्चे भूमि के वारिस हैं।
प्रार्थी का दावा है कि उक्त भूमि पर उनका ही आधिपत्य है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि पूर्व में सीमांकन के दौरान भी विवाद उत्पन्न हुआ था और राजस्व रिकॉर्ड में त्रुटियां पाई गई हैं।
दीवानी प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन
इस मामले में दीवानी वाद RCS/163/2026 न्यायालय में दर्ज है, जिसकी सुनवाई 15 जून 2026 को व्यवहार न्यायालय कनिष्ठ खंड, सिवनी में निर्धारित है।
प्रार्थी पक्ष का कहना है कि जब तक न्यायालय में निर्णय नहीं हो जाता, तब तक सीमांकन की कार्यवाही रोकी जानी चाहिए।
प्रशासनिक पक्ष का बयान: सीमांकन नियमों के तहत कार्रवाई
इस मामले पर तहसीलदार का कहना है कि सीमांकन हेतु आवेदन प्राप्त हुआ था और पूर्व में भी सीमांकन की प्रक्रिया की गई थी।
तहसीलदार के अनुसार, सीमांकन केवल राजस्व प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य भूमि की वास्तविक स्थिति निर्धारित करना होता है, न कि कब्जा देना।
उन्होंने यह भी बताया कि सीमांकन के दौरान पहले भी विवाद और अभद्रता की स्थिति बनी थी, जिसके बाद पुनः आवेदन प्राप्त हुआ है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दीवानी वाद का निपटारा होने के बाद ही कब्जे से संबंधित विषयों पर आगे की कानूनी प्रक्रिया संभव होगी।
दूसरे पक्ष का पक्ष: आरोपों से इनकार
विवाद में नामजद एक पक्ष रानू साहू ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनका इस भूमि से कोई संबंध नहीं है।
उनका कहना है कि उनकी भूमि अलग है और संबंधित प्रकरण में न्यायालय से उनके पक्ष में पूर्व में निर्णय भी आ चुका है।
यह मामला दीवानी न्यायालय और राजस्व विभाग दोनों स्तरों पर विचाराधीन है। एक ओर प्रार्थी पक्ष न्यायिक निर्णय तक सीमांकन रोकने की मांग कर रहा है, वहीं प्रशासन इसे नियमानुसार राजस्व प्रक्रिया बताते हुए आगे बढ़ाने की स्थिति में है।
फिलहाल, मामला न्यायालयीन प्रक्रिया और प्रशासनिक जांच के बीच संतुलन पर निर्भर करता है।



