2200 करोड़ भुगतान पर उठे सवाल, सिंचाई कॉम्प्लेक्स निर्माण में भारी अनियमितता के आरोप
भारतीय मजदूर संघ ने मुख्यमंत्री से की जांच की मांग, कहा- पहले सत्यापन फिर भुगतान
सिंचाई कॉम्प्लेक्स भुगतान विवाद – “बांध निर्माण शुरू नहीं, फिर भी ठेकेदार को अरबों का भुगतान”
Chhindwara, 14 June 2026
छिंदवाड़ा यशो:- जिले में जल संसाधन विभाग द्वारा बनाए जा रहे बहुप्रतीक्षित सिंचाई कॉम्प्लेक्स परियोजना को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। भारतीय मजदूर संघ ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य की वास्तविक प्रगति नगण्य होने के बावजूद ठेकेदार को अब तक लगभग 2200 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है। संघ ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कर भुगतान और सामग्री का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।
2019 में स्वीकृत हुई थी 5471 करोड़ की परियोजना
जानकारी के अनुसार सिंचाई कॉम्प्लेक्स परियोजना वर्ष 2019 में स्वीकृत हुई थी। लगभग 5471 करोड़ रुपये लागत वाली इस परियोजना से करीब 2 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित किया जाना प्रस्तावित है। परियोजना की पूर्णता अवधि 84 माह निर्धारित की गई थी, लेकिन सात वर्ष बीतने के बाद भी निर्माण कार्य की स्थिति बेहद धीमी बताई जा रही है।
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“बांध निर्माण शुरू ही नहीं हुआ”
भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि परियोजना का मुख्य कार्य यानी बांध निर्माण अभी तक शुरू ही नहीं हुआ है। इसके बावजूद जल संसाधन विभाग द्वारा ठेकेदार को भारी भुगतान किया जा चुका है।
संघ के अनुसार विभाग रिकॉर्ड में पाइप और अन्य निर्माण सामग्री के नाम पर भुगतान दिखा रहा है, जबकि निर्माण स्थल पर उस अनुपात में सामग्री दिखाई नहीं दे रही।
मुख्यमंत्री से शिकायत, सत्यापन की मांग
भारतीय मजदूर संघ के अध्यक्ष प्रदीप पटेल ने मुख्यमंत्री Mohan Yadav को शिकायत भेजकर मांग की है कि अब तक हुए 2200 करोड़ रुपये के भुगतान का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए।
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उन्होंने आरोप लगाया कि यदि वास्तविक जांच हो जाए तो भुगतान और निर्माण कार्य के बीच बड़ा अंतर सामने आ सकता है।
विभागीय अधिकारियों पर भी उठे सवाल
शिकायत में जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। संघ ने आरोप लगाया कि विभाग में लंबे समय से पदस्थ अधिकारियों द्वारा ठेकेदार को एडवांस भुगतान दिए जा रहे हैं।
विशेष रूप से प्रभारी अधीक्षण यंत्री एवं प्रभारी कार्यपालन यंत्री के रूप में कार्यरत श्रीमती कुमकुम पटेल का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया कि उनका मूल पद सहायक यंत्री का है, लेकिन वे उच्च प्रभार संभाल रही हैं।
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“दबाव में काम कर रहे अधिकारी”
समाचार में यह भी आरोप लगाया गया कि भुगतान संबंधी मामलों में अधिकारियों पर दबाव बनाया जाता है। कुछ अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि सामग्री पूरी तरह उपलब्ध न होने के बावजूद भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।
संघ ने आशंका जताई कि लगातार दबाव की स्थिति में अधिकारी मानसिक तनाव का शिकार हो सकते हैं। उल्लेख किया गया कि विभाग में पूर्व में दो प्रभारी कार्यपालन यंत्री निलंबित भी हो चुके हैं।
प्रमोशन अटका, प्रभारी व्यवस्था पर सवाल
जल संसाधन विभाग में वर्षों से नियमित प्रमोशन नहीं होने को लेकर भी सवाल उठे। बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के कारण अधिकारियों के पदोन्नति आदेश अटके हुए हैं, जिसके चलते प्रभारी व्यवस्था के सहारे विभाग संचालित हो रहा है।
संघ ने मांग की कि शासन इस विषय पर भी गंभीर पहल करे ताकि अधिकारियों को नियमित पदस्थापना और प्रशासनिक स्थिरता मिल सके।


