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अधिकारियों पर आदिवासी की करोड़ों की जमीन 6 लाख में हड़पने के आरोप

एसडीएम, तहसीलदार और बीएमओ के परिजनों पर लगे गंभीर आरोप, जांच शुरू

कामिनी ठाकुर जमीन विवाद – आदिवासी जमीन खरीद मामले में पूर्व एसडीएम कामिनी ठाकुर का तबादला, जनजातीय आयोग ने मांगी रिपोर्ट

Chhindwara 16 June 2026
छिंदवाड़ा यशो:-  जिले के तामिया क्षेत्र में स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की आदिवासी भूमि की खरीद-फरोख्त को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। शिकायत के आधार पर आरोप लगाया गया है कि राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारियों की मिलीभगत से भारिया जनजाति के एक परिवार की लगभग 11 एकड़ भूमि मात्र 6 लाख रुपये में खरीद ली गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर हरेन्द्र नारायण ने जांच के आदेश जारी किए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार तामिया के प्रमुख पर्यटन स्थल चौरा पठार एवं पातालकोट व्यू पॉइंट के समीप सड़क किनारे स्थित इस भूमि की वास्तविक बाजार कीमत लगभग 6.60 करोड़ रुपये बताई जा रही है। आरोप है कि यह भूमि तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार उमराव वारले की पत्नी प्रियंका वारले, बीएमओ डॉ. जितेंद्र शाह तथा तत्कालीन जुन्नारदेव एसडीएम कामिनी ठाकुर के पिता दिलीप सिंह के नाम पर खरीदी गई है।

22 एकड़ पुश्तैनी भूमि को लेकर वर्षों से चल रहा था विवाद

जानकारी के अनुसार भारिया जनजाति परिवार की लगभग 22 एकड़ पुश्तैनी भूमि है। परिवार के मुखिया नान्हों भारती के निधन के बाद उनकी पुत्रियों विप्पा भारती और सिमिना बाई के बीच भूमि के सीमांकन एवं बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। बाद में दोनों के निधन के बाद वारिसों की संख्या बढ़ने से विवाद और जटिल हो गया।

इसी दौरान सिमिना बाई के पुत्र रामदास भारती द्वारा 11 एकड़ भूमि की रजिस्ट्री कराए जाने का मामला सामने आया।

ई-केवाईसी के नाम पर हस्ताक्षर लेने के आरोप

पीड़ित परिवार के सदस्य बिसनलाल भारती ने आरोप लगाया है कि पिछले वर्ष तत्कालीन एसडीएम उनके घर भूमि खरीदने का प्रस्ताव लेकर पहुंची थीं। परिवार द्वारा जमीन बेचने से इनकार करने के बाद कथित रूप से ई-केवाईसी और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर कोरे कागजों पर अंगूठे और हस्ताक्षर लिए गए।

परिवार का आरोप है कि बाद में इन्हीं दस्तावेजों का उपयोग कर भूमि का बंटवारा और नामांतरण कराया गया। शिकायत के अनुसार 2 मई 2025 को नामांतरण का आवेदन प्रस्तुत हुआ, 30 मई को नामांतरण हुआ और 2 जुलाई 2025 को रजिस्ट्री संपन्न कर दी गई।

बाजार मूल्य करोड़ों में, सौदा मात्र 6 लाख में होने का दावा

स्थानीय सूत्रों के अनुसार संबंधित भूमि का बाजार मूल्य लगभग 60 लाख रुपये प्रति एकड़ तथा शासकीय गाइडलाइन मूल्य करीब 27 लाख रुपये प्रति एकड़ है। इस आधार पर 11 एकड़ भूमि की अनुमानित कीमत लगभग 6.60 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। आरोप है कि इतनी मूल्यवान भूमि का सौदा मात्र 6 लाख रुपये (3 लाख रुपये चेक एवं 3 लाख रुपये नकद) में किया गया।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी मांगी रिपोर्ट

मामले के सार्वजनिक होने के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी संज्ञान लिया है। आयोग ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव, छिंदवाड़ा कलेक्टर तथा संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर 30 दिनों के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

जांच रिपोर्ट का इंतजार

मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। जिला प्रशासन द्वारा जांच शुरू कर दी गई है और अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट तथा आगामी प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

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