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बिजली विभाग में मौत का खेल! मजदूरों की जिंदगी दांव पर लगाकर कराया अवैध लाइन खेल

चालू लाइन में रातों-रात फर्जी शिफ्टिंग, अफसर-ठेकेदार गठजोड़ पर बवाल

“ऊर्जा मंत्री, न्यायालय और नियम-कानून से ऊपर चल रहा विभाग?” — जिलेभर में बढ़ा आक्रोश

सिवनी बिजली विभाग फर्जीवाड़ा! चालू लाइन में कराया गया खतरनाक काम

Seoni 15 June 2026
सिवनी यशो:- मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड (एमपीईबी) सिवनी की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। जिले में विद्युत लाइन शिफ्टिंग और विस्तार कार्यों में भारी अनियमितताओं, नियमों की खुलेआम अनदेखी और विभागीय संरक्षण में चल रहे कथित फर्जीवाड़े को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

आरोप इतने गंभीर हैं कि मामला केवल विभागीय लापरवाही तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर, सुरक्षा मानकों की हत्या और मानव जीवन को खतरे में डालने जैसे आपराधिक पहलुओं तक पहुंच गया है।

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जानकारी के अनुसार एक विद्युत लाइन को पहले नियम विरुद्ध तरीके से नई जगह पर डाला गया। जब विभागीय कर्मचारियों और क्षेत्रीय लाइनमैन स्तर से इस कार्य पर आपत्ति दर्ज हुई तो मामला दबाने के लिए रातों-रात नया खेल शुरू हुआ। आरोप है कि भारी संख्या में मजदूरों को बुलाकर चालू विद्युत लाइन के बीच ही पुरानी लाइन को दोबारा शिफ्ट किया गया।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह पूरा काम बिना शटडाउन परमिट और सुरक्षा स्वीकृति के कराया गया? यदि हां, तो यह सीधे तौर पर मजदूरों की जान से खिलवाड़ और बड़ा आपराधिक कृत्य माना जा रहा है।

“अगर सप्लाई चालू हो जाती तो कई लाशें बिछ सकती थीं”

स्थानीय सूत्रों और विभागीय कर्मचारियों के अनुसार जिस प्रकार रात में जल्दबाजी में लाइन शिफ्टिंग का काम कराया गया, उससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता था। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कार्य के दौरान अचानक विद्युत सप्लाई चालू हो जाती तो कई मजदूर करंट की चपेट में आ सकते थे।

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बताया जा रहा है कि पूरे मामले की शिकायत विभागीय स्तर पर भी की गई है और एफआईआर दर्ज कराने की मांग लगातार तेज हो रही है। आरोप है कि विभागीय उच्च अधिकारी प्रभावशाली ठेकेदार को बचाने में जुटे हैं, जबकि विद्युत सुरक्षा विभाग भी मूकदर्शक बना हुआ है।

बिना इस्टीमेट के कैसे जारी हो गई प्रोजेक्ट आईडी?

मामले का सबसे सनसनीखेज पहलू विभागीय रिकॉर्ड से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि संबंधित कार्य का कोई वैध इस्टीमेट या प्राक्कलन तैयार ही नहीं किया गया था। इसके बावजूद विभागीय सिस्टम में प्रोजेक्ट आईडी 5316365 और प्रोजेक्ट नंबर 991058 दर्ज पाए गए।

अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि अधिकृत इस्टीमेट ही मौजूद नहीं था तो प्रोजेक्ट आईडी किसके लॉगिन से और किस आधार पर जारी हुई? क्या सरकारी सिस्टम में फर्जी एंट्री की गई? क्या अधिकारियों की मिलीभगत से दस्तावेज तैयार किए गए?

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तकनीकी जानकारों का कहना है कि बिना स्वीकृत प्रक्रिया के सरकारी सिस्टम में प्रोजेक्ट एंट्री होना गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अपराध की श्रेणी में आता है।

“सिवनी में फर्जी ठेकेदारों का नेटवर्क सक्रिय?”

सूत्रों का दावा है कि जिले में विद्युत विभाग के अधिकांश बड़े कार्य कथित रूप से फर्जी अथवा अपात्र ठेकेदारों से कराए जा रहे हैं। आरोप है कि विभाग में “सेटिंग सिस्टम” इतना मजबूत हो चुका है कि नियम-कानून केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं।

जानकारों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों के संरक्षण में ऐसे ठेकेदारों को काम दिए जा रहे हैं जिनकी तकनीकी पात्रता और वैधानिक अनुमति तक संदेह के घेरे में है। यही कारण है कि गुणवत्ता, सुरक्षा और नियमों की अनदेखी लगातार बढ़ती जा रही है।

“ऊर्जा मंत्री, न्यायालय और नियमों से ऊपर चल रहा विभाग?”

जिलेभर में अब यह चर्चा आम हो गई है कि सिवनी विद्युत विभाग में नियम-कानूनों का कोई महत्व नहीं रह गया है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि विभागीय अधिकारी स्वयं को शासन, ऊर्जा मंत्री, न्यायालय और विभागीय मैनुअल से भी ऊपर मानकर काम कर रहे हैं।

विभाग की कार्यशैली को लेकर कर्मचारियों, उपभोक्ताओं और आम नागरिकों में भारी असंतोष देखा जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि यदि विभाग अनजान था तो रात में विद्युत लाइन बदलने का आदेश किसने दिया? यदि विभाग को जानकारी थी तो सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं कराया गया?

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2023 के पुराने मामलों की भी खुल सकती है परत

सूत्रों के अनुसार वर्ष 2023 में भी इसी तरह की तकनीकी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले सामने आए थे। अब उन मामलों से जुड़े दस्तावेज भी सामने लाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्रमाणित दस्तावेज सिवनी से लेकर जबलपुर और भोपाल तक ऊर्जा विभाग एवं विजिलेंस अधिकारियों को भेजे जा रहे हैं।

यदि निष्पक्ष जांच हुई तो कई बड़े अधिकारी, ठेकेदार और विभागीय चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।

अब निगाहें प्रशासन और ऊर्जा विभाग पर

पूरा मामला सामने आने के बाद अब लोगों की नजर जिला प्रशासन, ऊर्जा विभाग और विजिलेंस जांच एजेंसियों पर टिकी हुई है। सवाल यह है कि क्या मामले में केवल खानापूर्ति जांच होगी या वास्तव में जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाएगा।

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फिलहाल विभाग की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन उपलब्ध दस्तावेज और आरोप आने वाले दिनों में सिवनी बिजली विभाग में बड़े खुलासों की ओर संकेत कर रहे हैं।

नोट: यह समाचार शिकायतों, उपलब्ध दस्तावेजों, विभागीय सूत्रों और स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। मामले में अंतिम सत्यापन संबंधित विभागीय जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

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