खाद माफियाओं के आगे बेबस दिखा तंत्र! कार्रवाई रोकने ट्रैक्टर अड़ाया, ट्रक लेकर भागा चालक
250 से अधिक बोरी खाद जब्त, विभागीय कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
सिवनी यशो:- जिले का केवलारी विधानसभा क्षेत्र कृषि उत्पादन के मामले में “मिनी पंजाब” के नाम से जाना जाता है। यहां खरीफ सीजन में खाद की भारी मांग रहती है और यही मांग अवैध कारोबारियों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बन जाती है। मंगलवार को पलारी तिगड्डा और चीचबंद क्षेत्र में हुई कार्रवाई ने न केवल अवैध खाद कारोबार की परतें खोल दीं, बल्कि कृषि विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कृषि विभाग को सूचना मिली थी कि ट्रक क्रमांक एमपी-28 एच-1409 से एनपीके (12:32:06) खाद की बड़ी खेप पलारी तिगड्डा क्षेत्र में लाकर अवैध रूप से बेची जा रही है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कृषि विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
कार्रवाई रोकने रचा गया पूरा खेल
सूत्रों के अनुसार विभागीय टीम जब मौके पर पहुंची तो जानकारी मिली कि खाद श्रीराधा कृषि केंद्र के नाम पर लाई गई थी। टीम संबंधित दुकान तक पहुंची, लेकिन उससे पहले ही दुकान संचालक ताला लगाकर गायब हो चुका था।
बताया जाता है कि अधिकारियों ने ट्रक की चाबी निकालकर अपने कब्जे में ले ली थी। इसके बावजूद जब टीम आगे की कार्रवाई कर रही थी, तब ट्रक के सामने एक ट्रैक्टर खड़ा कर दिया गया, जिससे विभागीय अमले को ट्रक तक पहुंचने में बाधा उत्पन्न हो।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। चाबी निकाले जाने के बावजूद चालक किसी अन्य तकनीकी उपाय से ट्रक स्टार्ट कर मौके से फरार हो गया। इस घटना ने प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
आधी खाद पलारी, आधी चीचबंद में उतारने की चर्चा
क्षेत्रीय सूत्रों का दावा है कि ट्रक से खाद की खेप विभिन्न स्थानों पर उतारी गई। जांच के दौरान कृषि विभाग को जानकारी मिली कि झगरा बर्राटोला निवासी बब्लू ठाकुर के मकान में 46 बोरी तथा चीचबंद निवासी बाली यादव के मकान में लगभग 150 बोरी खाद रखी गई थी।
इसके अतिरिक्त एक ट्रैक्टर में रखी करीब 45 बोरी खाद भी बरामद की गई। कुल मिलाकर लगभग 250 से अधिक बोरी खाद जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।
दिनभर भागदौड़, रात तक स्पष्ट जानकारी नहीं
कार्रवाई के बाद पूरे दिन विभागीय अमला क्षेत्र में सक्रिय दिखाई दिया, लेकिन देर रात तक अधिकारी यह स्पष्ट नहीं कर सके कि आखिर ट्रक कहां है, उसमें कितनी खाद थी और कितनी मात्रा में खाद जब्त की गई है।
जब क्षेत्रीय अधिकारियों से चर्चा की गई तो उन्होंने केवल पलारी तिगड्डा में कार्रवाई की पुष्टि की। वहीं पुलिस चौकी स्तर पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं थी। संबंधित चौकी प्रभारी ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा एक ट्रैक्टर जब्त किया गया है, लेकिन आगे की कार्रवाई के लिए विभागीय अधिकारियों का इंतजार किया जा रहा है।
क्या नकली डीएपी का भी खेल?
डीएपी की कमी, महंगी एनपीके से बढ़ी किसानों की चिंता
खरीफ सीजन के दौरान जिले की अधिकांश सहकारी समितियों में किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसके स्थान पर किसानों को एनपीके खाद उपलब्ध कराई जा रही है, जिसकी कीमत डीएपी की तुलना में अधिक बताई जा रही है। इससे किसानों की खेती लागत बढ़ने की आशंका है।
इसी बीच केवलारी क्षेत्र में बड़ी मात्रा में खाद की अवैध सप्लाई की खबरों ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। किसानों का कहना है कि जब वैध वितरण व्यवस्था के माध्यम से डीएपी उपलब्ध नहीं हो रही, तब निजी स्तर पर बड़ी मात्रा में खाद कहां से आ रही है, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
ग्रामीणों का मानना है कि कृषि विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि अवैध रूप से परिवहन और भंडारित की जा रही खाद प्रमाणित एवं मानक गुणवत्ता की है या नहीं। किसानों के हित में आवश्यक है कि जब्त खाद के नमूनों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बाजार में कहीं किसानों को अधिक कीमत पर घटिया या अमानक खाद तो नहीं बेची जा रही है।
सांठगांठ के बिना संभव नहीं इतना बड़ा कारोबार?
क्षेत्र में चर्चा है कि पलारी-केवलारी क्षेत्र में लंबे समय से खाद की बड़ी मात्रा में सप्लाई की जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सब संबंधित विभागों की जानकारी के बिना संभव है? यदि नहीं, तो आखिर जिम्मेदार कौन है?
किसानों का कहना है कि यदि समय रहते इस नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो न केवल किसानों का आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि कृषि व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न खड़े होंगे।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
कृषि विभाग ने जब्त खाद के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या खुलासा होता है और अवैध कारोबार से जुड़े वास्तविक जिम्मेदारों तक कार्रवाई पहुंचती है या नहीं।
(नोट: यह समाचार कृषि विभाग, स्थानीय सूत्रों एवं क्षेत्रीय स्तर पर प्राप्त जानकारी पर आधारित है। जांच पूरी होने के बाद तथ्य एवं जिम्मेदार पक्षों की स्थिति स्पष्ट होगी।)



