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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण किया। 21 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य, पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन का दिया संदेश।

एक पेड़ मां के नाम अभियान: इंदौर से हरियाली महाअभियान की शुरुआत

भोपाल/इंदौर यशो :- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को इंदौर स्थित बीएसएफ परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण कर प्रदेशव्यापी हरियाली महाअभियान का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर बीएसएफ की ओर से मुख्यमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रही पृथ्वी संस्था तथा बीएसएफ के जवानों के लिए दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की।

इंदौर के बीएसएफ परिसर में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधरोपण करते मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के बीएसएफ परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “पर्यावरण संरक्षण के लिए हमसे जो भी संभव होगा, वह हर प्रयास किया जाएगा।” उन्होंने सभी नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

इंदौर से शुरू हुआ हरियाली का महाअभियान

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत इंदौर में 21 लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया गया है। अभियान के पहले दिन बीएसएफ परिसर में 51 हजार पौधों का रोपण किया गया, जबकि पूरे इंदौर में एक लाख पौधे लगाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि स्वच्छता के क्षेत्र में देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुका इंदौर अब पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

मां अहिल्याबाई की विरासत का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मां अहिल्याबाई होल्कर ने सनातन संस्कृति को जीवंत रखते हुए प्रकृति संरक्षण को बढ़ावा दिया। उनके शासनकाल में बड़ी संख्या में बावड़ियों और जल संरचनाओं का निर्माण कराया गया, जो आज भी जल संरक्षण की प्रेरणा देती हैं।

इंदौर के बीएसएफ परिसर में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधरोपण करते मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के बीएसएफ परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

जल संरक्षण पर सरकार का विशेष फोकस

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार ने जल संरक्षण के लिए व्यापक अभियान चलाया है। उन्होंने कहा कि तीन महीने तक विशेष जल संरक्षण अभियान संचालित किया गया, जिसके अंतर्गत करीब 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से तीन लाख से अधिक कार्य पूरे किए गए।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। जनापाव की पहाड़ियों से निकलने वाली क्षिप्रा, गंभीर और चंबल जैसी नदियां प्रदेश की जीवनरेखा हैं और इनके संरक्षण के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है।

पेड़ ही पर्यावरण संकट का सबसे बड़ा समाधान

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज दुनिया अलनीनो जैसे जलवायु संकटों का सामना कर रही है। ऐसे समय में वृक्ष ही पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि वृक्ष ऋषि-मुनियों की तरह तपस्या करते हैं और मानव जीवन को प्राणवायु प्रदान करते हैं, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को पौधरोपण कर उसके संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए।

देश की सुरक्षा और पर्यावरण दोनों पर जोर

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश विकास, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण तीनों क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।

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