मध्यप्रदेशसिवनी

100 साल पुराने आशियाने पर ‘रास्ता मद’ का विवाद, मजदूर परिवार पीएम आवास योजना से वंचित

चार पीढ़ियों से आबादी भूमि पर रह रहा परिवार, जनसुनवाई में लगाई न्याय की गुहार; नगर परिषद के सर्वे पर उठाए सवाल

छपारा पीएम आवास योजना से वंचित मजदूर परिवार, जनसुनवाई में लगाई न्याय की गुहार

Seoni, 28 July 2026
सिवनी / छपारा यशो:-  प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान का सपना देख रहे छपारा नगर के एक गरीब मजदूर परिवार को प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण निराशा का सामना करना पड़ रहा है। नगर परिषद द्वारा भूमि को “रास्ता मद” बताते हुए आवेदन निरस्त किए जाने के बाद पीड़ित परिवार ने जनसुनवाई में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है।

आजाद वार्ड क्रमांक-09 (कुम्हारी वार्ड) निवासी मोहन कुमार पाटर (46 वर्ष) ने बताया कि उनका परिवार पिछले चार पीढ़ियों से आबादी भूमि पर बने कच्चे खपरैल मकान में निवास कर रहा है। यह मकान लगभग 100 वर्ष पुराना है और उनके पूर्वजों के समय से परिवार इसी स्थान पर रह रहा है।

मोहन कुमार पाटर के अनुसार उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन किया था। प्रारंभिक प्रक्रिया में उनका नाम पात्र हितग्राहियों की सूची में शामिल भी कर लिया गया था, लेकिन बाद में नगर परिषद द्वारा कराए गए सर्वे में उनकी भूमि को “रास्ता मद” दर्ज कर दिया गया, जिसके आधार पर उन्हें योजना के लिए अपात्र घोषित कर दिया गया।

‘जहां रास्ता बताया, वहीं मकान खत्म हो जाता है’

पीड़ित का कहना है कि जिस रास्ते का उल्लेख रिकॉर्ड में किया गया है, वह उनके मकान से शुरू होकर उसी मकान पर समाप्त हो जाता है। ऐसे में इसे सार्वजनिक रास्ता मानने का आधार समझ से परे है। उनका आरोप है कि इस विसंगति के कारण उन्हें शासन की महत्वपूर्ण आवास योजना से वंचित होना पड़ रहा है।

भू-खण्ड धारक प्रमाणपत्र होने के बावजूद नहीं मिला लाभ

मोहन कुमार पाटर ने बताया कि उनके पास तहसीलदार छपारा द्वारा वर्ष 2016-17 में जारी भू-खण्ड धारक प्रमाणपत्र उपलब्ध है। इसके बावजूद नगर परिषद ने यह कहते हुए आवेदन निरस्त कर दिया कि उनके पास भूमि संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, जबकि आवेदन के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज संलग्न किए गए थे।

बरसात में जर्जर मकान बना चिंता का कारण

मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले मोहन कुमार ने बताया कि उनका परिवार आज भी जर्जर कच्चे खपरैल मकान में रहने को मजबूर है। बारिश के मौसम में मकान की हालत और अधिक खराब हो जाती है तथा परिवार की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी रहती है।

जनसुनवाई में निष्पक्ष जांच की मांग

पीड़ित ने जनसुनवाई में आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और पात्रता के आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है।

सैटेलाइट सर्वे पर भी उठे सवाल

मोहन कुमार पाटर का कहना है कि नगर में हाल ही में कराए गए सैटेलाइट सर्वे के बाद कई स्थानों पर नक्शों और वास्तविक स्थिति में 20 से 30 फीट तक का अंतर सामने आया है। उनका दावा है कि इस कारण अन्य पात्र हितग्राही भी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने प्रशासन से सर्वे रिकॉर्ड का पुनः परीक्षण कर वास्तविक पात्र परिवारों को योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की है।

नोट: यह समाचार आवेदक द्वारा लगाए गए आरोपों और जनसुनवाई में प्रस्तुत आवेदन पर आधारित है। संबंधित नगर परिषद अथवा प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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