स्वर सम्राट मोहम्मद रफी की 46वीं पुण्यतिथि पर सजी सुरों की महफिल
मो. रफी मेमोरियल अवॉर्ड ऑर्गेनाइजेशन ने गीतों के माध्यम से महान गायक को किया याद, अतिथियों ने साझा किए विचार
मोहम्मद रफी की 46वीं पुण्यतिथि पर सजी सुरों की महफिल, गीतों से किया याद
Chhindwara 31 July 2026
छिंदवाड़ा यशो:- सांस्कृतिक संस्था मो. रफी मेमोरियल अवॉर्ड ऑर्गेनाइजेशन द्वारा स्वर सम्राट मोहम्मद रफी साहब की 46वीं पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महान गायक द्वारा गाए गए सदाबहार गीतों की महफिल सजाई गई। कार्यक्रम में संगीत प्रेमियों और संस्था से जुड़े पदाधिकारियों ने मोहम्मद रफी के व्यक्तित्व एवं संगीत जगत में उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में आई.पी.एस. कॉलेज के संरक्षक श्री नरेंद्र पाल, संगीत मर्मज्ञ एवं कार्यक्रम अध्यक्ष राजेश विश्वकर्मा तथा विशिष्ट अतिथि डीएसपी रमेश कुमार डोहले ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। अतिथियों ने मोहम्मद रफी के संगीत योगदान को स्मरण करते हुए उनके प्रति श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम के दौरान रफी साहब के लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुतियों ने माहौल को संगीतमय बना दिया।
संगीत प्रेमियों ने उनके सदाबहार गीतों को सुनकर महान गायक की यादों को ताजा किया। रफी साहब की आवाज और गायकी की विशेषताओं पर भी वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।
संगीत शिक्षक राजेश विश्वकर्मा का सम्मान
संस्था के अध्यक्ष स्वरूप कुमार ‘स्वप्निल’ डोहले ने संगीत शिक्षक एवं कार्यक्रम अध्यक्ष राजेश विश्वकर्मा को रूमाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। संस्था के पदाधिकारियों ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का बैच लगाकर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने मोहम्मद रफी के संगीत और उनके व्यक्तित्व से जुड़े संस्मरण एवं विचार साझा किए।
निशाद कुरैशी ने रफी साहब के जीवन पर डाला प्रकाश
कार्यक्रम के दौरान निशाद कुरैशी ने मोहम्मद रफी के जीवन और उनके संगीत सफर पर प्रकाश डाला। उन्होंने रफी साहब की गायकी, उनकी लोकप्रियता और भारतीय संगीत जगत में उनके योगदान को रेखांकित किया।
वक्ताओं ने कहा कि मोहम्मद रफी की आवाज आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में उसी तरह बसी हुई है। उनकी गायकी ने कई पीढ़ियों को प्रभावित किया और भारतीय फिल्म संगीत को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं।
‘रफी और नौशाद ने सीमाओं एवं पीढ़ियों को जोड़ा’
संस्था के अध्यक्ष स्वरूप कुमार ‘स्वप्निल’ ने अपने उद्बोधन में कहा कि संगीतकार नौशाद अली साहब और मोहम्मद रफी साहब ने संगीत के माध्यम से सीमाओं एवं पीढ़ियों को जोड़ने का कार्य किया।
उन्होंने कहा कि दोनों महान कलाकारों ने जाति, धर्म और संप्रदाय से ऊपर उठकर संगीत को नया आयाम दिया। उनके संगीत ने लोगों को जोड़ने और समाज में प्रेम एवं सद्भाव का संदेश देने का काम किया।
सदाबहार गीतों के साथ याद किए गए रफी साहब
कार्यक्रम के दौरान रफी साहब के गीतों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित संगीत प्रेमियों को भाव-विभोर कर दिया। उनके गीतों की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज भी उनकी आवाज नई पीढ़ी के साथ-साथ पुराने संगीत प्रेमियों को भी समान रूप से आकर्षित करती है।
कार्यक्रम का उद्देश्य स्वर सम्राट मोहम्मद रफी के संगीत योगदान को याद करना और नई पीढ़ी को उनके अमूल्य संगीत विरासत से परिचित कराना रहा।
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