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“सावन आया, शिवमय हुआ सिवनी: मठ मंदिर से दिघौरी तक गूंजेगा हर-हर महादेव”

भगवान शिव की नगरी सिवनी में सावन का विशेष महत्व, मठ मंदिर से दिघौरी के विश्व प्रसिद्ध स्फटिक शिवलिंग तक उमड़ेगी श्रद्धा की आस्था

श्रावण का पहला सोमवार: भगवान शिव की नगरी सिवनी में शिव भक्ति का विशेष उत्साह

Seoni 02 August 2026
सिवनी यशो:- भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र माह माने जाने वाले श्रावण मास का पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ रहा है। सावन के सोमवार का सनातन परंपरा में विशेष महत्व माना गया है। इस दिन शिवभक्त भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और विशेष पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

श्रावण मास शुरू होते ही शिवालयों में भक्ति का वातावरण बनने लगा है। मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतारें लगेंगी और हर-हर महादेव, ओम नमः शिवाय के जयघोष से वातावरण शिवमय हो जाएगा।

भगवान शिव की नगरी के रूप में प्रसिद्ध है सिवनी

सिवनी जिले का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व प्राचीन समय से ही रहा है। इसे भगवान शिव की नगरी के रूप में भी जाना जाता है। यह पावन भूमि पूज्य ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज की जन्मभूमि होने के कारण भी विशेष आध्यात्मिक पहचान रखती है।

जिले के प्रमुख शिवालयों में श्रावण मास के दौरान विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और धार्मिक आयोजन होते हैं। शिव भक्त पूरे महीने भगवान भोलेनाथ की आराधना में लीन रहते हैं।

मठ मंदिर शिवपीठ में उमड़ती है आस्था

सिवनी स्थित प्रतिष्ठित शिवपीठ मठ मंदिर का धार्मिक महत्व अत्यंत पुरातन है। श्रावण मास में यहां जिलेभर से श्रद्धालु पहुंचकर भगवान शिव का पूजन-अर्चन करते हैं।

भक्त भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।

दिघौरी में विराजमान है विश्व का सबसे बड़ा स्फटिक शिवलिंग

सिवनी जिले की आध्यात्मिक पहचान में एक और महत्वपूर्ण स्थान है दिघौरी, जहां विश्व का सबसे बड़ा स्फटिक शिवलिंग स्थापित है। यह स्फटिक शिवलिंग पूज्य ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज की जन्मस्थली में उन्हीं की प्रेरणा और प्रतिष्ठा से स्थापित कराया गया है।

श्रावण मास में यहां देश-प्रदेश के अनेक स्थानों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं।

सावन भर मंदिरों में होंगे धार्मिक आयोजन

श्रावण मास में जिले के विभिन्न शिवालयों में धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला चलेगी। कहीं सुंदरकांड पाठ, कहीं रुद्राभिषेक, सहस्रार्चन और विशेष पूजन आयोजित किए जाएंगे।

सावन के प्रत्येक सोमवार को शिव भक्त व्रत और उपवास रखते हैं। अनेक श्रद्धालु पूरे माह संयम, सात्विक जीवन और भगवान शिव की भक्ति में समय व्यतीत करते हैं।

जलाभिषेक और बेलपत्र का है विशेष महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को जलाभिषेक और बेलपत्र अत्यंत प्रिय हैं। सावन सोमवार के दिन श्रद्धालु शिवलिंग पर जल अर्पित कर बेलपत्र चढ़ाते हैं और भगवान भोलेनाथ से परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

श्रावण मास केवल पूजा का नहीं बल्कि आत्मसंयम, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का भी अवसर माना जाता है।

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