पहाड़ की ऊंचाई से भी ऊंचा हौसला, 16,460 फीट पर जतिन ने फहराया तिरंगा
माउंट गोरिचेन क्षेत्र की ग्लेशियर चोटी पर सफल आरोहण, 28 दिवसीय बेसिक माउंटेनियरिंग कोर्स भी किया पूर्ण
16,460 फीट पर जतिन ने फहराया तिरंगा, माउंट गोरिचेन पर सफल आरोहण
Chhindwara 14. September 2026
छिंदवाड़ा यशो:- ऊंचे पहाड़, कठिन ग्लेशियर और चुनौतीपूर्ण मौसम भी जब हौसले के आगे बौने साबित हों, तो सफलता की कहानी मिसाल बन जाती है। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, छिंदवाड़ा के छात्र एवं 24 मध्य प्रदेश बटालियन एनसीसी के अंडर ऑफिसर जतिन बंदेवार ने अरुणाचल प्रदेश में लगभग 16,460 फीट की ऊंचाई पर माउंट गोरिचेन क्षेत्र की ग्लेशियर चोटी का सफल आरोहण कर भारतीय तिरंगा फहराया।
जतिन की इस उपलब्धि से छिंदवाड़ा, उनके महाविद्यालय और 24 मध्य प्रदेश बटालियन एनसीसी का गौरव बढ़ा है। इस उपलब्धि पर एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट डॉ. शेखर ब्रह्मने ने जतिन को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
28 दिन का कठिन प्रशिक्षण, फिर 16,460 फीट की चुनौती
जतिन बंदेवार ने अरुणाचल प्रदेश में 18 अगस्त से 14 सितंबर 2026 तक आयोजित 28 दिवसीय बेसिक माउंटेनियरिंग कोर्स सफलतापूर्वक पूर्ण किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने रॉक, स्नो और ग्लेशियर क्षेत्र में पर्वतारोहण की विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
इसके साथ ही पर्वतारोहण उपकरणों के सुरक्षित उपयोग, पर्वतीय सुरक्षा, टीमवर्क, नेतृत्व, विषम परिस्थितियों में निर्णय लेने तथा शारीरिक एवं मानसिक चुनौतियों से निपटने का प्रशिक्षण भी लिया।
ग्लेशियर चोटी पर लहराया तिरंगा
कोर्स के दौरान जतिन ने करीब 16,460 फीट की ऊंचाई पर स्थित माउंट गोरिचेन क्षेत्र की ग्लेशियर चोटी तक सफलतापूर्वक पहुंचकर वहां भारत का तिरंगा फहराया।
ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्र में बदलते मौसम, कठिन भू-भाग और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच लक्ष्य हासिल करना उनके साहस, शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता, अनुशासन और निरंतर अभ्यास का प्रमाण है।
एनसीसी के अनुशासन ने दिया हौसला
जतिन ने यह पर्वतारोहण अभियान अपने व्यक्तिगत प्रयास और स्वयं के संसाधनों से पूरा किया। 24 मध्य प्रदेश बटालियन एनसीसी के कैडेट एवं अंडर ऑफिसर के रूप में प्राप्त अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और जिम्मेदारी की भावना ने इस चुनौतीपूर्ण अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जतिन की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार और महाविद्यालय का मान बढ़ाया, बल्कि छिंदवाड़ा के युवाओं के सामने भी साहस, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण की प्रेरणादायी मिसाल प्रस्तुत की है।
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