टीईटी परीक्षा 12 अक्टूबर से, शिक्षकों को देना होगा ₹1,000 शुल्क; अनिवार्यता के बाद फीस को लेकर बढ़ी नाराजगी
21 अगस्त से शुरू होंगे आवेदन, 4 सितंबर अंतिम तिथि; 31 अगस्त 2028 तक सेवारत शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य
MP TET 2026: 12 अक्टूबर को होगी शिक्षक पात्रता परीक्षा, ₹1000 शुल्क; 21 अगस्त से आवेदन
सिवनी यशो :- प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में कार्यरत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अब 12 अक्टूबर 2026 से आयोजित की जाएगी। मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने परीक्षा संचालन संबंधी नियम पुस्तिका जारी कर दी है। परीक्षा ऑनलाइन पद्धति से दो पालियों में आयोजित होगी। इसमें शामिल होने के लिए पात्र शिक्षक 21 अगस्त से 4 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के साथ प्रत्येक प्रश्न-पत्र के लिए ₹1,000 परीक्षा शुल्क निर्धारित किया गया है। परीक्षा शुल्क के अलावा आवेदन के माध्यम के अनुसार पोर्टल शुल्क भी देना होगा।
टीईटी की अनिवार्यता को लेकर प्रदेश के शिक्षकों में पहले से ही नाराजगी रही है। शिक्षकों ने पूर्व में विकासखंड स्तर से लेकर राजधानी भोपाल तक विभिन्न माध्यमों से विरोध दर्ज कराया था और सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर सेवारत शिक्षकों को राहत देने का अनुरोध किया था। शिक्षकों का तर्क रहा है कि वर्षों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों के लिए दोबारा पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता उचित नहीं है। हालांकि, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा टीईटी की अनिवार्यता को लेकर फैसला दिया जा चुका है, जिसके बाद निर्धारित समय-सीमा में पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना सेवारत शिक्षकों के लिए अनिवार्य किया गया है।
अब ₹1,000 परीक्षा शुल्क ने बढ़ाई चिंता
टीईटी की अनिवार्यता के बाद अब परीक्षा शुल्क को लेकर भी शिक्षकों में असंतोष देखने को मिल रहा है। परीक्षा में शामिल होने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी को प्रति प्रश्न-पत्र ₹1,000 शुल्क देना होगा। इसके अलावा आवेदन प्रक्रिया के दौरान पोर्टल अथवा कियोस्क शुल्क भी अलग से देय होगा।
शिक्षकों का कहना है कि यदि किसी शिक्षक को परीक्षा में सफलता नहीं मिलती है और उसे दोबारा परीक्षा देनी पड़ती है, तो प्रत्येक प्रयास के लिए उसे फिर से शुल्क जमा करना होगा। इस तरह परीक्षा की अनिवार्यता के साथ आर्थिक भार भी बढ़ेगा। शिक्षकों के अनुसार यदि निर्धारित अवधि में उन्हें एक से अधिक बार परीक्षा में शामिल होना पड़ा तो हर बार ₹1,000 परीक्षा शुल्क देना पड़ेगा।
21 अगस्त से आवेदन, 4 सितंबर अंतिम तिथि
मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा जारी नियम पुस्तिका के अनुसार टीईटी के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 21 अगस्त 2026 से शुरू होगी। आवेदन करने की अंतिम तिथि 4 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। आवेदन पत्र में संशोधन की सुविधा भी 21 अगस्त से उपलब्ध रहेगी। अभ्यर्थी 9 सितंबर 2026 तक अपने आवेदन में आवश्यक संशोधन कर सकेंगे।
कियोस्क के माध्यम से आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को ₹60 पोर्टल शुल्क देना होगा। वहीं रजिस्टर्ड सिटीजन यूजर के माध्यम से स्वयं लॉगिन कर आवेदन करने पर ₹20 पोर्टल शुल्क निर्धारित किया गया है। आवेदन में सुधार के लिए प्रथम चरण में ₹20 और अंतिम चरण में संशोधन करने पर ₹40 शुल्क देना होगा।
12 अक्टूबर से ऑनलाइन परीक्षा
टीईटी परीक्षा 12 अक्टूबर 2026 से ऑनलाइन परीक्षा पद्धति में आयोजित की जाएगी। परीक्षा दो पालियों में होगी। पहली पाली के अभ्यर्थियों के लिए रिपोर्टिंग का समय सुबह 8 से 9 बजे तक निर्धारित है। परीक्षा कक्ष में महत्वपूर्ण निर्देश पढ़ने के लिए सुबह 9:50 से 10 बजे तक 10 मिनट का समय दिया जाएगा। इसके बाद सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक अभ्यर्थी प्रश्नों के उत्तर दर्ज कर सकेंगे।
दूसरी पाली के अभ्यर्थियों की रिपोर्टिंग दोपहर 1 से 2 बजे तक होगी। परीक्षा से पहले महत्वपूर्ण निर्देश पढ़ने के लिए दोपहर 2:50 से 3 बजे तक 10 मिनट का समय निर्धारित है। इसके बाद दोपहर 3 बजे से शाम 5:30 बजे तक परीक्षा होगी।
किन शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य?
कर्मचारी चयन मंडल की गाइडलाइन के अनुसार प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में कार्यरत विभिन्न श्रेणियों के शिक्षकों को पात्रता परीक्षा में शामिल होना होगा। इनमें सहायक शिक्षक, प्राथमिक शिक्षक, संविदा शाला शिक्षक (वर्ग-3), सहायक अध्यापक, प्रयोगशाला सहायक तथा प्राथमिक शिक्षक विज्ञान श्रेणी के शिक्षक शामिल हैं।
निर्धारित प्रावधानों के अनुसार सेवारत शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक हर हाल में शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना होगा।
दो साल के भीतर परीक्षा पास करने की चुनौती
सेवारत शिक्षकों के लिए निर्धारित समय-सीमा में टीईटी उत्तीर्ण करना अब बड़ी चुनौती बन गया है। यदि कोई शिक्षक पहली बार में परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाता है तो उसे उपलब्ध आगामी अवसरों में परीक्षा देनी होगी। शिक्षकों का कहना है कि एक ही अवधि में बार-बार परीक्षा देने की स्थिति में प्रत्येक प्रयास के लिए ₹1,000 शुल्क देना आर्थिक रूप से अतिरिक्त बोझ बन सकता है।
यही वजह है कि शिक्षक संगठन पूर्व में सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करते रहे हैं। अब परीक्षा की तारीख, आवेदन प्रक्रिया और शुल्क सामने आने के बाद शिक्षकों की नाराजगी फिर चर्चा में आ गई है।
परीक्षा में नहीं होगी नेगेटिव मार्किंग
प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा 150 अंकों की होगी। इसमें कुल 150 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा। प्रश्न-पत्र हल करने के लिए 2 घंटे 30 मिनट का समय मिलेगा। परीक्षा में गलत उत्तर देने पर अंक काटने का प्रावधान नहीं है।
माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा में भी प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा और परीक्षा के लिए 2 घंटे 30 मिनट का समय निर्धारित रहेगा। इसमें भी ऋणात्मक मूल्यांकन यानी नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान नहीं रखा गया है।
वर्गवार न्यूनतम उत्तीर्ण अंक
परीक्षा में सफलता के लिए वर्गवार न्यूनतम अंक निर्धारित किए गए हैं।
अनारक्षित वर्ग: कम से कम 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक होगा।
आरक्षित वर्ग: अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) एवं दिव्यांगजन अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक निर्धारित हैं।
परीक्षा केंद्र पर आधार और बायोमेट्रिक सत्यापन
परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए आधार पंजीयन अनिवार्य किया गया है। परीक्षा केंद्र पर बोर्ड द्वारा निर्धारित मूल फोटोयुक्त पहचान पत्र लेकर जाना होगा। अभ्यर्थी मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट में से किसी एक का उपयोग पहचान पत्र के रूप में कर सकते हैं।
इसके साथ आधार कार्ड, ई-आधार, आधार कार्ड की छायाप्रति, आधार नंबर अथवा वीआईडी की जानकारी भी साथ रखना अनिवार्य होगा। परीक्षा केंद्र में प्रवेश के समय और परीक्षा के दौरान बहुस्तरीय बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। बायोमेट्रिक सत्यापन के समय आधार अनलॉक होना आवश्यक रहेगा।
शिक्षकों के सामने अब दोहरी चुनौती
टीईटी की अनिवार्यता को लेकर प्रदेश में पहले से चल रही बहस के बीच अब परीक्षा कार्यक्रम और शुल्क सामने आने से शिक्षकों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक ओर उन्हें निर्धारित समय-सीमा के भीतर पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी, वहीं दूसरी ओर परीक्षा में असफल होने की स्थिति में दोबारा परीक्षा शुल्क जमा करना पड़ सकता है।
शिक्षकों का कहना है कि सरकार को सेवारत शिक्षकों की स्थिति को देखते हुए शुल्क के संबंध में राहत पर विचार करना चाहिए। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद निर्धारित पात्रता पूरी करना अब शिक्षकों के लिए आवश्यक हो गया है। ऐसे में 21 अगस्त से शुरू होने वाली आवेदन प्रक्रिया और 12 अक्टूबर से होने वाली परीक्षा पर प्रदेशभर के सेवारत शिक्षकों की नजर रहेगी।
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