बैगा अंचल में मौतों से मचा हड़कंप, फिरोज खान बोले- बैगा विकास का पूरा हिसाब दे सरकार
दो दर्जन से अधिक मौतों के बाद जागा प्रशासन, कांग्रेस नेता ने स्वास्थ्य, पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था पर उठाए सवाल
बैगा अंचल में मौतों पर सरकार को घेरा, 20 साल के खर्च का श्वेत पत्र मांगा
Seoni 23 August 2026
सिवनी यशो:- बालाघाट के बैगा संरक्षित अंचल में जलजनित बीमारी से दो दर्जन से अधिक मौतों के मामले को लेकर कांग्रेस नेता फिरोज खान ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बैगा अंचल में हुई मौतों ने सरकार की स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता और जनकल्याण व्यवस्था की गंभीर कमियों को उजागर कर दिया है। उन्होंने मांग की कि पिछले 20 वर्षों में बैगा जनजाति के विकास एवं संरक्षण के नाम पर स्वीकृत और खर्च की गई राशि का श्वेत पत्र तत्काल जारी किया जाए।
फिरोज खान ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि मौतों के बाद प्रशासन द्वारा फॉगिंग, दवाइयों का वितरण, स्वास्थ्य जांच और सफाई अभियान चलाकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लोग बीमारी से जूझ रहे थे और मौतें हो रही थीं, तब सरकारी मशीनरी कहां थी?
मौतों के बाद फॉगिंग उपलब्धि नहीं, लापरवाही का प्रमाण : खान
कांग्रेस नेता ने कहा कि लोगों की मौतों के बाद फॉगिंग कराना, मरीजों की जांच करना और दवाइयां बांटना सरकार की उपलब्धि नहीं है। यह इस बात का प्रमाण है कि यदि समय रहते निगरानी, स्वास्थ्य जांच, स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती तो हालात इतने भयावह होने से रोके जा सकते थे।
उन्होंने कहा कि प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रभावित क्षेत्रों में बीमारी फैलने के शुरुआती संकेतों के बाद क्या कार्रवाई की गई और जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा समय रहते क्या कदम उठाए गए।
बैगा विकास के नाम पर वर्षों से खर्च हो रहा बजट, फिर सुविधाएं कहां?
फिरोज खान ने कहा कि बैगा जनजाति के विकास, संरक्षण, स्वास्थ्य, आवास, पेयजल, पोषण और शिक्षा के नाम पर वर्षों से भारी-भरकम बजट खर्च किया जा रहा है। इसके बावजूद यदि बैगा अंचल के लोग दूषित पानी और बीमारी के कारण दम तोड़ रहे हैं तो सरकार को अब केवल भाषण और घोषणाएं नहीं, बल्कि पूरे खर्च का हिसाब देना होगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि बैगा विकास के नाम पर पैसा कहां गया? यदि पैसा खर्च हुआ तो जमीनी स्तर पर सुविधाएं कहां हैं? और यदि सुविधाएं नहीं पहुंचीं तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
20 वर्षों के खर्च का श्वेत पत्र जारी करने की मांग
फिरोज खान ने सरकार से मांग की कि पिछले 20 वर्षों में बैगा जनजाति के विकास एवं संरक्षण के नाम पर स्वीकृत और खर्च की गई प्रत्येक राशि का श्वेत पत्र जारी किया जाए।
उन्होंने कहा कि श्वेत पत्र में स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि—
- किस योजना के तहत कितना बजट स्वीकृत हुआ।
- कितना पैसा वास्तव में खर्च किया गया।
- किन गांवों में कौन-कौन से विकास कार्य कराए गए।
- प्रत्येक कार्य पर कितनी राशि खर्च हुई।
- योजनाओं का वास्तविक लाभ कितने परिवारों को मिला।
- योजनाओं की वर्तमान जमीनी स्थिति क्या है।
उन्होंने कहा कि हर गांव और हर योजना का हिसाब जनता के सामने आना चाहिए।
हजारों की जांच और सैकड़ों मरीजों का उपचार गंभीर स्थिति का संकेत
कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रभावित गांवों में हजारों लोगों की स्वास्थ्य जांच और सैकड़ों मरीजों के उपचार की जानकारी सामने आ रही है। ये आंकड़े स्वयं बताते हैं कि स्थिति कितनी गंभीर रही होगी।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि बीमारी इतनी विकराल होने से पहले स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के निगरानी तंत्र ने क्या किया? क्या समय रहते बीमारी के कारणों की पहचान की गई थी? क्या प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की जांच कराई गई थी? इन सभी सवालों का जवाब सरकार को देना चाहिए।
प्रत्येक मौत की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय हो
फिरोज खान ने मांग की कि बैगा अंचल में हुई प्रत्येक मौत की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच के बाद यह सार्वजनिक किया जाए कि मौतें किन परिस्थितियों में हुईं और उनमें दूषित पानी, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, प्रशासनिक लापरवाही अथवा अन्य किसी कारण की क्या भूमिका रही।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
बैगा योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार की भी जांच हो
कांग्रेस नेता ने कहा कि बैगा आवास एवं विकास योजनाओं में पूर्व में सामने आए कथित भ्रष्टाचार के मामलों को भी सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए। जिस जनजाति के नाम पर वर्षों से योजनाएं बनाई जा रही हैं और बजट स्वीकृत किया जा रहा है, उसी जनजाति के लोग आज भी बुनियादी स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक कमी का विषय नहीं है, बल्कि पूरी व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
हर गांव और हर रुपये का हिसाब जनता के सामने आए
फिरोज खान ने कहा कि सरकार चाहे तो जांच के माध्यम से पूरी सच्चाई सामने लाई जा सकती है। हर गांव का हिसाब हो, हर योजना का हिसाब हो और हर रुपये का हिसाब जनता के सामने रखा जाए।
उन्होंने कहा कि बैगा समाज के विकास के नाम पर खर्च की गई राशि का सामाजिक एवं वित्तीय ऑडिट कराया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि योजनाओं का वास्तविक लाभ हितग्राहियों तक पहुंचा या नहीं।
“मौतें सिर्फ आंकड़े नहीं, व्यवस्था की विफलता का आईना”
फिरोज खान ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि दो दर्जन से अधिक मौतों को महज बीमारी का मामला बताकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। मौतें सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का आईना हैं।
उन्होंने मांग की कि बैगा अंचल में उच्चस्तरीय जांच के साथ सुरक्षित पेयजल की स्थायी व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, नियमित स्वास्थ्य निगरानी तथा बैगा विकास योजनाओं के खर्च का सामाजिक एवं वित्तीय ऑडिट कराया जाए।
फिरोज खान ने कहा कि “अब बैगा समाज को आश्वासन नहीं, जवाब चाहिए। सरकार को बताना होगा कि बैगा विकास के नाम पर आया पैसा कहां खर्च हुआ और इसके बावजूद बैगा परिवार बीमारी से क्यों जूझ रहे हैं। राहत कार्य चलते रहें, लेकिन इसके साथ लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार की जवाबदेही भी तय हो—यही न्याय है।”
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