मध्यप्रदेशदेश विदेश

शिक्षक भर्ती का गणित: स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट की रिक्त पदों की स्थिति

विभाग के अनुसार हर रिक्त पद सीधी भर्ती के लिए उपलब्ध नहीं; विषयवार आवश्यकता, बैकलॉग और पदोन्नति के पदों को अलग-अलग समझना जरूरी

शिक्षक भर्ती का गणित: 59 हजार पद पदोन्नति के, हर रिक्ति सीधी भर्ती नहीं

भोपाल यशो :- मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती और रिक्त पदों को लेकर चल रही मांगों के बीच स्कूल शिक्षा विभाग ने रिक्त पदों की स्थिति और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट किया है। विभाग के अनुसार, केवल कुल रिक्त पदों की संख्या को आधार बनाकर सभी पदों पर सीधी भर्ती की मांग करना उचित नहीं है, क्योंकि रिक्त पदों में सीधी भर्ती, पदोन्नति, विषयवार आवश्यकता और आरक्षण से जुड़े पद अलग-अलग श्रेणियों में आते हैं।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया निर्धारित नियमों, विषयवार आवश्यकता, आरक्षण व्यवस्था और पदोन्नति के प्रावधानों के अनुसार ही आगे बढ़ाई जा सकती है।

कुल रिक्त पदों का मतलब इतनी सीधी भर्तियां नहीं

स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार, विभाग में दिखाई देने वाली कुल रिक्तियों को सीधे भर्ती योग्य पद मानना सही नहीं है। भर्ती के लिए उपलब्ध पदों का निर्धारण संबंधित संवर्ग के भर्ती नियमों के अनुसार होता है।

विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई स्थिति के अनुसार, रिक्त पदों में लगभग 59 हजार पद पदोन्नति से जुड़े बताए जा रहे हैं। ऐसे पदों को सीधे भर्ती में शामिल करने से पहले सेवारत शिक्षकों के पदोन्नति अधिकार और निर्धारित भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

इसलिए कुल रिक्त पदों और सीधी भर्ती के लिए वास्तव में उपलब्ध पदों के बीच अंतर को समझना जरूरी है।

गणित और विज्ञान के पदों की आवश्यकता अधिक

स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार, सीधी भर्ती के लिए उपलब्ध अधिकांश रिक्त पद गणित और विज्ञान जैसे विषयों से संबंधित हैं।

ऐसे में किसी दूसरे विषय के अभ्यर्थी को केवल रिक्त पद उपलब्ध होने के आधार पर इन पदों पर नियुक्ति नहीं दी जा सकती। संबंधित पद के लिए निर्धारित शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता और विषयवार पात्रता का पालन आवश्यक है।

यानी रिक्त पद होना और उस पद के लिए पात्र होना दो अलग-अलग स्थितियां हैं।

बैकलॉग पदों को भी सामान्य रिक्ति नहीं माना जा सकता

विभाग के अनुसार, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने के कारण कुछ पद बैकलॉग के रूप में रिक्त हैं।

ऐसे पदों को सामान्य सीधी भर्ती की रिक्तियों के समान नहीं माना जा सकता। बैकलॉग पदों को भरने के लिए निर्धारित आरक्षण नियमों और शासन के प्रावधानों का पालन आवश्यक है।

इसलिए कुल रिक्तियों में बैकलॉग पद शामिल होने की स्थिति में उन्हें भी सामान्य भर्ती के लिए उपलब्ध मान लेना सही नहीं होगा।

चयन सूची में नाम नहीं तो नियुक्ति का आधार क्या?

स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से उठाए गए एक महत्वपूर्ण बिंदु के अनुसार, आंदोलन कर रहे कुछ अभ्यर्थी स्वयं को चयनित शिक्षक बता रहे हैं। ऐसे में यदि किसी अभ्यर्थी का नाम चयन सूची अथवा प्रतीक्षा सूची में नहीं है, तो उसकी नियुक्ति का दावा किस आधार पर स्वीकार किया जा सकता है, यह सवाल भी महत्वपूर्ण है।

सरकार की किसी भी भर्ती प्रक्रिया में चयन सूची, पात्रता और निर्धारित नियमों का पालन करना आवश्यक है। केवल मांग या आंदोलन के आधार पर चयन प्रक्रिया से बाहर रहे अभ्यर्थियों को नियुक्ति देना नियमों और समान अवसर के सिद्धांत से जुड़ा विषय बन जाता है।

नए पात्र अभ्यर्थियों के अवसर का भी सवाल

विभाग के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में बड़ी संख्या में नए अभ्यर्थियों ने आवश्यक शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यताएं हासिल की हैं।

ऐसे में यदि पूर्व में अचयनित अभ्यर्थियों को किसी विशेष व्यवस्था के तहत नियुक्ति दी जाती है, तो वर्तमान में पात्र नए अभ्यर्थियों के अवसर का प्रश्न भी सामने आएगा। इसलिए किसी भी निर्णय में सभी पात्र अभ्यर्थियों के हित और भर्ती नियमों का ध्यान रखना जरूरी होगा।

विभाग का पक्ष: संवेदनशील समाधान, लेकिन नियमों के दायरे में

शिक्षक भर्ती की मांग कर रहे अभ्यर्थियों की समस्याओं को लेकर सरकार संवेदनशील है, लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार भर्ती प्रक्रिया को नियमों से अलग करके संचालित नहीं किया जा सकता।

विभाग की स्थिति के मुताबिक रिक्त पदों को भरने से पहले यह देखना आवश्यक है कि कौन-सा पद सीधी भर्ती का है, कौन-सा पद पदोन्नति के लिए निर्धारित है, किस विषय में आवश्यकता है, कौन-सा पद बैकलॉग से संबंधित है और संबंधित पद के लिए कितने अभ्यर्थी निर्धारित पात्रता पूरी करते हैं।

रिक्त पदों का वास्तविक गणित

कुल रिक्त पद ≠ कुल सीधी भर्ती के पद

रिक्त पदों को समझने के लिए उन्हें मुख्य रूप से इन आधारों पर देखना होगा—

  • सीधी भर्ती के लिए उपलब्ध पद
  • पदोन्नति के लिए निर्धारित पद
  • विषयवार रिक्त पद
  • आरक्षित वर्ग के बैकलॉग पद
  • निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले अभ्यर्थी

इसलिए स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि केवल कुल रिक्त पदों का आंकड़ा प्रस्तुत करके उतनी ही संख्या में तत्काल सीधी भर्ती की मांग करना वास्तविक भर्ती गणित को पूरी तरह नहीं दर्शाता।

सरकार के सामने चुनौती रिक्त पद भरने के साथ-साथ सेवारत शिक्षकों के पदोन्नति अधिकार, आरक्षण व्यवस्था, विषयवार आवश्यकता और सभी पात्र अभ्यर्थियों के समान अवसर को सुरक्षित रखने की भी है। इसी आधार पर शिक्षक भर्ती को लेकर आगे का निर्णय नियमों के अनुरूप किया जाना होगा।

यह भी पढ़ें –

इंदौर में 11 सितंबर से यात्री परिवहन विजन समिट-2026, CM मोहन यादव करेंगे शुभारंभ

शिक्षक पात्रता परीक्षा के विरोध में कर्मचारी संघ ने सौंपा ज्ञापन, 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को छूट देने की मांग

केंद्रीय विद्यालय सिवनी में प्रबंधन समिति की बैठक, शैक्षणिक गुणवत्ता पर जोर

दुबई में MP के वैश्विक निवेश मिशन की प्रभावशाली शुरुआत, CM मोहन यादव ने निवेशकों को दिया साझेदारी का न्योता
https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?id=159941&NoteId=159941&ModuleId=3&reg=48&lang=2

Dainikyashonnati

Related Articles

Back to top button