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15 साल की नाबालिग से प्रसव, आरोपी फरार—क्या बटवानी में POCSO कानून मज़ाक बन गया है?

अस्पताल में उम्र छिपाने की साजिश, परिजनों ने आरोपी को मोटरसाइकिल से भगाया

सिवनी यशो:- घंसौर थाना क्षेत्र के ग्राम बटवानी से सामने आया यह मामला न केवल कानून का खुला उल्लंघन है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र पर करारा तमाचा भी है।

यहां 15 वर्षीय नाबालिग बालिका से प्रसव का मामला उजागर हुआ है, जबकि मुख्य आरोपी आरिफ़ खान घटना के बाद से फरार है। आरोप है कि परिजनों ने जानबूझकर पुलिस से बचाने के लिए उसे भगाया, लेकिन अब तक कोई ठोस गिरफ्तारी सामने नहीं आई है।

प्रसव नहीं, अपराध छिपाने की कोशिश

जानकारी के अनुसार 23 दिसंबर 2025 को नाबालिग बालिका को प्रसव पीड़ा होने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कहानी लाया गया, जहां से उसे जिला अस्पताल सिवनी रेफर किया गया।

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि अस्पताल में पंजीयन के दौरान बालिका की उम्र जानबूझकर अधिक दर्शाई गई, ताकि नाबालिग से जुड़े गंभीर अपराध को साधारण प्रसव का रूप दिया जा सके।

लेकिन दस्तावेज़ों की जांच में आधार कार्ड और जन्मतिथि के अनुसार बालिका की उम्र मात्र 15 वर्ष निकली और पूरा खेल बेनकाब हो गया।

POCSO एक्ट की खुलेआम अवहेलना

यह मामला सीधे-सीधे POCSO अधिनियम के अंतर्गत गंभीर आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है। सवाल यह है कि

इतने स्पष्ट अपराध के बावजूद आरोपी अब तक गिरफ्त से बाहर क्यों है?

 उम्र छिपाने में अस्पताल स्तर पर किस-किस की भूमिका रही?

परिजनों ने किया आरोपी को फरार—कानून से खुली बगावत

सूत्रों के मुताबिक, आरोपी आरिफ़ खान को उसके पिता अल्ताफ़ खान, रिश्तेदार महमूद खान एवं एक अन्य परिजन द्वारा मोटरसाइकिल से फरार कराया गया, ताकि वह पुलिस कार्रवाई से बच सके।

यह न केवल अपराध को संरक्षण देना है, बल्कि न्याय प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप भी है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने खोली पोल

मामले की परतें तब खुलीं जब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष, स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

महिला एवं बाल विकास विभाग की सूचना के बाद पुलिस हरकत में आई, लेकिन अब तक कार्रवाई की रफ्तार पर सवाल कायम हैं।

दबिश के दावे, गिरफ्तारी शून्य

पुलिस का कहना है कि आरोपी व सहयोगियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक न आरोपी पकड़ा गया, न ही उसे भगाने वालों पर ठोस कार्रवाई दिखाई दी।

इनका कहना है

“परियोजना अधिकारी घंसौर से घटना की जानकारी मिलने के बाद तत्काल एएसआई को मौके पर भेजा गया। शिकायतकर्ता के साथ मिलकर आरोपी की तलाश में दबिश दी गई, लेकिन मौके पर कोई आरोपी नहीं मिला। पंचनामा तैयार किया गया है।”

— लक्ष्मण झरिया, थाना प्रभारी, घंसौर

 सवाल जो प्रशासन से जवाब मांगते हैं

नाबालिग से प्रसव के बावजूद आरोपी खुलेआम कैसे फरार है?

उम्र छिपाने वालों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?

आरोपी को भगाने वाले परिजन कानून से ऊपर हैं क्या?

POCSO मामलों में घंसौर क्षेत्र की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह फेल क्यों?

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