मध्यप्रदेशसिवनी

4 जनवरी को सिवनी में सनातन हुंकार, पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ जी करेंगे राष्ट्रवादी शंखनाद

Seoni 02 January 2026

सिवनी यशो:- धर्मनगरी सिवनी एक बार फिर सनातन चेतना, राष्ट्रवादी विचार और सांस्कृतिक स्वाभिमान की हुंकार सुनने जा रही है।
आगामी 4 जनवरी 2026, रविवार को सिवनी में एक भव्य और वैचारिक रूप से निर्णायक
“सनातन सम्मेलन” का आयोजन किया जा रहा है।

इस सम्मेलन में देशभर में अपनी निर्भीक, दो-टूक और राष्ट्रप्रथम विचारधारा के लिए पहचाने जाने वाले
प्रखर राष्ट्रवादी वक्ता पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे।
सम्मेलन दोपहर 2 बजे से प्रारंभ होगा।

🔥 सनातन पर प्रहारों के बीच वैचारिक प्रतिकार

आयोजकों के अनुसार, वर्तमान समय में जब सनातन संस्कृति पर निरंतर वैचारिक हमले हो रहे हैं,
राष्ट्रवादी सोच को कमजोर करने के प्रयास जारी हैं,
ऐसे समय में यह सम्मेलन मौन नहीं, बल्कि वैचारिक प्रतिकार बनेगा।

सिवनी जैसे धर्मप्रधान नगर में इस सम्मेलन का आयोजन
गौरव, चेतना और सांस्कृतिक आत्मसम्मान का विषय माना जा रहा है।

🕉️ सम्मेलन के स्पष्ट उद्देश्य

  • 🚩 सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों का सशक्त जागरण
  • 🚩 राष्ट्रवादी विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाना
  • 🚩 सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मजबूती देना
  • 🚩 समाज को वैचारिक रूप से जागृत और संगठित करना
  • 🚩 युवाओं को राष्ट्रहित में वैचारिक दिशा देना

सम्मेलन के दौरान वर्तमान सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चुनौतियों पर
बिना लाग-लपेट के सीधी और स्पष्ट बात रखे जाने की जानकारी दी गई है।

📌 कार्यक्रम विवरण

कार्यक्रम: सनातन सम्मेलन
दिनांक: 04 जनवरी 2026 (रविवार)
समय: दोपहर 2:00 बजे
मुख्य वक्ता: पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ जी
स्थान: राजवाड़ा लॉन, जबलपुर रोड, लुघरवाड़ा, जिला – सिवनी

🗣️ प्रेस से संवाद

आयोजकों ने प्रेस से संवाद करते हुए स्पष्ट कहा कि यह सम्मेलन
“सनातन के पक्ष में निर्भीक स्वर” बनेगा।
यह आयोजन किसी के विरोध में नहीं, बल्कि
राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के समर्थन में है।

🚩 जन-जन से आह्वान

आयोजक समिति ने जिले के सभी
सनातन धर्मप्रेमी, राष्ट्रचिंतक नागरिकों, युवाओं और मातृशक्ति से आह्वान किया है कि
वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर —

  • 🚩 सनातन के साथ खड़े हों
  • 🚩 राष्ट्रवादी विचारों को शक्ति दें
  • 🚩 इस वैचारिक आयोजन को ऐतिहासिक बनाएं

https://sanatanprabhat.org/english/46597.html

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