मध्यप्रदेशव्यापारसिवनी

कृषि विज्ञान केंद्र ने सुझाए धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की समस्याओं के समाधान

धान की रोपाई, कीट नियंत्रण और सामान्य सावधानियां

किसानों के लिए सामान्य दिशानिर्देश:

जल निकासी: नालियों के बीच पानी जमा न होने दें और सतत जल निकास सुनिश्चित करें।

छिड़काव: जब तक मौसम स्थिर न हो जाए, बुवाई या कीटनाशक/खरपतवारनाशी दवा का छिड़काव न करें।

खेत प्रबंधन: खेतों में उचित जल निकासी सुनिश्चित करें, नालियों, मेड़ों और निकास रास्तों को साफ रखें।

नर्सरी का बचाव: यदि बहाव का जोखिम अधिक हो, तो धान की नर्सरी को पॉलीथीन या शेड नेट से ढक दें।

भंडारण: बीज, उर्वरक और औजारों को ऊंचाई पर, जलरोधक स्थानों में रखें।

सब्जी फसलों का सहारा: सब्जियों की फसलों को सहारा देने के लिए बांस या जाल से मजबूत स्टेकिंग करें।

मशीनरी का उपयोग: जलभराव वाले खेतों में मशीनरी का उपयोग न करें।

पशुधन सुरक्षा: पशुओं को खुर घाव (फुट रॉट) और सांस संबंधी संक्रमणों से बचाने के लिए टीकाकरण या उपचार कराएं (यदि आवश्यक हो)। पशुओं को घर के अंदर या मजबूत शेड में रखें। बिजली चमकने या तेज हवा के दौरान पशुओं को चराने न ले जाएं।

सुरक्षा: किसान भाई वर्षाकाल के दौरान किसी भी प्रकार की बिजली उपकरणों और खंभों को न छुएं।

कृषि विज्ञान केंद्र ने सुझाए धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की समस्याओं के समाधान
कृषि विज्ञान केंद्र ने सुझाए धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की समस्याओं के समाधान

Seoni, 17 July 2025
सिवनी यशो:- प्राधिकृत अधिकारी कृषि विज्ञान केंद्र सिवनी ने बताया कि वैज्ञानिकों द्वारा समय-समय पर किसानों को समसामयिक जानकारी प्रदान की जाती है। वर्तमान समय में खेतों में धान,मक्का सोयाबीन एवं अरहर की बुवाई की जा चुकी है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ शेखर सिंह बघेल ने बताया कि वर्षा काल में किसान भाई अपने खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था करें, सोयाबीन फसल में पानी का जल निकासी की समुचित प्रबंध करना अति आवश्यक है ।

यह भी पढ़े :- <सफलता की कहानी: “गिफ्ट अ डेस्क” पहल बनी बदलाव की मिसालh3>

जलभराव से बचाव और उन्नत तकनीक

डॉ शेखर सिंह बघेल ने बताया कि लगातार वर्षा के दौरान पानी का भराव ना हो इस बात का विशेष ध्यान रखें। मक्के को जिन किसान भाइयों ने उन्नत तकनीक जैसे की रेज्ड बेड प्लांटर मशीन से (मेड व गहरी नाली पद्धति) द्वारा मक्का दलहन व तिलहन फसलों की बुवाई की है। इस विधि से अत्यधिक वर्षा होने पर नालियों से वर्षा जल बाहर निकल जाता है और फसलों को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचती है। अत: किसान भाई उन्नत तकनीक के द्वारा अत्यधिक वर्षा काल में भी बेहतर फसल प्राप्त कर सकते हैं ।

कृषि विज्ञान केंद्र ने सुझाए धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की समस्याओं के समाधान - Seoni News

कृषि ओपीडी में मिली सलाह

कृषि विज्ञान केंद्र की कृषि ओपीडी में ग्राम सिमरिया के प्रगतिशील किसान शिवराम सनोडिया और ग्राम फरेदा के भुजबल गहलोत सहित अन्य किसानों को तकनीकी सलाह और मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

डॉ. के.के. देशमुख ने किसानों को धान की सीधी बुवाई वाले ढलान वाले खेतों में, जहां पानी नहीं रुकता और पौधे पीले पड़ रहे हैं, वहां फेरस सल्फेट (10 ग्राम प्रति लीटर पानी) का घोल बनाकर पत्तियों पर 2-3 बार छिड़काव करने की सलाह दी। विकल्प के तौर पर, फेरस ई.डी.टी.ए. (12त्न आयरन) का 200 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड़ के हिसाब से 2-3 बार पत्तियों पर छिड़काव करने से भी पीलापन दूर होगा।

मक्का की फसल में जलभराव और पत्तियों के जामुनी रंग के होने पर, जिससे पौधे की वृद्धि रुक जाती है, किसानों को 200 लीटर पानी में 4.0 किलोग्राम डीएपी घोलकर छानने और प्रति एकड़ की दर से खड़ी फसल में 2-3 बार छिड़काव करने से जामुनी रंग की धारियों की समस्या से राहत मिलने की बात कही गई।

यह भी पढ़े :-
कागज़़ी उपलब्धियों और ज़मीनी हकीकत के बीच पसरा है प्यासा भारत

धान की रोपाई, कीट नियंत्रण और सामान्य सावधानियां

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. निखिल सिंह ने सलाह दी कि यदि धान की नर्सरी 20 से 25 दिन की हो गई हो, तो वर्षा कम होने पर ही तैयार खेतों में धान की रोपाई करें। रोपाई के लिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 20 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखने का सुझाव दिया गया। धान के खेतों की मेड़ों को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया ताकि वर्षा का अधिक से अधिक पानी खेत में संचित हो सके।

जिन किसानों की मिर्च और बैंगन की नर्सरी तैयार है, वे भी मौसम के अनुसार वर्षा कम होने पर ही रोपाई करें। मक्का की फसल में प्रारंभिक अवस्था में फॉल आर्मी कीट के नियंत्रण के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट दवा की 5त्न एस.जी. (100 ग्राम प्रति एकड़) मात्रा का छिड़काव आवश्यक बताया गया।

Dainikyashonnati

Related Articles

Back to top button